99 आवेदन, 11 को मंज़ूरी! मिज़ोरम में लोकल फलों से बनेगी फ्रूट बीयर, जानें किसानों को क्या होगा फ़ायदा

Mansi | Aug 20, 2026, 17:31 IST
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मिज़ोरम सरकार ने स्थानीय फलों से फ्रूट बीयर बनाने की योजना बनाई है, जिसके तहत 11 आवेदकों को लाइसेंस जारी करने का निर्णय लिया गया है। यह पहल किसानों को अपनी उपज के लिए नए बाज़ार उपलब्ध कराएगी और खाद्य सुरक्षा मानकों तथा प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे बागवानी उत्पादों की मांग में वृद्धि होने की संभावना है।

मिज़ोरम में लोकल फलों से बनेगी फ्रूट बीयर<br>
मिज़ोरम में लोकल फलों से बनेगी फ्रूट बीयर
मिज़ोरम में स्थानीय फलों और कृषि उपज को बेहतर बाज़ार से जोड़ने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने लोकल फलों से फ्रूट बीयर बनाने के लिए 11 आवेदनों को लाइसेंस देने की मंज़ूरी दी है। सरकार का मानना है कि स्थानीय स्तर पर फलों की प्रोसेसिंग बढ़ने से किसानों को अपनी उपज के लिए नए खरीदार मिल सकते हैं और बागवानी उत्पादों की मांग भी बढ़ सकती है।

इस फ़ैसले के लिए मुख्यमंत्री लालदुहोमा की अध्यक्षता में चयन समिति की बैठक हुई। समिति के सामने कुल 99 आवेदन आए थे। इनमें 96 आवेदन लोकल फ्रूट बीयर बनाने और तीन वाइनरी लगाने से जुड़े थे। आवेदनों की जाँच, आवेदकों के इंटरव्यू और उपलब्ध होने पर साइट निरीक्षण के बाद 11 आवेदकों को लाइसेंस के लिए योग्य माना गया। वहीं, 13 आवेदनों पर आगे जाँच के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है।

फलों की प्रोसेसिंग से किसानों को मिलेगा नया बाज़ार

मिज़ोरम में कई तरह के फल और बागवानी उत्पाद पैदा होते हैं। इनमें अनानास, पैशन फ्रूट, ड्रैगन फ्रूट, केला, अमरूद, आंवला, कटहल और स्टारफ्रूट जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन फलों को सिर्फ़ ताज़ा बेचने के बजाय प्रोसेसिंग के ज़रिए नए उत्पादों में बदलने से किसानों के लिए बाज़ार के विकल्प बढ़ सकते हैं। सरकार का फ़ोकस इसी तरह की वैल्यू एडिशन पर है, ताकि स्थानीय कृषि उपज को राज्य के भीतर ही एक नया बाज़ार मिल सके। इससे किसानों को अपनी उपज की बेहतर कीमत मिलने की संभावना बन सकती है।

लाइसेंस से पहले सुरक्षा मानकों की भी जाँच

फ्रूट बीयर बनाने वाले निर्माताओं के चयन में केवल आवेदन देखना ही पर्याप्त नहीं था। चयन प्रक्रिया के दौरान खाद्य सुरक्षा नियमों, ज़रूरी मशीनरी, वित्तीय क्षमता और पर्याप्त मानव संसाधन जैसी चीज़ों को भी ध्यान में रखा गया। सरकार ने चयनित निर्माताओं को आधुनिक प्रोसेसिंग तकनीक अपनाने और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करने पर ज़ोर दिया है। यानी स्थानीय फलों से नया उत्पाद तैयार करने के साथ उसकी गुणवत्ता और सुरक्षा पर भी ध्यान देना होगा।

चयनित निर्माताओं को दी जाएगी ट्रेनिंग

लाइसेंस मिलने के बाद काम शुरू करने वाले निर्माताओं को तकनीकी और दूसरी ज़रूरी मदद देने की भी तैयारी है। इसके तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने, किसानों के साथ बेहतर संपर्क बनाने और दूसरे उत्पादकों के साथ अनुभव साझा करने के लिए इंटर-विज़िट जैसी पहल पर चर्चा हुई है। इसका एक उद्देश्य यह भी है कि फल उत्पादकों और प्रोसेसिंग यूनिट्स के बीच सीधा संपर्क बने। इससे किसानों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि बाज़ार में किस तरह के उत्पादों की मांग है।

मिज़ोरम में शराब से जुड़े नियमों में 2025 में बड़ा बदलाव किया गया था। राज्य विधानसभा ने 10 मार्च 2025 को मिज़ोरम लिकर प्रोहिबिशन अमेंडमेंट एक्ट पारित किया। संशोधन के बाद स्थानीय कृषि और बागवानी उपज से तैयार कुछ तरह की वाइन और लोकल बीयर के निर्माण, बिक्री और आपूर्ति का रास्ता खुला। इससे पहले राज्य में शराबबंदी के तहत बीयर और वाइन समेत कई तरह के मादक पेय पर प्रतिबंध था। नए प्रावधानों में स्थानीय कृषि उत्पादों से तैयार पेय के लिए अलग व्यवस्था की गई है।

पर्यटकों और मेडिकल ज़रूरतों के लिए भी नियम

संशोधित क़ानून में कुछ विशेष परिस्थितियों के लिए भी प्रावधान किए गए हैं। विदेशी गणमान्य व्यक्तियों और घरेलू पर्यटकों को इंडियन मेड फॉरेन लिकर रखने और सेवन करने के लिए विशेष परमिट की व्यवस्था है। वहीं, मेडिकल ज़रूरत वाले लोगों के लिए रेड कार्ड परमिट का प्रावधान भी किया गया है।

मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने कहा है कि किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर कीमत और नए बाज़ार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। स्थानीय फलों से प्रोसेस्ड उत्पाद तैयार होने पर किसानों के लिए बिक्री के नए रास्ते खुल सकते हैं।
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