देश में पहली बार हर गाँव का बनेगा जल बजट, इन 10 राज्यों की 1000 ग्राम पंचायतों से शुरू होगी नई पहल, जानिए क्या होंगे फ़ायदे
Gaon Connection | Jul 14, 2026, 12:32 IST
ग्रामीण क्षेत्रों में जल प्रबंधन को मज़बूत करने के लिए पंचायती राज मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्तर के मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की है। इसके तहत ग्राम पंचायतें पहली बार वैज्ञानिक आधार पर जल बजट और जल सुरक्षा योजनाएँ तैयार करेंगी। पहले चरण में 10 राज्यों के 100 ज़िलों, 100 ब्लॉकों और 1,000 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है। इस पहल का उद्देश्य जल संरक्षण, जलवायु-अनुकूल योजना और सतत ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना है।
जल बजट से बनेगी हर गाँव की जल सुरक्षा योजना
गाँवों में पानी की उपलब्धता अब केवल बारिश या भूजल पर निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि उसकी ज़रूरत और उपलब्ध संसाधनों का वैज्ञानिक आकलन भी किया जाएगा। बदलते मौसम, गिरते भूजल स्तर और पानी की बढ़ती माँग के बीच केंद्र सरकार ने पहली बार ग्राम पंचायत स्तर पर जल प्रबंधन को व्यवस्थित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पेयजल, खेती, पशुपालन और घरेलू उपयोग के लिए पानी की योजना स्थानीय स्तर पर ही तैयार हो सके।
इसी कड़ी में पंचायती राज मंत्रालय ने ग्राम पंचायतों के लिए जल बजट और जल सुरक्षा योजना तैयार करने हेतु राष्ट्रीय स्तर के मास्टर ट्रेनर्स के पहले प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत नई दिल्ली में की है। 13 से 16 जुलाई 2026 तक चलने वाले चार दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से राज्य, ज़िला और ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षकों का ऐसा नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जो ग्राम पंचायतों को वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर जल सुरक्षा योजनाएँ बनाने में सहयोग देगा। इस दौरान मंत्रालय ने ‘जल-पर्याप्त पंचायत’ प्रशिक्षण नियमावली (चरण-1 और चरण-2) का भी विमोचन किया।
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत अपने गाँव का जल बजट तैयार करेगी। इसमें यह आकलन किया जाएगा कि गाँव को एक वर्ष में पेयजल, घरेलू उपयोग, कृषि और पशुधन के लिए कितने पानी की आवश्यकता है, उपलब्ध जल स्रोत कितने हैं, वर्षा जल का कितना हिस्सा संरक्षित हो रहा है और कितना बहकर नष्ट हो जाता है। इसके आधार पर पानी की उपलब्धता और आवश्यकता के बीच अंतर का विश्लेषण कर तकनीकी समाधान तैयार किए जाएँगे।
तैयार की गई जल सुरक्षा योजना को ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) से जोड़ा जाएगा, ताकि आवश्यक वित्तीय प्रावधान के साथ जल संरक्षण के कार्य ज़मीनी स्तर पर लागू किए जा सकें। मंत्रालय के अनुसार, यह पहल सहभागी, वैज्ञानिक और जलवायु-अनुकूल जल प्रबंधन को बढ़ावा देगी तथा ‘जल-पर्याप्त ग्राम पंचायत’ के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगी।
पहले चरण में बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के 100 ज़िलों, 100 ब्लॉकों और 1,000 ग्राम पंचायतों को शामिल किया जाएगा। प्रशिक्षण के पहले बैच में बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल के मास्टर ट्रेनर्स भाग ले रहे हैं, जो आगे अपने-अपने राज्यों में प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करेंगे।
पंचायती राज मंत्रालय ने इस पहल के लिए नॉलेज पार्टनर प्रदान (PRADAN) के सहयोग से जल सुरक्षा योजना की नियमावली तैयार की है। प्रशिक्षण के दौरान जल बजट तैयार करना, स्थानीय जल स्रोतों और पानी की माँग का आकलन, संरक्षण उपायों की पहचान, जलवायु-अनुकूल जल सुरक्षा योजना बनाना और उसे ग्राम पंचायत विकास योजना के साथ एकीकृत करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यक्रम में अभ्यास, मूल्यांकन और चरणबद्ध क्षमता निर्माण की भी व्यवस्था की गई है। पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने कहा कि जल सुरक्षा सतत ग्रामीण विकास का अहम आधार है। उनके अनुसार, स्थानीय समुदाय अपने क्षेत्र की जल संबंधी चुनौतियों को सबसे बेहतर तरीके से समझता है और यह प्रशिक्षण उसी स्थानीय अनुभव को वैज्ञानिक जल बजट और कार्ययोजना में बदलने में मदद करेगा। उन्होंने सामुदायिक भागीदारी और व्यवहार परिवर्तन को इस पहल की सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया।
मंत्रालय के अपर सचिव सुशील कुमार लोहानी ने कहा कि ग्राम पंचायत विकास योजनाओं में जल संरक्षण को शामिल करना समग्र ग्रामीण विकास के लिए आवश्यक है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किए जा रहे मास्टर ट्रेनर्स राज्यों, ज़िलों और ग्राम पंचायतों को तकनीकी रूप से सशक्त जल सुरक्षा योजनाएँ तैयार करने में मदद करेंगे। कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और जल संकट से प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी।
जल बजट में गाँव की वार्षिक जल आवश्यकता, पेयजल, घरेलू उपयोग, कृषि और पशुधन के लिए पानी की माँग, उपलब्ध जल स्रोतों का विवरण, वर्षा जल संचयन की स्थिति, जल उपलब्धता और आवश्यकता के बीच अंतर, जल संरक्षण के तकनीकी उपाय, सभी ग्रामीणों तक समान रूप से पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की योजना और जल प्रबंधन पर प्रस्तावित वार्षिक वित्तीय व्यय जैसे प्रमुख बिंदुओं को शामिल किया जाएगा। इससे ग्राम पंचायतें स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप जल प्रबंधन की अधिक प्रभावी और दीर्घकालिक योजना तैयार कर सकेंगी।
इसी कड़ी में पंचायती राज मंत्रालय ने ग्राम पंचायतों के लिए जल बजट और जल सुरक्षा योजना तैयार करने हेतु राष्ट्रीय स्तर के मास्टर ट्रेनर्स के पहले प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत नई दिल्ली में की है। 13 से 16 जुलाई 2026 तक चलने वाले चार दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से राज्य, ज़िला और ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षकों का ऐसा नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जो ग्राम पंचायतों को वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर जल सुरक्षा योजनाएँ बनाने में सहयोग देगा। इस दौरान मंत्रालय ने ‘जल-पर्याप्त पंचायत’ प्रशिक्षण नियमावली (चरण-1 और चरण-2) का भी विमोचन किया।
ग्राम पंचायतें तैयार करेंगी जल बजट, 10 राज्यों से होगी शुरुआत
तैयार की गई जल सुरक्षा योजना को ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) से जोड़ा जाएगा, ताकि आवश्यक वित्तीय प्रावधान के साथ जल संरक्षण के कार्य ज़मीनी स्तर पर लागू किए जा सकें। मंत्रालय के अनुसार, यह पहल सहभागी, वैज्ञानिक और जलवायु-अनुकूल जल प्रबंधन को बढ़ावा देगी तथा ‘जल-पर्याप्त ग्राम पंचायत’ के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगी।
पहले चरण में बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के 100 ज़िलों, 100 ब्लॉकों और 1,000 ग्राम पंचायतों को शामिल किया जाएगा। प्रशिक्षण के पहले बैच में बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल के मास्टर ट्रेनर्स भाग ले रहे हैं, जो आगे अपने-अपने राज्यों में प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करेंगे।
जल सुरक्षा योजनाओं में होगा वैज्ञानिक आकलन, स्थानीय समुदाय की भागीदारी पर रहेगा ज़ोर
मंत्रालय के अपर सचिव सुशील कुमार लोहानी ने कहा कि ग्राम पंचायत विकास योजनाओं में जल संरक्षण को शामिल करना समग्र ग्रामीण विकास के लिए आवश्यक है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किए जा रहे मास्टर ट्रेनर्स राज्यों, ज़िलों और ग्राम पंचायतों को तकनीकी रूप से सशक्त जल सुरक्षा योजनाएँ तैयार करने में मदद करेंगे। कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और जल संकट से प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी।
जल बजट में गाँव की वार्षिक जल आवश्यकता, पेयजल, घरेलू उपयोग, कृषि और पशुधन के लिए पानी की माँग, उपलब्ध जल स्रोतों का विवरण, वर्षा जल संचयन की स्थिति, जल उपलब्धता और आवश्यकता के बीच अंतर, जल संरक्षण के तकनीकी उपाय, सभी ग्रामीणों तक समान रूप से पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की योजना और जल प्रबंधन पर प्रस्तावित वार्षिक वित्तीय व्यय जैसे प्रमुख बिंदुओं को शामिल किया जाएगा। इससे ग्राम पंचायतें स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप जल प्रबंधन की अधिक प्रभावी और दीर्घकालिक योजना तैयार कर सकेंगी।