1 जुलाई से यूपी के ग्राम सचिवालयों में बैठेंगे लेखपाल, ग्रामीणों को नहीं लगाने पड़ेंगे तहसील के चक्कर, गाँव में ही मिलेंगी ये सेवाएँ
Gaon Connection | Jun 30, 2026, 17:28 IST
उत्तर प्रदेश में 1 जुलाई से ग्राम सचिवालयों में लेखपालों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद आय, जाति, निवास प्रमाणपत्र, खतौनी की नकल समेत कई राजस्व सेवाओं का निस्तारण गाँव में ही हो सकेगा। लेखपालों की उपस्थिति रोस्टर के आधार पर होगी, जिससे ग्रामीणों को तहसील के बार-बार चक्कर लगाने से राहत मिलेगी।
आय-जाति-निवास प्रमाणपत्र बनवाना होगा आसान
उत्तर प्रदेश के ग्रामीणों के लिए राजस्व सेवाओं को आसान बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब प्रदेश के सभी ज़िलों में 1 जुलाई से ग्राम सचिवालयों में लेखपाल नियमित रूप से बैठेंगे। इससे आय, जाति, निवास, हैसियत प्रमाणपत्र, खतौनी की नकल और राजस्व विभाग से जुड़े कई दूसरे काम गाँव में ही हो सकेंगे। नई व्यवस्था के लिए राजस्व परिषद ने सभी ज़िलाधिकारियों को रोस्टर तैयार कर इसे तत्काल लागू करने के निर्देश दिए हैं।
अब तक ग्रामीणों को छोटे-छोटे राजस्व कार्यों के लिए भी कई बार तहसील के चक्कर लगाने पड़ते थे या लेखपाल से मिलने के लिए अलग-अलग जगहों पर जाना पड़ता था। इससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ग्राम सचिवालय ही राजस्व सेवाओं का प्रमुख केंद्र बनेंगे। सरकार का लक्ष्य इन्हें ऐसे 'वन स्टॉप सर्विस सेंटर' के रूप में विकसित करना है, जहाँ ग्रामीणों को एक ही स्थान पर अधिकांश सरकारी सेवाएँ आसानी से मिल सकें।
राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा ने बताया कि ग्राम पंचायतों में पहले से संचालित ग्राम सचिवालयों को अब और प्रभावी बनाया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक ज़िले में लेखपालों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। उनकी मौजूदगी से आय, जाति, निवास और हैसियत प्रमाणपत्र, खतौनी की नकल समेत राजस्व विभाग की करीब दस प्रमुख सेवाओं का निस्तारण तेज़ी से हो सकेगा।
ग्राम सचिवालयों में पंचायत सहायकों के माध्यम से पहले से कई ऑनलाइन सेवाएँ उपलब्ध हैं। लेखपालों की नियमित मौजूदगी से दस्तावेज़ों का सत्यापन और अन्य प्रक्रियाएँ भी समय पर पूरी हो सकेंगी। इससे ग्रामीणों को प्रमाणपत्र बनवाने या भूमि संबंधी कार्यों के लिए बार-बार तहसील नहीं जाना पड़ेगा।
लेखपालों की ज़िम्मेदारी केवल प्रमाणपत्रों तक सीमित नहीं है। वे वरासत, स्वामित्व योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, राहत एवं पुनर्वास, आपदा प्रबंधन, भूमि विवादों के निस्तारण, फसल गिरदावरी, कृषि गणना, जनगणना, प्राकृतिक आपदाओं की रिपोर्ट, अवैध कब्ज़ों की जाँच, खनन सत्यापन, सार्वजनिक वितरण प्रणाली और धान-गेहूँ खरीद केंद्रों के सत्यापन जैसे कई अहम कार्य भी करते हैं। विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी उनकी रिपोर्ट और सत्यापन आवश्यक होता है।
राजस्व परिषद ने सभी ज़िलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे लेखपालों की उपस्थिति का रोस्टर तैयार कर 1 जुलाई से नई व्यवस्था लागू करें। सरकार का मानना है कि इससे राजस्व सेवाएँ अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेंगी, साथ ही ग्रामीणों को सरकारी कामों के लिए अनावश्यक भागदौड़ से भी राहत मिलेगी।
अब तक ग्रामीणों को छोटे-छोटे राजस्व कार्यों के लिए भी कई बार तहसील के चक्कर लगाने पड़ते थे या लेखपाल से मिलने के लिए अलग-अलग जगहों पर जाना पड़ता था। इससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ग्राम सचिवालय ही राजस्व सेवाओं का प्रमुख केंद्र बनेंगे। सरकार का लक्ष्य इन्हें ऐसे 'वन स्टॉप सर्विस सेंटर' के रूप में विकसित करना है, जहाँ ग्रामीणों को एक ही स्थान पर अधिकांश सरकारी सेवाएँ आसानी से मिल सकें।
खतौनी समेत कई सेवाएँ अब गाँव में ही होंगी उपलब्ध
ग्राम सचिवालयों में पंचायत सहायकों के माध्यम से पहले से कई ऑनलाइन सेवाएँ उपलब्ध हैं। लेखपालों की नियमित मौजूदगी से दस्तावेज़ों का सत्यापन और अन्य प्रक्रियाएँ भी समय पर पूरी हो सकेंगी। इससे ग्रामीणों को प्रमाणपत्र बनवाने या भूमि संबंधी कार्यों के लिए बार-बार तहसील नहीं जाना पड़ेगा।
रोस्टर के आधार पर बैठेंगे लेखपाल
राजस्व परिषद ने सभी ज़िलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे लेखपालों की उपस्थिति का रोस्टर तैयार कर 1 जुलाई से नई व्यवस्था लागू करें। सरकार का मानना है कि इससे राजस्व सेवाएँ अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेंगी, साथ ही ग्रामीणों को सरकारी कामों के लिए अनावश्यक भागदौड़ से भी राहत मिलेगी।