PSS Procurement: मूंग और उड़द बेचने वाले किसानों के लिए नया नियम, बायोमेट्रिक फेल होने पर क्या करें? जानिए पूरी प्रक्रिया
Mansi | Aug 04, 2026, 18:38 IST
मध्य प्रदेश के किसानों के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। अब बायोमेट्रिक सत्यापन में दिक्कतें झेलने वाले किसान अपने नामित प्रतिनिधियों के जरिए ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द की सरकारी खरीद कर सकेंगे। सभी भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में किए जाएंगे। भविष्य में, फेस और आइरिस सत्यापन जैसी अन्य वैकल्पिक प्रणालियों पर भी गौर किया जाएगा।
बायोमेट्रिक सत्यापन में दिक्कत आने पर अब मध्य प्रदेश के पात्र किसान नामित प्रतिनिधि के माध्यम से एमएसपी पर मूंग और उड़द की बिक्री कर सकेंगे
मध्य प्रदेश के किसानों के लिए केंद्र सरकार ने समर्थन मूल्य (PSS Procurement) पर ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द की खरीद को लेकर बड़ी राहत दी है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने एक बार के विशेष प्रावधान (One-time Exception) के तहत ऐसे किसानों को नामित प्रतिनिधि (Nominee) के माध्यम से उपज बेचने की अनुमति दी है, जिनका आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन (फिंगरप्रिंट) बार-बार विफल हो रहा है। यह व्यवस्था केवल ग्रीष्मकालीन सीजन 2026 में मध्य प्रदेश में मूंग और उड़द की सरकारी खरीद के लिए लागू होगी।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने कहा कि यह निर्णय राज्य सरकार के अनुरोध और किसानों को आ रही तकनीकी समस्याओं को देखते हुए लिया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल बायोमेट्रिक सत्यापन में दिक्कत आने की वजह से कोई भी पात्र किसान अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बेचने से वंचित न रहे। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से खरीद केंद्रों पर किसानों को होने वाली अनावश्यक परेशानियाँ कम होंगी और सरकारी खरीद प्रक्रिया अधिक सुचारु तरीके से पूरी की जा सकेगी।
यह सुविधा केवल उन पंजीकृत किसानों को मिलेगी जिनका आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन खरीद केंद्र पर बार-बार असफल हो रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह सामान्य व्यवस्था नहीं, बल्कि एक बार के विशेष अपवाद के रूप में लागू की जा रही है। यह प्रावधान केवल वास्तविक और सत्यापित मामलों में लागू होगा, ताकि इसका दुरुपयोग न हो और पात्र किसानों को ही इसका लाभ मिल सके।
नई व्यवस्था के तहत किसान अपनी ओर से एक नामित प्रतिनिधि (Nominee) नियुक्त कर सकेंगे। हालांकि, इसके लिए पहले किसान की पहचान का सत्यापन किया जाएगा। खरीद केंद्र पर किसान की वास्तविक समय (रियल-टाइम) फोटो ली जाएगी और उसका आधार विवरण से मिलान किया जाएगा। इसके बाद ही ऑनलाइन Purchase Centre Level Nominee Application Form के माध्यम से प्रतिनिधि को नामित करने की अनुमति मिलेगी। सत्यापन की पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रतिनिधि किसान की ओर से उपज बेच सकेगा।
सरकार ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने के लिए प्रतिनिधि के लिए भी कई शर्तें तय की हैं। प्रतिनिधि का OTP के माध्यम से ई-केवाईसी (e-KYC) कराया जाएगा और उसका बायोमेट्रिक सत्यापन भी अनिवार्य होगा। खरीद केंद्र पर प्रतिनिधि की रियल-टाइम फोटो लेकर आधार रिकॉर्ड से उसका मिलान किया जाएगा। इसके अलावा, एक प्रतिनिधि केवल एक ही किसान के लिए नामित किया जा सकेगा। यदि कोई व्यक्ति पहले से किसी अन्य किसान का प्रतिनिधि बना हुआ है, तो उसे दोबारा नामित नहीं किया जा सकेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य खरीद प्राक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना और किसी भी प्रकार की फर्जी खरीद पर रोक लगाना है।
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि खरीदी गई उपज का भुगतान किसी भी स्थिति में प्रतिनिधि के बैंक खाते में नहीं जाएगा। पूरी राशि सीधे पंजीकृत किसान के बैंक खाते में ही भेजी जाएगी। इससे भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी और किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना कम होगी। इससे किसानों को यह भरोसा रहेगा कि उनकी उपज का भुगतान सीधे उनके खाते में सुरक्षित तरीके से पहुँचेगा।
आदेश के अनुसार राज्य सरकार और केंद्रीय नोडल एजेंसियों को पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना होगा। इसमें किसान और प्रतिनिधि के सत्यापन, ऑनलाइन आवेदन, प्रमाणीकरण लॉग और रियल-टाइम फोटो शामिल होंगे। यह व्यवस्था केवल वास्तविक और आवश्यक मामलों में ही लागू की जाएगी। जरूरत पड़ने पर इन रिकॉर्ड के अधार पर पूरी प्रक्रिया का सत्यापन भी किया जा सकेगा।
कृषि मंत्रालय ने राज्य सरकार को सुझाव दिया है कि भविष्य में आधार आधारित फिंगरप्रिंट प्रमाणीकरण की समस्या से निपटने के लिए चेहरा प्रमाणीकरण (Face Authentication) और आइरिस प्रमाणीकरण (IRIS Authentication) जैसी वैकल्पिक प्रणालियों को भी विकसित और लागू किया जाए, ताकि किसानों को खरीद केंद्रों पर कम परेशानी हो। यह निर्णय विशेष रूप से उन किसानों के लिए राहत लेकर आया है, जो तकनीकी कारणों से अपनी उपज समर्थन मूल्य पर बेचने से वंचित रह जाते थे। नई व्यवस्था से पात्र किसानों को सरकारी खरीद प्रक्रिया में शामिल होने और समय पर भुगतान प्राप्त करने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने कहा कि यह निर्णय राज्य सरकार के अनुरोध और किसानों को आ रही तकनीकी समस्याओं को देखते हुए लिया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल बायोमेट्रिक सत्यापन में दिक्कत आने की वजह से कोई भी पात्र किसान अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बेचने से वंचित न रहे। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से खरीद केंद्रों पर किसानों को होने वाली अनावश्यक परेशानियाँ कम होंगी और सरकारी खरीद प्रक्रिया अधिक सुचारु तरीके से पूरी की जा सकेगी।