एथेनॉल पर सरकार का बड़ा फ़ैसला: क्या गन्ना और मक्का किसानों के लिए खुलेंगे कमाई के नए रास्ते?

Lata Mishra | Jun 11, 2026, 13:22 IST
Share

11 जून 2026 से सरकार ने E22, E25, E27 और E30 जैसे ज़्यादा एथेनॉल वाले पेट्रोल पर एक्साइज़ ड्यूटी खत्म कर दी है। इसका मकसद पेट्रोल सस्ता करना नहीं, बल्कि एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देना है। इससे गन्ना और मक्का किसानों को फायदा होगा, पर पानी, खाद्य सुरक्षा और फसल संतुलन जैसी दिक्कतें भी आ सकती हैं।

<strong>किसानों को उम्मीद है कि इससे गन्ना भुगतान में होने वाली</strong><strong> देरी कम हो सकती है।</strong>
किसानों को उम्मीद है कि इससे गन्ना भुगतान में होने वाली देरी कम हो सकती है।
11 जून 2026 को केंद्र सरकार ने E22, E25, E27 और E30 जैसे अधिक एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल पर एक्साइज़ ड्यूटी शून्य (Nil) कर दी। पहली नज़र में यह फ़ैसला पेट्रोल और ईंधन क्षेत्र से जुड़ा लगता है, लेकिन इसका असर खेतों तक भी पहुँच सकता है। ख़ासकर गन्ना और मक्का उगाने वाले किसानों के लिए यह नीति नए अवसर लेकर आ सकती है।

सरकार का मक़सद पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाना है। एथेनॉल एक जैव ईंधन है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने के रस, शीरे (मोलासेस) और मक्का जैसी फ़सलों से तैयार किया जाता है। ऐसे में जब एथेनॉल की माँग बढ़ेगी, तो इसके लिए ज़रूरी कृषि उत्पादों की माँग भी बढ़ने की संभावना है।

गन्ना किसानों को कैसे हो सकता है फ़ायदा?

देश में एथेनॉल उत्पादन का बड़ा हिस्सा गन्ने और उससे जुड़े उत्पादों से आता है। यदि एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति आगे बढ़ती है, तो चीनी मिलों और डिस्टिलरियों को अधिक कच्चे माल की ज़रूरत होगी। इसका असर गन्ना किसानों पर कई तरह से पड़ सकता है। सबसे पहले, गन्ने की माँग बढ़ सकती है। दूसरा, चीनी मिलों को चीनी के अलावा एथेनॉल से भी आय होने लगेगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मज़बूत हो सकती है। किसानों को उम्मीद है कि इससे गन्ना भुगतान में होने वाली देरी कम हो सकती है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और बिहार जैसे राज्यों के लाखों गन्ना किसानों के लिए यह एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है।

POLL: क्या आप एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के उपयोग का समर्थन करते हैं?

Loading poll options...

मक्का किसानों के लिए भी बन रहे हैं अवसर?

पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार मक्का आधारित एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने पर ज़ोर दे रही है। इसका उद्देश्य एथेनॉल उत्पादन के लिए केवल गन्ने पर निर्भरता कम करना है। ऐसे में यदि एथेनॉल उद्योग का विस्तार होता है, तो मक्का उत्पादक किसानों के लिए भी नए बाज़ार बन सकते हैं। मक्का की ख़रीद बढ़ने से किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ सकती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इससे किसानों को फ़सल विविधीकरण का भी लाभ मिल सकता है।

सिर्फ़ फ़सल नहीं, गाँव की अर्थव्यवस्था पर भी असर

एथेनॉल उद्योग के विस्तार का फ़ायदा केवल किसानों तक सीमित नहीं रह सकता। डिस्टिलरी, परिवहन, भंडारण और प्रसंस्करण से जुड़े क्षेत्रों में भी रोज़गार के अवसर बढ़ सकते हैं। ग्रामीण इलाक़ों में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मज़बूती मिल सकती है। लेकिन चुनौतियाँ भी हैं, विशेषज्ञों का कहना है कि एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के साथ कुछ
सावधानियाँ ज़रूरी हैं। गन्ना ऐसी फ़सल है, जिसे अपेक्षाकृत अधिक पानी की ज़रूरत होती है।

ऐसे में जल संकट वाले क्षेत्रों में गन्ने का अत्यधिक विस्तार पर्यावरणीय और जल संसाधन संबंधी चुनौतियाँ पैदा कर सकता है। इसके अलावा खाद्य फ़सलों और ईंधन उत्पादन के बीच संतुलन बनाए रखना भी ज़रूरी होगा। नीति-निर्माताओं के सामने यह चुनौती रहेगी कि किसानों को लाभ मिले, लेकिन खाद्य सुरक्षा प्रभावित न हो।

किसानों के लिए क्या मायने रखता है यह फ़ैसला?

11 जून को जारी अधिसूचना का सीधा उद्देश्य पेट्रोल को सस्ता करना नहीं, बल्कि अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन को बढ़ावा देना है। लेकिन यदि एथेनॉल की माँग लगातार बढ़ती है, तो इसका फ़ायदा गन्ना और मक्का किसानों तक पहुँच सकता है।

हालाँकि यह लाभ किस हद तक किसानों तक पहुँचेगा, यह आने वाले वर्षों में एथेनॉल उद्योग के विस्तार, ख़रीद व्यवस्था, फ़सल मूल्य और सरकारी नीतियों पर निर्भर करेगा। फिर भी इतना तय है कि एथेनॉल अब सिर्फ़ ईंधन का विषय नहीं रहा, बल्कि किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जुड़ता जा रहा है।
Tags:
  • Ethanol Blending India
  • Ethanol Petrol
  • Sugarcane Demand
  • Maize Demand
  • Ethanol Industry India
  • Agriculture Rural Economy India
  • Renewable Energy India
  • Energy Security India
  • Biofuel India
  • Farmers Income