मक्का किसानों के लिए बड़ी राहत, 15 जून से शुरू होगी सरकारी खरीद, जानिए आख़िरी तारीख

Preeti Nahar | Jun 04, 2026, 13:47 IST
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उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार 15 जून से मक्का की सरकारी खरीद करेगी। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए एक बाजार मिलेगा।साथ ही सरकार ने 25 जिलों में 150 क्रय केंद्र स्थापित किए हैं जिससे एथेनॉल उद्योग से मक्का की मांग बढ़ने की उम्मीद है।

T credits ₹1,170cr to maize farmers
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उत्तर प्रदेश में मक्का की खेती करने वाले किसानों के लिए राहत भरी ख़बर है। राज्य सरकार ने मक्का खरीद अभियान को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत 15 जून से 31 जुलाई तक किसानों से मक्का की सरकारी खरीद की जाएगी। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के लाखों मक्का उत्पादक किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए एक सुनिश्चित बाजार मिलेगा और उन्हें बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद बढ़ेगी।

क्यों बढ़ रहा है मक्का की खेती का रकबा?

पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में मक्का की खेती का रकबा लगातार बढ़ा है। बदलते मौसम, कम पानी की उपलब्धता और बढ़ती उत्पादन लागत के बीच किसान ऐसी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिनमें कम खर्च और बेहतर मुनाफे की संभावना हो। मक्का इसी श्रेणी की फसल मानी जाती है। इसके अलावा पशु आहार, स्टार्च उद्योग, पोल्ट्री सेक्टर और एथेनॉल उत्पादन में बढ़ती मांग ने भी मक्का की उपयोगिता को बढ़ाया है।

सरकारी खरीद से किसानों को क्या फायदा होगा?

राज्य सरकार द्वारा 15 जून से 31 जुलाई तक चलाए जाने वाले खरीद अभियान का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना है। सरकारी खरीद होने से किसानों की बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और बाजार में कीमतों में गिरावट की स्थिति में भी उन्हें सुरक्षा मिलेगी। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मक्का की खेती को और बढ़ावा मिलेगा।

इन जिलों के किसानों को मिलेगा सबसे अधिक लाभ

उत्तर प्रदेश के कई जिले मक्का उत्पादन के प्रमुख केंद्र हैं। औरैया, कन्नौज, इटावा, फर्रुखाबाद, हरदोई, उन्नाव, बहराइच, गोंडा, बलिया और मिर्जापुर समेत कुल 25 जनपदों में 150 क्रय केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे जिलों के किसानों को इस खरीद अभियान का सीधा लाभ मिलने की संभावना है। सरकार ने किसानों से समय पर पंजीकरण और खरीद संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है, ताकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

एथेनॉल उद्योग से बढ़ सकती है मांग

केंद्र सरकार की एथेनॉल मिश्रण नीति के चलते आने वाले वर्षों में मक्का की मांग और बढ़ सकती है। मक्का अब केवल खाद्यान्न फसल नहीं रह गई है, बल्कि इसका उपयोग एथेनॉल उत्पादन, पशु आहार, पोल्ट्री फीड और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में भी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में किसानों के लिए यह एक लाभकारी विकल्प बनकर उभर रहा है।

किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम

15 जून से शुरू होने वाला यह खरीद अभियान किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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