किसानों के लिए जल्द आएगा मिट्टी की सेहत बताने वाला ऐप, मोबाइल पर मिलेगी खाद की सही सलाह
Gaon Connection | Jun 30, 2026, 19:16 IST
केंद्र सरकार किसानों के लिए जल्द एक मोबाइल ऐप लॉन्च करेगी, जिससे खेत में ही मिट्टी की सेहत और आवश्यक पोषक तत्वों की जानकारी मिल सकेगी। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती और मृदा संरक्षण पर ज़ोर दिया। उन्होंने एल नीनो की तैयारी और राज्यों में नियमित 'खेत बचाओ अभियान' चलाने की भी घोषणा की।
मिट्टी की जाँच होगी डिजिटल
किसानों को अब अपनी मिट्टी की सेहत जानने और फसल के लिए सही मात्रा में उर्वरक का इस्तेमाल करने के लिए अलग से रिपोर्ट या कागज़ी दस्तावेज़ों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। केंद्र सरकार ऐसी तकनीक पर काम कर रही है, जिसके तहत जल्द ही एक मोबाइल ऐप उपलब्ध कराया जाएगा। इस ऐप की मदद से किसान अपने खेत में खड़े होकर ही यह जान सकेंगे कि मिट्टी में कौन-कौन से पोषक तत्व मौजूद हैं और बेहतर उत्पादन के लिए कितनी मात्रा में खाद डालनी चाहिए। सरकार का मानना है कि इससे उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और मिट्टी की सेहत को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हरियाणा के रेवाड़ी ज़िले के बावल में 'खेत बचाओ अभियान' के समापन समारोह के दौरान यह जानकारी दी। एक जून से शुरू हुआ यह अभियान एक महीने तक चला। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल से बचने, मृदा स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल करके खेती को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है।
कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार एक ऐसे मोबाइल ऐप पर काम कर रही है, जिसे किसान अपने फोन में डाउनलोड कर सकेंगे। खेत में पहुँचते ही यह ऐप मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की जानकारी देगा और बताएगा कि किस फसल के लिए कितनी मात्रा में उर्वरक डालना उचित रहेगा। इससे किसानों को आवश्यकता के अनुसार खाद का इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी और अनावश्यक खर्च भी कम होगा।
उन्होंने किसानों से कहा कि उर्वरकों का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करने की बात नहीं है, बल्कि मिट्टी की ज़रूरत के अनुसार संतुलित मात्रा में खाद डालना ज़रूरी है। उन्होंने मृदा स्वास्थ्य कार्ड का लाभ उठाने की भी सलाह दी। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक देशभर में लगभग 26 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा चुके हैं। भविष्य में नई तकनीक विकसित होने के बाद किसानों को मिट्टी की जानकारी सीधे मोबाइल ऐप के माध्यम से उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यूरिया, डीएपी और अन्य रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की सेहत लगातार प्रभावित हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि खाद और कीटनाशकों का ज़्यादा इस्तेमाल फसलों के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकता है। यदि यही स्थिति बनी रही तो भविष्य में भूमि की उत्पादक क्षमता प्रभावित होने का ख़तरा बढ़ सकता है।
उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि यदि इसे सही तरीके से किया जाए तो उत्पादन में कोई कमी नहीं आती। कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार संभावित एल नीनो की स्थिति से निपटने के लिए भी तैयारी कर रही है। इसके तहत कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने और उपयुक्त बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की योजना बनाई जा रही है।
उन्होंने हरियाणा के किसानों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में 24 फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दिया जा रहा है और 'भावांतर भरपाई योजना' के माध्यम से बागवानी फसलों के किसानों को भी उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है। उन्होंने कहा कि हरियाणा देश के अन्न भंडार को भरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक समय था जब भारत को अमेरिका से लाल गेहूँ आयात करना पड़ता था, लेकिन आज हरियाणा जैसे राज्यों के किसानों की मेहनत से देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बना है। उन्होंने यह भी कहा कि चावल उत्पादन के मामले में भारत अब दुनिया में पहले स्थान पर पहुँच चुका है और इस उपलब्धि में हरियाणा के किसानों का महत्वपूर्ण योगदान है।
कार्यक्रम के अंत में कृषि मंत्री ने घोषणा की कि खाद के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए अब राज्यों में हर सप्ताह किसी न किसी दिन 'खेत बचाओ अभियान' चलाया जाएगा, ताकि किसानों को मृदा संरक्षण और संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति लगातार जागरूक किया जा सके।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हरियाणा के रेवाड़ी ज़िले के बावल में 'खेत बचाओ अभियान' के समापन समारोह के दौरान यह जानकारी दी। एक जून से शुरू हुआ यह अभियान एक महीने तक चला। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल से बचने, मृदा स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल करके खेती को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है।
मोबाइल ऐप बताएगा मिट्टी की स्थिति
उन्होंने किसानों से कहा कि उर्वरकों का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करने की बात नहीं है, बल्कि मिट्टी की ज़रूरत के अनुसार संतुलित मात्रा में खाद डालना ज़रूरी है। उन्होंने मृदा स्वास्थ्य कार्ड का लाभ उठाने की भी सलाह दी। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक देशभर में लगभग 26 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा चुके हैं। भविष्य में नई तकनीक विकसित होने के बाद किसानों को मिट्टी की जानकारी सीधे मोबाइल ऐप के माध्यम से उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।
रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अधिक इस्तेमाल पर चिंता
उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि यदि इसे सही तरीके से किया जाए तो उत्पादन में कोई कमी नहीं आती। कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार संभावित एल नीनो की स्थिति से निपटने के लिए भी तैयारी कर रही है। इसके तहत कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने और उपयुक्त बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की योजना बनाई जा रही है।
उन्होंने हरियाणा के किसानों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में 24 फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दिया जा रहा है और 'भावांतर भरपाई योजना' के माध्यम से बागवानी फसलों के किसानों को भी उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है। उन्होंने कहा कि हरियाणा देश के अन्न भंडार को भरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक समय था जब भारत को अमेरिका से लाल गेहूँ आयात करना पड़ता था, लेकिन आज हरियाणा जैसे राज्यों के किसानों की मेहनत से देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बना है। उन्होंने यह भी कहा कि चावल उत्पादन के मामले में भारत अब दुनिया में पहले स्थान पर पहुँच चुका है और इस उपलब्धि में हरियाणा के किसानों का महत्वपूर्ण योगदान है।
कार्यक्रम के अंत में कृषि मंत्री ने घोषणा की कि खाद के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए अब राज्यों में हर सप्ताह किसी न किसी दिन 'खेत बचाओ अभियान' चलाया जाएगा, ताकि किसानों को मृदा संरक्षण और संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति लगातार जागरूक किया जा सके।