बारिश से पहले करा लें गाय-भैंसों का गलघोटू का टीका, नहीं तो हो सकता है भारी नुकसान
Gaon Connection | Apr 04, 2026, 18:57 IST
घातक गलघोटू विशेषकर बारिश के मौसम में गाय-भैंसों के बीच तेजी से फैलता है। यदि समय रहते इनका टीकाकरण नहीं किया गया, तो पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसलिए, बारिश की शुरुआत होते ही पशुपालकों को पशुओं का टीकाकरण करवाना अनिवार्य है।
समय पर टीकाकरण ही है सबसे बड़ा उपाय
गलघोटू (H.S.) एक जानलेवा बैक्टीरियल बीमारी है जो खासकर गाय और भैंसों को निशाना बनाती है, और बारिश के मौसम में तेजी से फैलती है। इस गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे कारगर तरीका समय पर टीकाकरण है, जो न केवल पशुओं को सुरक्षित रखता है बल्कि पशुपालकों को बड़े आर्थिक नुकसान से भी बचाता है। टीकाकरण से रोग के फैलाव को रोका जा सकता है और पूरे पशुधन को सुरक्षित रखा जा सकता है। इसकी जानकारी पशु जैविक औषधि संस्थान (IVB), पशुपालन निदेशालय परिसर, बादशाह बाग, लखनऊ की तरफ से दी गई है।
गलघोटू या हेमरेजिक सेप्टीसीमिया एक गंभीर और तेजी से फैलने वाला बैक्टीरियल रोग है, जो मुख्य रूप से गाय और भैंस को प्रभावित करता है। यह बीमारी खासकर बारिश के मौसम में ज्यादा फैलती है और समय पर इलाज या रोकथाम न होने पर पशुओं के लिए घातक साबित हो सकती है। इसलिए पशुपालकों के लिए इस बीमारी की जानकारी और बचाव के उपाय जानना बेहद जरूरी है।
गलघोटू से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका समय पर टीकाकरण है। यह न केवल पशुओं को बीमारी से बचाता है, बल्कि पशुपालकों को होने वाले आर्थिक नुकसान को भी कम करता है। टीकाकरण के माध्यम से रोग के फैलाव को रोका जा सकता है और पूरे क्षेत्र में पशुओं को सुरक्षित रखा जा सकता है।
इस बीमारी से बचाव के लिए मुख्य रूप से दो प्रकार के टीके उपयोग में लाए जाते हैं। ऑयल एडजुवेंट वैक्सीन, जो लंबे समय तक सुरक्षा प्रदान करती है, और एलम ट्रीटेड वैक्सीन, जो लगभग छह महीने तक सुरक्षा देती है। पशुपालक अपने क्षेत्र और आवश्यकता के अनुसार इनका उपयोग कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार पशुओं को पहली बार 6 महीने की उम्र में टीका लगाना चाहिए और इसके बाद हर साल एक बार बूस्टर डोज देना जरूरी है। टीकाकरण का सबसे उपयुक्त समय मानसून से पहले, यानी मई-जून का महीना माना जाता है। टीका त्वचा के नीचे (सबक्यूटेनियस) और गर्दन के हिस्से में लगाया जाता है।
गलघोटू का टीका मुख्य रूप से गाय और भैंस को लगाया जाता है। इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों में भेड़ और बकरी को भी टीकाकरण कराया जा सकता है, ताकि बीमारी का फैलाव रोका जा सके।
टीकाकरण करते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए, जैसे केवल स्वस्थ पशुओं को ही टीका लगाना, वैक्सीन को 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान पर सुरक्षित रखना और टीकाकरण के बाद पशुओं को तनाव से बचाना। बीमार पशुओं को टीका नहीं लगाना चाहिए।
समय पर टीकाकरण कराने से पशुओं में बीमारी का खतरा कम होता है, जिससे दूध उत्पादन और पशु स्वास्थ्य बेहतर रहता है। इसके साथ ही पशुपालकों को बड़े आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकता है और रोग के फैलाव को भी नियंत्रित किया जा सकता है।
गलघोटू जैसी खतरनाक बीमारी से बचाव के लिए जागरूकता और समय पर टीकाकरण बेहद जरूरी है। पशुपालकों को चाहिए कि वे अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क कर सरकारी योजनाओं के तहत उपलब्ध मुफ्त टीकाकरण का लाभ उठाएं और अपने पशुओं को सुरक्षित रखें।
गलघोटू (H.S.) बीमारी क्या है?
टीकाकरण क्यों है जरूरी?
कौन-कौन से टीके उपयोग होते हैं?
टीकाकरण का सही समय और तरीका
किन पशुओं को लगाना चाहिए टीका?
टीकाकरण के दौरान सावधानियां
पशुपालकों को होने वाले लाभ
गलघोटू जैसी खतरनाक बीमारी से बचाव के लिए जागरूकता और समय पर टीकाकरण बेहद जरूरी है। पशुपालकों को चाहिए कि वे अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क कर सरकारी योजनाओं के तहत उपलब्ध मुफ्त टीकाकरण का लाभ उठाएं और अपने पशुओं को सुरक्षित रखें।