चीनी हुई महँगी तो सरकार ने खोला डयूटी फ्री आयात का रास्ता, अब विदेश से आएगी 10 लाख टन कच्ची चीनी
Umang | Aug 21, 2026, 13:00 IST
चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी बिना आयात शुल्क के मंगाने की मंज़ूरी दी है। यह आयात 31 अक्टूबर 2026 तक किया जा सकेगा। दिल्ली में चीनी का भाव रिकॉर्ड 55.70 रुपये किलो पहुंचने के बाद यह फैसला लिया गया है। सरकार ने बड़े खरीदारों के लिए 15 दिन से ज्यादा का स्टॉक रखने पर भी रोक लगाई है। साथ ही चीनी मिलों को अक्टूबर से उत्पादन और बिक्री शुरू करने की अनुमति दी गई है।
चीनी के दाम ने बनाया रिकॉर्ड
देश में चीनी की कीमतें लगातार बढ़ने के बीच सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी बिना आयात शुल्क के मंगाने की मंज़ूरी दी है। दिल्ली में चीनी का खुदरा भाव रिकॉर्ड 55.70 रुपये प्रति किलो तक पहुँच गया है। दुनिया के बाज़ार में भी चीनी की कीमत 18 महीने के सबसे ऊँचे स्तर पर है। ऐसे में सरकार के इस फैसले से देश में चीनी की सप्लाई बढ़ाने और कीमतों को काबू में रखने की कोशिश की गई है। यह आयात 31 अक्टूबर 2026 तक किया जा सकेगा।
वाणिज्य मंत्रालय के तहत विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 20 अगस्त को जारी सरकारी आदेश में कच्ची चीनी के आयात के लिए 10 लाख मीट्रिक टन की सीमा तय की है। इसके अलावा, जिन कंपनियों ने पहले से सरकार की अनुमति के तहत कच्ची चीनी मंगाई है, उन्हें एक बार उस आयात को इस नई व्यवस्था में शामिल करने का मौका दिया गया है। आयातित कच्ची चीनी से बनी रिफाइंड चीनी को 31 अक्टूबर 2026 तक सिर्फ देश के घरेलू बाज़ार में बेचना होगा। इसके लिए कंपनियों को पहले मिली GST छूट की रकम भी सरकार को वापस देनी होगी।
सरकार का फैसला ऐसे समय आया है जब घरेलू बाज़ार में चीनी के दाम काफी बढ़ गए हैं। दिल्ली में खुदरा चीनी की कीमत 55.70 रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अक्टूबर डिलीवरी वाली कच्ची चीनी का भाव न्यूयॉर्क में 18.01 अमेरिकी सेंट प्रति पाउंड रहा। यह करीब 390 डॉलर यानी 37,350 रुपये प्रति टन है। लंदन में सफेद चीनी का भाव करीब 558 डॉलर यानी 53,400 रुपये प्रति टन चल रहा है। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कीमतों के हिसाब से भारत पहुँचने के बाद सफेद चीनी की लागत करीब 58 रुपये प्रति किलो पड़ सकती है। व्यापार से जुड़े लोगों के मुताबिक करीब 3 लाख टन चीनी भारत के लिए रवाना हो चुकी है और अगले कुछ दिनों में करीब 1 लाख टन और भेजी जा सकती है।
सरकार ने पहले से मंज़ूरी लेकर मंगाई गई कच्ची चीनी के लिए भी एक बार की सुविधा दी है। DGFT के आदेश के मुताबिक, SION E-52 के तहत पहले जारी अनुमति के आधार पर वास्तव में मंगाई जा चुकी कच्ची चीनी को नई TRQ व्यवस्था में बदला जा सकता है। इससे उस कच्ची चीनी से पहले बन चुकी या आगे बनने वाली रिफाइंड चीनी भी शामिल होगी। हालांकि, कंपनियों को आयात के समय मिली GST छूट की रकम वापस देनी होगी। इसके बाद तैयार रिफाइंड चीनी को 31 अक्टूबर 2026 तक सिर्फ भारत के घरेलू बाज़ार में बेचना होगा। इस पूरी व्यवस्था को लागू करने के तरीके के बारे में DGFT अलग से जानकारी जारी करेगा।
सरकार ने बड़े खरीदारों के पास चीनी का ज्यादा स्टॉक जमा होने से रोकने के लिए भी कदम उठाया है। 1 सितंबर से हर महीने 10 टन से ज्यादा चीनी खरीदने वाले बड़े खरीदार 15 दिन से अधिक का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। यह नियम 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगा।
इसमें बिस्किट और मिठाई बनाने वाली कंपनियों, सॉफ्ट ड्रिंक कंपनियों, खाद्य सामान बनाने वाली इकाइयों और दूसरे बड़े खरीदारों को शामिल किया गया है। किसी कंपनी या संस्थान की सीमा पिछले एक साल में उसकी औसत मासिक खपत के आधार पर तय होगी। सीधे या डीलर के जरिए चीनी खरीदने वालों पर भी नजर रखी जाएगी।
चीनी की घरेलू सप्लाई बढ़ाने के लिए सरकार ने चीनी मिलों को 2026-27 सीज़न में अक्टूबर से गन्ने की पेराई शुरू करने और अक्टूबर-नवंबर में तैयार चीनी बेचने की अनुमति भी दी है। सरकार ने 14 अगस्त के आदेश में कहा था कि अक्टूबर 2026 में उत्पादन शुरू करने वाली मिलें अक्टूबर में तैयार चीनी को अक्टूबर और नवंबर में बेच सकेंगी। इससे नई फसल की चीनी जल्दी बाज़ार में आने की उम्मीद है।
मौजूदा सीज़न के अंत यानी सितंबर तक चीनी का बचा हुआ स्टॉक करीब 35 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि पिछले सीज़न में यह 49 लाख टन था। इस साल चीनी का उत्पादन करीब 280 लाख टन और खपत करीब 290 लाख टन रहने का अनुमान है। 2026-27 सीज़न में गन्ने का रकबा 58.31 लाख हेक्टेयर रहा है, जो पिछले साल के 58.62 लाख हेक्टेयर से थोड़ा कम है। हालांकि, अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) जैसी एजेंसियों का अनुमान है कि अगले सीज़न में भारत का चीनी उत्पादन इथेनॉल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी को मिलाकर करीब 330 लाख टन हो सकता है।
वाणिज्य मंत्रालय के तहत विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 20 अगस्त को जारी सरकारी आदेश में कच्ची चीनी के आयात के लिए 10 लाख मीट्रिक टन की सीमा तय की है। इसके अलावा, जिन कंपनियों ने पहले से सरकार की अनुमति के तहत कच्ची चीनी मंगाई है, उन्हें एक बार उस आयात को इस नई व्यवस्था में शामिल करने का मौका दिया गया है। आयातित कच्ची चीनी से बनी रिफाइंड चीनी को 31 अक्टूबर 2026 तक सिर्फ देश के घरेलू बाज़ार में बेचना होगा। इसके लिए कंपनियों को पहले मिली GST छूट की रकम भी सरकार को वापस देनी होगी।
दिल्ली में 55.70 रुपये किलो पहुंची चीनी
पहले मंगाई गई चीनी को भी नई व्यवस्था में लाने का मौका
बड़े खरीदार 15 दिन से ज्यादा का चीनी स्टॉक नहीं रख सकेंगे
इसमें बिस्किट और मिठाई बनाने वाली कंपनियों, सॉफ्ट ड्रिंक कंपनियों, खाद्य सामान बनाने वाली इकाइयों और दूसरे बड़े खरीदारों को शामिल किया गया है। किसी कंपनी या संस्थान की सीमा पिछले एक साल में उसकी औसत मासिक खपत के आधार पर तय होगी। सीधे या डीलर के जरिए चीनी खरीदने वालों पर भी नजर रखी जाएगी।
अक्टूबर से चीनी मिलों को बिक्री की अनुमति, गन्ने का रकबा थोड़ा घटा
मौजूदा सीज़न के अंत यानी सितंबर तक चीनी का बचा हुआ स्टॉक करीब 35 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि पिछले सीज़न में यह 49 लाख टन था। इस साल चीनी का उत्पादन करीब 280 लाख टन और खपत करीब 290 लाख टन रहने का अनुमान है। 2026-27 सीज़न में गन्ने का रकबा 58.31 लाख हेक्टेयर रहा है, जो पिछले साल के 58.62 लाख हेक्टेयर से थोड़ा कम है। हालांकि, अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) जैसी एजेंसियों का अनुमान है कि अगले सीज़न में भारत का चीनी उत्पादन इथेनॉल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी को मिलाकर करीब 330 लाख टन हो सकता है।