आम-अमरूद और लीची किसानों का खर्च होगा कम, पेस्टिसाइड छिड़काव पर मिलेगी 75% सब्सिडी
Mansi | Aug 14, 2026, 14:29 IST
बिहार के किसानों के लिए एक सुनहरा अवसर आया है। सरकार ने आम, अमरूद और लीची के बागों में कीटनाशक छिड़काव पर 75% तक सब्सिडी देने की घोषणा की है। यह सहायता कृषि कीट प्रबंधन योजना के तहत उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे किसानों को कीटनाशक के लिए सिर्फ 40 और 28 रुपये खर्च करने होंगे। कई फसलों के लिए इस तरह की राहत किसानों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाएगी।
बिहार में आम, अमरूद और लीची के बागों में कीट नियंत्रण के लिए किसानों को 75% तक सब्सिडी का लाभ मिलेगा
बिहार में फल उगाने वाले किसानों के लिए राहत की ख़बर है। राज्य सरकार आम, अमरूद और लीची के बागों को कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए कीटनाशक के छिड़काव पर 75% तक सब्सिडी दे रही है। यह सुविधा कीट प्रबंधन योजना के तहत दी जा रही है। इसका मक़सद किसानों का खर्च कम करना और समय पर बागों में कीट नियंत्रण की व्यवस्था करना है।
बागों में कीट और बीमारियों का असर होने पर फलों की गुणवत्ता के साथ उत्पादन भी प्रभावित होता है। कई किसान बढ़ते खर्च के कारण समय पर दवाओं का छिड़काव नहीं करा पाते। ऐसे में सरकारी सहायता से किसानों को कम खर्च में बागों की देखभाल करने में मदद मिल सकती है।
बिहार कृषि विभाग की जानकारी के मुताबिक, लीची के बाग में दो बार कीटनाशक का छिड़काव कराया जा सकता है। पहले छिड़काव की लागत 162 रुपये प्रति पेड़ तय की गई है, जिसमें सब्सिडी के बाद किसान को करीब 40 रुपये देने होंगे। वहीं, दूसरे छिड़काव की लागत 114 रुपये प्रति पेड़ है और इसमें किसान का हिस्सा करीब 28 रुपये रहेगा। इस तरह लीची उत्पादक किसानों को दोनों छिड़काव में सरकारी सहायता का सीधा फायदा मिल सकता है। इससे बाग की सुरक्षा के लिए होने वाला खर्च कम होगा।
आम के बागों को भी इस योजना में शामिल किया गया है। पहले छिड़काव के लिए 57 रुपये प्रति पेड़ और दूसरे छिड़काव के लिए 72 रुपये प्रति पेड़ की लागत निर्धारित की गई है। इन दोनों छिड़काव पर किसानों को 75% तक सब्सिडी दी जाएगी। आम की फसल में समय पर कीट नियंत्रण करना ज़रूरी होता है। अगर कीटों का असर बढ़ जाए तो फल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों पर असर पड़ सकता है। ऐसे में कम लागत पर छिड़काव की सुविधा किसानों के लिए उपयोगी हो सकती है।
अमरूद की खेती करने वाले किसानों को भी इस योजना का लाभ मिलेगा। इसके तहत पहले छिड़काव के लिए 37 रुपये प्रति पेड़ और दूसरे छिड़काव के लिए 45 रुपये प्रति पेड़ की राशि तय की गई है। इन पर भी सरकार की ओर से 75% तक सब्सिडी दी जाएगी। इस सहायता से किसान अपने बागों में कीटों से बचाव के लिए समय पर दवा का छिड़काव करा सकते हैं। इससे फल की गुणवत्ता बनाए रखने और उत्पादन को बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
![बाग में कीटों से फसल बचाना होगा सस्ता]()
इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि कीटनाशक छिड़काव का पूरा खर्च किसान को खुद नहीं उठाना पड़ेगा। सरकार की ओर से 75% तक सहायता मिलने से उनकी लागत कम होगी। समय पर कीट नियंत्रण होने से फलों को नुकसान से बचाने में मदद मिल सकती है। अच्छी गुणवत्ता वाले फल मिलने पर किसानों को बाज़ार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना भी रहती है। यानी योजना का फायदा सिर्फ़ लागत कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे उत्पादन और आमदनी को भी सहारा मिल सकता है।
इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके लिए बिहार के कृषि एवं बागवानी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर कीट प्रबंधन योजना से संबंधित विकल्प चुनना होगा। आवेदन के दौरान मांगी गई जानकारी भरने के साथ ज़रूरी दस्तावेज़ भी अपलोड करने होंगे। आवेदन जमा होने के बाद संबंधित स्तर पर इसकी जाँच की जाएगी। पात्र पाए जाने वाले किसानों को ही योजना का लाभ दिया जाएगा। अगर आप बिहार में आम, अमरूद या लीची की खेती करते हैं और बाग में कीटनाशक का छिड़काव कराना चाहते हैं, तो इस योजना के बारे में जानकारी लेकर आवेदन कर सकते हैं। किसान अपने जिले के कृषि या बागवानी विभाग के कार्यालय से भी योजना की पात्रता और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी ले सकते हैं। सरकार की इस पहल का मक़सद किसानों को कम खर्च में बागों की सुरक्षा के लिए जरूरी सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि कीट और बीमारियों से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
बागों में कीट और बीमारियों का असर होने पर फलों की गुणवत्ता के साथ उत्पादन भी प्रभावित होता है। कई किसान बढ़ते खर्च के कारण समय पर दवाओं का छिड़काव नहीं करा पाते। ऐसे में सरकारी सहायता से किसानों को कम खर्च में बागों की देखभाल करने में मदद मिल सकती है।
लीची के बाग में छिड़काव पर कितना खर्च?
आम के किसानों को भी मिलेगी सहायता
अमरूद के बागों में भी कीट प्रबंधन
बाग में कीटों से फसल बचाना होगा सस्ता