Global Farmer Survey 2026: दुनियाभर के किसानों पर बढ़ा संकट! 158 देशों के सर्वे में आधे किसानों ने कहा- नहीं मिलता फसल का सही दाम
Lata Mishra | Jul 08, 2026, 12:29 IST
आधे से ज़्यादा किसानों को अपनी मेहनत की फसल का सही दाम नहीं मिल पा रहा है। मौसम की मार और कीड़े-मकोड़ों से खेती पर खतरा मंडरा रहा है। विकिफार्मर के सर्वे में 51.1% किसानों ने कहा कि उन्हें उपज का उचित मूल्य नहीं मिला, 45.1% की आय घटी और 83% को फसल का नुकसान हुआ।
दुनिया भर के किसानों की समस्याएं अलग-अलग जरूर हैं, लेकिन उनकी चिंता लगभग एक जैसी है—मेहनत का उचित दाम, मौसम से सुरक्षा और स्थिर आमदनी।
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में किसान आज एक जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं। कहीं मौसम फसलों को बर्बाद कर रहा है, कहीं लागत बढ़ रही है, तो कहीं किसानों को अपनी उपज का उचित दाम नहीं मिल रहा। इन समस्याओं की झलक अब तक के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय किसान सर्वे में भी देखने को मिली है। अंतरराष्ट्रीय कृषि प्लेटफॉर्म Wikifarmer द्वारा किए गए Voice of the Farmer 2026 सर्वे में सामने आया है कि दुनिया के हर दो में से एक किसान को लगता है कि उसकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिलता। वहीं बड़ी संख्या में किसानों ने घटती आमदनी, जलवायु परिवर्तन और सरकारी सहयोग की कमी को अपनी सबसे बड़ी चिंता बताया है।
दरअसल, Wikifarmer ने नवंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच 158 देशों के 10,234 किसानों से बातचीत की। किसानों से उनकी आय, फसल के दाम, मौसम से होने वाले नुकसान, सरकारी सहायता और मानसिक तनाव जैसे मुद्दों पर सवाल पूछे गए। हालांकि यह Self-selected Survey है, यानी इसमें किसानों ने अपनी इच्छा से हिस्सा लिया। इसलिए इसके नतीजे पूरी दुनिया के किसानों का आधिकारिक प्रतिनिधित्व नहीं करते, लेकिन इतने बड़े स्तर पर किसानों के अनुभवों की एक महत्वपूर्ण तस्वीर जरूर पेश करते हैं।
आधे किसानों ने कहा- मेहनत का सही दाम नहीं मिलता
खेती का सबसे बड़ा संकट बाजार से जुड़ा दिखाई देता है। सर्वे में 51.1 प्रतिशत किसानों ने कहा कि उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलता। यानी हर दो में से एक किसान अपनी फसल की कीमत से संतुष्ट नहीं है। फसल उत्पादन की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन बाजार में मिलने वाला दाम उसी गति से नहीं बढ़ रहा। ऐसे में किसानों की आय पर सीधा असर पड़ रहा है।
कम हो रही है किसानों की आमदनी
सर्वे के मुताबिक 45.1 प्रतिशत किसानों ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में उनकी आमदनी कम हुई है। इनमें 24.1 प्रतिशत किसानों ने कहा कि उनकी आय में भारी गिरावट आई है।इसके विपरीत केवल 9.4 प्रतिशत किसानों ने आय में उल्लेखनीय सुधार होने की बात कही। यूरोप में सबसे अधिक किसानों ने आय घटने की बात कही, जबकि दक्षिण एशिया और
अफ्रीका में भी बड़ी संख्या में किसान आर्थिक दबाव महसूस कर रहे हैं।मौसम बना खेती का सबसे बड़ा जोखिम
जलवायु परिवर्तन का असर अब केवल वैज्ञानिक रिपोर्टों तक सीमित नहीं है। किसान भी इसे अपनी सबसे बड़ी चुनौती मान रहे हैं। सर्वे में शामिल 83 प्रतिशत किसानों ने बताया कि इस साल मौसम या कीटों की वजह से उनकी फसल प्रभावित हुई। करीब 25 प्रतिशत किसानों की 25 फीसदी से ज्यादा उपज नष्ट हो गई। रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक नुकसान इन कारणों से हुआ-
सरकारी मदद से भी संतुष्ट नहीं किसान
सर्वे में किसानों से पूछा गया कि वे अपनी सरकार द्वारा मिलने वाले सहयोग को कैसे देखते हैं। 63.4 प्रतिशत किसानों ने सरकारी सहायता को पांच में से केवल 1 या 2 अंक दिए। लगभग आधे किसानों ने सरकारी सहयोग को सबसे निचले स्तर पर रखा, जबकि सकारात्मक रेटिंग देने वाले किसानों की संख्या काफी कम रही।
खेती का दबाव मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल रहा
खेती से जुड़ी आर्थिक और जलवायु चुनौतियों का असर किसानों की मानसिक स्थिति पर भी दिखाई दे रहा है। सर्वे में 21.4 प्रतिशत किसानों ने अपने तनाव को सबसे अधिक स्तर पर बताया। 41 से 50 वर्ष आयु वर्ग के किसानों में तनाव सबसे ज्यादा दर्ज किया गया।
एक अच्छी खबर भी मिली
रिपोर्ट में एक सकारात्मक संकेत भी सामने आया। जो किसान अपनी उपज सीधे ऑनलाइन ग्राहकों को बेच रहे थे, उनमें आय घटने की संभावना लगभग 35 प्रतिशत कम पाई गई। इसी तरह किसान बाजार (Farmers' Market) में सीधे बिक्री करने वाले किसानों की स्थिति भी अपेक्षाकृत बेहतर रही। इससे संकेत मिलता है कि डिजिटल मार्केटिंग, ई-कॉमर्स और सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंच किसानों की आय बढ़ाने में मददगार हो सकती है।
भारत के किसानों के लिए क्या है सीख?
भारत में भी किसान जलवायु परिवर्तन, बढ़ती लागत और बाजार में उचित मूल्य जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। हाल के वर्षों में सरकार ने FPO, e-NAM, डिजिटल कृषि मिशन, फसल बीमा योजना और किसान ड्रोन जैसी कई पहल शुरू की हैं। लेकिन यह रिपोर्ट बताती है कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए उन्हें बेहतर बाजार, सीधे खरीदारों तक पहुंच और जलवायु जोखिम से सुरक्षा देना भी उतना ही जरूरी है।
दरअसल, Wikifarmer ने नवंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच 158 देशों के 10,234 किसानों से बातचीत की। किसानों से उनकी आय, फसल के दाम, मौसम से होने वाले नुकसान, सरकारी सहायता और मानसिक तनाव जैसे मुद्दों पर सवाल पूछे गए। हालांकि यह Self-selected Survey है, यानी इसमें किसानों ने अपनी इच्छा से हिस्सा लिया। इसलिए इसके नतीजे पूरी दुनिया के किसानों का आधिकारिक प्रतिनिधित्व नहीं करते, लेकिन इतने बड़े स्तर पर किसानों के अनुभवों की एक महत्वपूर्ण तस्वीर जरूर पेश करते हैं।
आधे किसानों ने कहा- मेहनत का सही दाम नहीं मिलता
खेती का सबसे बड़ा संकट बाजार से जुड़ा दिखाई देता है। सर्वे में 51.1 प्रतिशत किसानों ने कहा कि उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलता। यानी हर दो में से एक किसान अपनी फसल की कीमत से संतुष्ट नहीं है। फसल उत्पादन की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन बाजार में मिलने वाला दाम उसी गति से नहीं बढ़ रहा। ऐसे में किसानों की आय पर सीधा असर पड़ रहा है।
कम हो रही है किसानों की आमदनी
सर्वे के मुताबिक 45.1 प्रतिशत किसानों ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में उनकी आमदनी कम हुई है। इनमें 24.1 प्रतिशत किसानों ने कहा कि उनकी आय में भारी गिरावट आई है।इसके विपरीत केवल 9.4 प्रतिशत किसानों ने आय में उल्लेखनीय सुधार होने की बात कही। यूरोप में सबसे अधिक किसानों ने आय घटने की बात कही, जबकि दक्षिण एशिया और
अफ्रीका में भी बड़ी संख्या में किसान आर्थिक दबाव महसूस कर रहे हैं।मौसम बना खेती का सबसे बड़ा जोखिम
जलवायु परिवर्तन का असर अब केवल वैज्ञानिक रिपोर्टों तक सीमित नहीं है। किसान भी इसे अपनी सबसे बड़ी चुनौती मान रहे हैं। सर्वे में शामिल 83 प्रतिशत किसानों ने बताया कि इस साल मौसम या कीटों की वजह से उनकी फसल प्रभावित हुई। करीब 25 प्रतिशत किसानों की 25 फीसदी से ज्यादा उपज नष्ट हो गई। रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक नुकसान इन कारणों से हुआ-
- सूखा
- अत्यधिक गर्मी
- बाढ़
- तूफान
- पाला
- कीट एवं रोग
सरकारी मदद से भी संतुष्ट नहीं किसान
सर्वे में किसानों से पूछा गया कि वे अपनी सरकार द्वारा मिलने वाले सहयोग को कैसे देखते हैं। 63.4 प्रतिशत किसानों ने सरकारी सहायता को पांच में से केवल 1 या 2 अंक दिए। लगभग आधे किसानों ने सरकारी सहयोग को सबसे निचले स्तर पर रखा, जबकि सकारात्मक रेटिंग देने वाले किसानों की संख्या काफी कम रही।
खेती का दबाव मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल रहा
खेती से जुड़ी आर्थिक और जलवायु चुनौतियों का असर किसानों की मानसिक स्थिति पर भी दिखाई दे रहा है। सर्वे में 21.4 प्रतिशत किसानों ने अपने तनाव को सबसे अधिक स्तर पर बताया। 41 से 50 वर्ष आयु वर्ग के किसानों में तनाव सबसे ज्यादा दर्ज किया गया।
एक अच्छी खबर भी मिली
रिपोर्ट में एक सकारात्मक संकेत भी सामने आया। जो किसान अपनी उपज सीधे ऑनलाइन ग्राहकों को बेच रहे थे, उनमें आय घटने की संभावना लगभग 35 प्रतिशत कम पाई गई। इसी तरह किसान बाजार (Farmers' Market) में सीधे बिक्री करने वाले किसानों की स्थिति भी अपेक्षाकृत बेहतर रही। इससे संकेत मिलता है कि डिजिटल मार्केटिंग, ई-कॉमर्स और सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंच किसानों की आय बढ़ाने में मददगार हो सकती है।
भारत के किसानों के लिए क्या है सीख?
भारत में भी किसान जलवायु परिवर्तन, बढ़ती लागत और बाजार में उचित मूल्य जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। हाल के वर्षों में सरकार ने FPO, e-NAM, डिजिटल कृषि मिशन, फसल बीमा योजना और किसान ड्रोन जैसी कई पहल शुरू की हैं। लेकिन यह रिपोर्ट बताती है कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए उन्हें बेहतर बाजार, सीधे खरीदारों तक पहुंच और जलवायु जोखिम से सुरक्षा देना भी उतना ही जरूरी है।