Artificial Insemination in Goats: उत्तर प्रदेश में पशुपालन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए योगी सरकार नेद गोट ट्रस्टके साथ एक अहम समझौता किया है। इस पहल के तहत पहली बार बकरियों मेंकृत्रिम गर्भाधान और आधुनिक प्रजनन तकनीकोंको बढ़ावा दिया जाएगा। इसका उद्देश्य छोटे और सीमांत बकरी पालकों को बेहतर नस्ल, ज्यादा उत्पादन और बढ़ी हुई आय का लाभ पहुंचाना है।
इसके लिए सरकार, एनजीओ और निजी क्षेत्र मिलकर काम करेंगे। इसके अलावा दोनों संस्थाएं प्रशिक्षण सामग्री, संसाधन और तकनीकी जानकारी साझा करेंगी, ताकि गाँव स्तर तक बकरी पालकों को इसका लाभ मिल सके।
किसानों तक पहुंचेगी आधुनिक तकनीक
बकरी पालन करने वाले किसानों को अक्सर एक बड़ी समस्या का सामना करना पड़ता है। अच्छी नस्ल की बकरियां नहीं मिल पाना, सही समय पर प्रजनन न होना और कमजोर नस्ल के बच्चों के कारण कई बार किसानों को उम्मीद के मुताबिक मुनाफा नहीं मिल पाता। पारंपरिक तरीके से बकरी पालन में यह भी चुनौती रहती है कि कौन सी बकरी कब प्रजनन के लिए तैयार है और किस नस्ल से बेहतर उत्पादन मिलेगा, इसकी सही जानकारी हर किसान तक नहीं पहुंच पाती।
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समझौते के तहत पशुपालन विभाग और द गोट ट्रस्ट मिलकर बकरी पालकों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने का काम करेंगे। इसमें बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा देना, हीट सिंक्रोनाइजेशन तकनीक का इस्तेमाल, प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करना और पशुपालकों को जरूरी जानकारी उपलब्ध कराना शामिल है। इसके अलावा दोनों संस्थाएं प्रशिक्षण सामग्री, संसाधन और तकनीकी जानकारी साझा करेंगी, ताकि गांव स्तर तक बकरी पालकों को इसका लाभ मिल सके।
मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया महत्वपूर्ण कदम
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि इस तरह के समझौते साझेदारी में काम करने का मजबूत आधार तैयार करते हैं। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक मौजूद किसानों और पशुपालकों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। समझौते के दौरान पशुधन एवं दुग्ध विकास राज्य मंत्री कृष्णा पासवान, अपर मुख्य सचिव पशुपालन एवं दुग्ध विकास मुकेश कुमार मेश्राम, पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. मेमपाल सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
18 राज्यों में काम कर रहा है द गोट ट्रस्ट
द गोट ट्रस्ट देश के 18 राज्यों में बकरी आधारित आजीविका को बढ़ावा देने के लिए तकनीकी और प्रक्रियात्मक नवाचारों पर काम कर रहा है। संस्था का उद्देश्य बकरी पालकों को संगठित करना और उन्हें व्यवसायिक तरीके से बकरी पालन के लिए तैयार करना है।
द गोट ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि यह समझौता लघु पशु आधारित आजीविका को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि बकरी पालकों के मजबूत संगठन तैयार कर उत्तर प्रदेश को बकरी पालन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।
सम्मेलन में दिखे बकरी पालन से जुड़े नए उत्पाद
लघु पशु सम्मेलन में द गोट ट्रस्ट की ओर से एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसमें बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान का लाइव प्रदर्शन किया गया। इसके अलावा बकरी के दूध से बने उत्पाद, बकरी का गोबर, बकरी मूत्र और बकरी दूध से तैयार साबुन जैसे मूल्यवर्धित उत्पाद भी प्रदर्शित किए गए। प्रदर्शनी में किसानों ने इन नए व्यवसायिक विकल्पों की सराहना की और कहा कि इससे बकरी पालन को ज्यादा लाभकारी व्यवसाय बनाने में मदद मिलेगी।
बकरी पालन को बनाया जा सकेगा ज्यादा फायदे का कारोबार
बकरी पालन कम लागत में शुरू होने वाला व्यवसाय है, इसलिए बड़ी संख्या में छोटे किसान और ग्रामीण परिवार इससे जुड़े हुए हैं। अगर किसानों को सही नस्ल, प्रशिक्षण और बाजार की सुविधा मिल जाए तो यह उनकी आय का मजबूत साधन बन सकता है।
नई पहल के तहत किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा, ताकि गाँव स्तर तक बकरी पालन की आधुनिक तकनीक पहुंच सके।