Lucknow Agriculture Conference: नकली बीज-कीटनाशक पर सख्ती, नया कानून ला सकती है सरकार, कृषि मंत्री ने बताईं खेती सुधार की योजनाएं
Gaon Connection | Apr 24, 2026, 15:15 IST
लखनऊ सम्मेलन में शिवराज सिंह चौहान का संदेश साफ रहा कि आने वाला समय वैज्ञानिक, टिकाऊ, जलवायु-अनुकूल और किसान-केंद्रित खेती का है। यदि राज्य और केंद्र मिलकर काम करें तो भारतीय कृषि को नई ऊंचाई दी जा सकती है। पढ़िए खेती से जुड़े किन प्रोजक्ट्स की हुई चर्चा।
लखनऊ में शिवराज बोले- खेती अब पुराने ढर्रे पर नहीं चलेगी
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित उत्तर क्षेत्र कृषि सम्मेलन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों, वैज्ञानिकों और राज्यों के प्रतिनिधियों के सामने खेती के भविष्य को लेकर बड़ा विजन रखा। उन्होंने कहा कि अब देश की कृषि नीति केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि किसान की आय, लागत में कमी, तकनीक का विस्तार, गुणवत्ता वाले इनपुट और जलवायु आधारित खेती पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि कृषि विकास का अगला चरण तभी सफल होगा, जब शोध प्रयोगशाला से निकलकर सीधे खेत तक पहुंचेगा और छोटे किसान तक योजनाओं का लाभ प्रभावी तरीके से पहुंचेगा।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पहले खरीफ और रबी सीजन को लेकर पूरे देश के लिए एक ही बैठक होती थी, लेकिन भारत जैसे विशाल और विविधता वाले देश में एक मंच पर सभी क्षेत्रों की समस्याओं पर गहराई से चर्चा संभव नहीं थी। इसी कारण अब जोनल कॉन्फ्रेंस मॉडल शुरू किया गया है, ताकि हर क्षेत्र की मिट्टी, जलवायु, पानी, फसल प्रणाली और स्थानीय चुनौतियों के अनुसार रणनीति बनाई जा सके। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत कृषि दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जहां पंजाब और हरियाणा हरित क्रांति के केंद्र रहे हैं, जबकि उत्तर प्रदेश खाद्यान्न उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश के सामने तीन बड़े लक्ष्य स्पष्ट हैं:
- खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना
- किसानों की आय बढ़ाना
- देशवासियों को पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराना
इन लक्ष्यों को पाने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना काफी नहीं है। इसके लिए खेती की लागत कम करनी होगी, किसानों को सही दाम दिलाना होगा और नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करनी होगी।
शिवराज सिंह चौहान ने रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते उपयोग पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह समझना जरूरी है कि बढ़ती खपत वास्तव में जरूरत पर आधारित है या केवल पुरानी आदतों के कारण हो रही है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में:
- संतुलित खाद उपयोग
- मिट्टी स्वास्थ्य संरक्षण
- प्राकृतिक खेती
- जैविक विकल्प को बढ़ावा देना बेहद जरूरी होगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अच्छी खेती की शुरुआत अच्छे बीज से होती है। यदि बीज गुणवत्ता वाला होगा और मौसम के अनुरूप होगा, तभी उत्पादन बेहतर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि बदलते मौसम, कम बारिश और तापमान में उतार-चढ़ाव को देखते हुए राज्यों को ऐसी किस्में अपनानी होंगी जो जलवायु परिवर्तन का सामना कर सकें।
शिवराज सिंह चौहान ने नकली खाद, नकली कीटनाशक और घटिया बीज की समस्या को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि इससे किसान की मेहनत, पैसा और भरोसा तीनों बर्बाद होते हैं।
उन्होंने कहा कि किसानों को बचाने के लिए:
- कठोर कानून
- सख्त कार्रवाई
- राज्यों में विशेष अभियान
- गुणवत्ता नियंत्रण की दिशा में काम किया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने राज्यों से अपील की कि वे अपनी कृषि परिस्थितियों के अनुसार अलग रोडमैप तैयार करें। उन्होंने कहा कि जब तक हर राज्य अपनी मिट्टी, पानी, फसल और बाजार के हिसाब से दीर्घकालिक योजना नहीं बनाएगा, तब तक कृषि का समग्र विकास संभव नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार वैज्ञानिकों, कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से राज्यों को पूरा सहयोग देगी।
शिवराज सिंह चौहान ने किसान आईडी और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसान की पहचान, ऋण सुविधा, सरकारी योजनाओं और सब्सिडी को सरल बनाने में ये दोनों बेहद उपयोगी साधन हैं। छोटे और सीमांत किसानों को सस्ता संस्थागत ऋण देने के लिए KCC का विस्तार जरूरी बताया गया।
वैज्ञानिक गाँव-गाँव पहुंचेंगे।
विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत वैज्ञानिक गांवों में जाकर किसानों से सीधा संवाद करेंगे। किसान अपनी जमीन, मौसम और फसल के हिसाब से सलाह ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि शोध तभी सफल माना जाएगा, जब उसका लाभ खेत तक पहुंचे।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि छोटी जोत वाले किसान केवल गेहूं-धान पर निर्भर रहकर स्थिर आय नहीं पा सकते। इसलिए उन्हें बहु-आय मॉडल अपनाना होगा।
उन्होंने किसानों को इन क्षेत्रों से जुड़ने की सलाह दी:
- फल उत्पादन
- सब्जी खेती
- पशुपालन
- मत्स्य पालन
- बकरी पालन
- मुर्गी पालन
- मधुमक्खी पालन
- वृक्ष आधारित खेती
उन्होंने कहा कि इससे किसानों की आय के कई स्रोत बनेंगे।
लखनऊ सम्मेलन में शिवराज सिंह चौहान का संदेश साफ रहा कि आने वाला समय वैज्ञानिक, टिकाऊ, जलवायु-अनुकूल और किसान-केंद्रित खेती का है। यदि राज्य और केंद्र मिलकर काम करें तो भारतीय कृषि को नई ऊंचाई दी जा सकती है।
पूरे देश की एक बैठक नहीं, अब क्षेत्रवार रणनीति बनेगी
खाद्य सुरक्षा, किसान आय और पोषण पर फोकस
- खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना
- किसानों की आय बढ़ाना
- देशवासियों को पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराना
इन लक्ष्यों को पाने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना काफी नहीं है। इसके लिए खेती की लागत कम करनी होगी, किसानों को सही दाम दिलाना होगा और नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करनी होगी।
बढ़ते उर्वरक उपयोग पर जताई चिंता
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में:
- संतुलित खाद उपयोग
- मिट्टी स्वास्थ्य संरक्षण
- प्राकृतिक खेती
- जैविक विकल्प को बढ़ावा देना बेहद जरूरी होगा।
अच्छे बीज खेती की बुनियाद
उन्होंने कहा कि बदलते मौसम, कम बारिश और तापमान में उतार-चढ़ाव को देखते हुए राज्यों को ऐसी किस्में अपनानी होंगी जो जलवायु परिवर्तन का सामना कर सकें।
नकली खाद-बीज पर सख्त कार्रवाई के संकेत
उन्होंने कहा कि किसानों को बचाने के लिए:
- कठोर कानून
- सख्त कार्रवाई
- राज्यों में विशेष अभियान
- गुणवत्ता नियंत्रण की दिशा में काम किया जा रहा है।
हर राज्य बनाए अपना कृषि रोडमैप
किसान आईडी और KCC को बताया जरूरी
वैज्ञानिक गाँव-गाँव पहुंचेंगे।
विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत वैज्ञानिक गांवों में जाकर किसानों से सीधा संवाद करेंगे। किसान अपनी जमीन, मौसम और फसल के हिसाब से सलाह ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि शोध तभी सफल माना जाएगा, जब उसका लाभ खेत तक पहुंचे।
छोटे किसानों के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग पर जोर
उन्होंने किसानों को इन क्षेत्रों से जुड़ने की सलाह दी:
- फल उत्पादन
- सब्जी खेती
- पशुपालन
- मत्स्य पालन
- बकरी पालन
- मुर्गी पालन
- मधुमक्खी पालन
- वृक्ष आधारित खेती
उन्होंने कहा कि इससे किसानों की आय के कई स्रोत बनेंगे।