ये हैं किसानों के लिए सरकार के 5 बड़े फैसले, बिना गारंटी 2 लाख तक लोन, KCC पर सिर्फ 4% ब्याज

Gaon Connection | Mar 11, 2026, 12:06 IST
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सरकार ने किसानों तक सस्ता और आसान कर्ज पहुंचाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें गारंटी के बिना मिलने वाले कृषि ऋण की सीमा बढ़ाकर 2 लाख रुपये करना, किसान क्रेडिट कार्ड पर 7 फीसदी रियायती ब्याज देना और समय पर कर्ज चुकाने पर इसे घटाकर केवल 4 फीसदी कर देना शामिल है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने मंगलवार को राज्यसभा में यह जानकारी दी।
बिना गारंटी अब मिलेगा 2 लाख रुपये तक का कर्ज
बिना गारंटी अब मिलेगा 2 लाख रुपये तक का कर्ज
देश के करोड़ों किसानों, खासकर छोटे और सीमांत किसानों को खेती के लिए आसानी से कर्ज मिल सके, इसके लिए सरकार लगातार नई योजनाएं और नीतियाँ ला रही है। वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री Pankaj Chaudhary ने राज्यसभा में बताया कि किसानों तक समय पर और सस्ता कर्ज पहुँचाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं, ताकि उन्हें खेती और उससे जुड़े कामों के लिए पैसों की कमी न हो।

बिना गारंटी 2 लाख रुपये तक का कर्ज

कर्ज लेने के लिए किसी तरह की गारंटी देने की जरूरत नहीं
कर्ज लेने के लिए किसी तरह की गारंटी देने की जरूरत नहीं


किसानों को राहत देते हुए Reserve Bank of India ने 1 जनवरी 2025 से गारंटी के बिना मिलने वाले अल्पकालिक कृषि ऋण की सीमा बढ़ा दी है। पहले किसान बिना गारंटी के 1.60 लाख रुपये तक का कर्ज ले सकते थे, लेकिन अब यह सीमा बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी गई है।

इसमें खेती के साथ-साथ पशुपालन, डेयरी और अन्य कृषि से जुड़ी गतिविधियों के लिए मिलने वाला कर्ज भी शामिल है। इससे देश के करीब 86 प्रतिशत छोटे और सीमांत किसानों को फायदा होगा, क्योंकि अब उन्हें कर्ज लेने के लिए किसी तरह की गारंटी देने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

किसान क्रेडिट कार्ड पर सिर्फ 4 फीसदी ब्याज

Kisan Credit Card के जरिए किसानों को बीज, खाद, कीटनाशक खरीदने और खेती से जुड़ी दूसरी जरूरतों के लिए कम ब्याज पर कर्ज मिलता है। सरकार की ब्याज सबवेंशन योजना के तहत इस कर्ज पर 7 फीसदी ब्याज तय है। लेकिन जो किसान समय पर अपना कर्ज चुका देते हैं, उन्हें 3 फीसदी की अतिरिक्त छूट मिलती है। इससे उनकी असली ब्याज दर घटकर सिर्फ 4 फीसदी रह जाती है। साल 2019 से किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा को पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन जैसे कामों तक भी बढ़ा दिया गया है, ताकि किसानों की आमदनी के और भी रास्ते खुल सकें।

बैंकों को भी देना होता है कृषि ऋण

बैंकों को कृषि क्षेत्र में कर्ज देना जरूरी
बैंकों को कृषि क्षेत्र में कर्ज देना जरूरी
Reserve Bank of India के नियमों के मुताबिक बैंकों को भी कृषि क्षेत्र में कर्ज देना जरूरी होता है। प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) के तहत वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और लघु वित्त बैंक अपने कुल कर्ज का कम से कम 18 प्रतिशत हिस्सा कृषि क्षेत्र को देते हैं। इसमें से 10 प्रतिशत हिस्सा खास तौर पर छोटे और सीमांत किसानों के लिए तय किया गया है। जिन जिलों में किसानों को कम कर्ज मिलता है, वहां बैंकों को ज्यादा ऋण देने के लिए प्रोत्साहित भी किया जाता है।

पिछड़े जिलों के किसानों को भी मिलेगा कर्ज

केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित Pradhan Mantri Dhan Dhanya Krishi Yojana का मकसद उन जिलों तक भी कृषि ऋण पहुँचाना है, जहाँ अभी तक किसानों को संस्थागत कर्ज कम मिल पाता है। इस योजना के तहत किसानों को छोटे और लंबे समय के दोनों तरह के कृषि ऋण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

नाबार्ड भी निभा रहा अहम भूमिका

National Bank for Agriculture and Rural Development यानी नाबार्ड भी किसानों तक कर्ज पहुँचाने में अहम भूमिका निभाता है। यह हर जिले के लिए संभावित ऋण योजना तैयार करता है, जिसके आधार पर कृषि ऋण के लक्ष्य तय किए जाते हैं। नाबार्ड क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, सहकारी बैंकों और माइक्रोफाइनेंस संस्थानों को भी आर्थिक मदद देता है, ताकि फसल बुवाई और कटाई के समय किसानों को आसानी से कर्ज मिल सके। सरकार का कहना है कि इन कदमों से गांवों में खेती और कृषि से जुड़े कामों में निवेश बढ़ेगा और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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