FY26 में चीनी उत्पादन 7% बढ़ा लेकिन संकट गहराया! ₹2130 करोड़ तक पहुंचा भुगतान संकट, ISMA ने मांगी राहत
Gaon Connection | Apr 30, 2026, 14:01 IST
भारत में चीनी उत्पादन में 7.32 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे यह आंकड़ा 27.52 मिलियन टन तक पहुंच गया है। जबकि महाराष्ट्र और कर्नाटक में उत्पादन में वृद्धि देखी जा रही है, उत्तर प्रदेश में स्थिति विपरीत है और उत्पादन में कमी आ रही है।
चीनी मिलों पर बढ़ता दबाव
भारत में 2025-26 विपणन सत्र के दौरान चीनी उत्पादन में अब तक 7.32 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह 27.52 मिलियन टन तक पहुंच गया है। पिछले साल इसी अवधि (30 अप्रैल तक) यह उत्पादन 25.64 मिलियन टन था। उद्योग संगठन इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने कहा कि महाराष्ट्र और कर्नाटक में उत्पादन बढ़ने से यह वृद्धि संभव हुई है।
ISMA के अनुसार देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में उत्पादन 8.09 मिलियन टन से बढ़कर 9.92 मिलियन टन हो गया है। वहीं कर्नाटक में उत्पादन 4.04 मिलियन टन से बढ़कर 4.80 मिलियन टन तक पहुंच गया। हालांकि उत्तर प्रदेश में उत्पादन घटकर 9.24 मिलियन टन से 8.96 मिलियन टन रह गया है। चीनी विपणन सत्र अक्टूबर से सितंबर तक चलता है।
मिलिंग गतिविधियां तेजी से कम हो गई हैं और इस समय केवल 5 चीनी मिलें चालू हैं, जबकि पिछले साल इसी समय 19 मिलें चल रही थीं। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में मुख्य सत्र के लिए सभी मिलें बंद हो चुकी हैं। हालांकि कर्नाटक और तमिलनाडु में जून-जुलाई 2026 के विशेष सत्र के दौरान कुछ मिलें संचालन जारी रखेंगी, जिनसे करीब 5 लाख टन उत्पादन होने की उम्मीद है।
सीजन के अंत में उद्योग ने चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) में जल्द संशोधन की मांग की है। बढ़ती उत्पादन लागत और कम एक्स-मिल कीमतों के कारण मिलों के नकदी प्रवाह पर दबाव बढ़ रहा है और गन्ना भुगतान बकाया भी बढ़ रहा है। महाराष्ट्र में ही अप्रैल मध्य तक गन्ना भुगतान बकाया 2,130 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले साल के 752 करोड़ रुपये से लगभग तीन गुना ज्यादा है।
ISMA ने सरकार से एथेनॉल मिश्रण लक्ष्य को मौजूदा E20 से आगे बढ़ाकर E25 और E85/E100 तक ले जाने की मांग की है। इसके साथ ही फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को तेजी से लागू करने और जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाने की भी अपील की गई है। संगठन ने कहा कि एथेनॉल की खरीद कीमतों में संशोधन में देरी के कारण डिस्टिलेशन क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। इसलिए निवेशकों को भरोसा देने और क्षमता बढ़ाने के लिए जल्द कीमत संशोधन जरूरी है।
ISMA ने 2025-26 विपणन सत्र के लिए एथेनॉल डाइवर्जन के बाद कुल चीनी उत्पादन 29.3 मिलियन टन रहने का अनुमान जताया है, जो 2024-25 के 26.12 मिलियन टन से अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि उत्पादन में वृद्धि जारी है, लेकिन नीति समर्थन के बिना उद्योग पर दबाव बना रह सकता है।