बिहार में मार्च 2026 के दौरान आंधी, तूफान, असामयिक बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के लिए राज्य सरकार ने बड़ी राहत का ऐलान किया है। प्राकृतिक आपदा से जिन किसानों की फसलें खराब हुई हैं, उन्हें कृषि इनपुट सब्सिडी योजना के तहत आर्थिक सहायता दी जाएगी। सरकार ने 13 जिलों के प्रभावित किसानों से ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं। इस योजना का लाभ रैयत और गैर-रैयत दोनों तरह के किसानों को मिलेगा, और सहायता राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाएगी।
किन किसानों को मिलेगा लाभ?
राज्य सरकार के अनुसार जिन किसानों की फसलें मार्च 2026 में खराब मौसम की वजह से नष्ट हुई हैं, वे इस योजना के पात्र होंगे। योजना का लाभ केवल किसान परिवार को दिया जाएगा, जिसमें पति-पत्नी और अवयस्क बच्चे शामिल हैं। आवेदन के दौरान आधार सत्यापन और परिवार की सही जानकारी देना अनिवार्य होगा। गलत जानकारी मिलने पर आवेदन रद्द किया जा सकता है।
इन 13 जिलों के किसानों को मिलेगा फायदा
सरकार ने जिन 13 जिलों को योजना में शामिल किया है, उनमें सहरसा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, अररिया, बेगूसराय, मधुबनी, पूर्णिया, खगड़िया, किशनगंज, मधेपुरा, दरभंगा, सुपौल और भागलपुर शामिल हैं। इन जिलों के 88 प्रखंडों और 1484 पंचायतों में फसल नुकसान की रिपोर्ट के बाद योजना लागू की गई है।
कितनी मिलेगी सहायता राशि?
फसल क्षेत्र और भूमि के प्रकार के अनुसार किसानों को अलग-अलग दर से अनुदान दिया जाएगा। असिंचित या वर्षा आधारित क्षेत्र के लिए 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर, सिंचित भूमि के लिए 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर और बहुवर्षीय फसल या गन्ना जैसी फसलों के लिए 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर तक सहायता दी जाएगी। अधिकतम 2 हेक्टेयर भूमि तक ही लाभ मिलेगा। सरकार ने न्यूनतम सहायता राशि भी तय की है, ताकि छोटे किसानों को भी राहत मिल सके।
आवेदन कैसे करें?
आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है। किसान बिहार कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के लिए 13 अंकों का किसान पंजीकरण नंबर जरूरी होगा। रैयत किसानों को एलपीसी या लगान रसीद अपलोड करनी होगी, जबकि गैर-रैयत किसानों को प्रमाणित स्वघोषणा पत्र देना होगा।
आवेदन की अंतिम तारीख
सरकार ने आवेदन की अंतिम तिथि 5 मई 2026 तय की है। ऐसे में पात्र किसानों को सलाह दी गई है कि वे समय रहते आवेदन कर योजना का लाभ उठाएं। क्योंकि लगातार बदलते मौसम और प्राकृतिक आपदाओं से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे समय में यह योजना किसानों को दोबारा खेती शुरू करने, बीज-खाद खरीदने और आर्थिक संकट से उबरने में मददगार साबित हो सकती है। बिहार सरकार की यह पहल प्रभावित किसानों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।