Green Energy: उत्तर प्रदेश में जैव ऊर्जा से बढ़ रहे रोज़गार के मौके; 3,500 करोड़ का निवेश, किसानों की आय बढ़ाने पर ज़ोर
Mansi | Aug 13, 2026, 14:16 IST
उत्तर प्रदेश में खेती के कचरे से कंप्रेस्ड बायो-गैस का उत्पादन बढ़ता जा रहा है, जो किसानों के लिए नए आय और रोजगार के अवसरों का द्वार खोल रहा है। इस क्षेत्र में लगभग 3,500 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है, जिससे 25 हजार लोगों को रोजगार मिला है। 20 सीबीजी प्लांट सक्रिय हैं और भविष्य में 70-80 नए प्लांट स्थापित होने की संभावना है।
उत्तर प्रदेश में कृषि कचरे से सीबीजी उत्पादन किसानों की आय, रोज़गार और जैविक खाद के नए अवसर खोल रहा है
उत्तर प्रदेश में खेती-किसानी से निकलने वाला कचरा अब सिर्फ़ खेतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यही सामग्री ऊर्जा और रोज़गार का ज़रिया भी बन रही है। प्रदेश में कंप्रेस्ड बायो-गैस (CBG) के क्षेत्र में बढ़ते निवेश से किसानों के लिए नई संभावनाएँ बन रही हैं। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के मुताबिक़, राज्य में सीबीजी क्षेत्र में अब तक करीब 3,500 करोड़ रुपये का निवेश आया है, जिससे लगभग 25 हज़ार लोगों को रोज़गार मिला है।
कृषि मंत्री ने यह जानकारी एक कार्यक्रम के दौरान दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में इस समय करीब 20 सीबीजी प्लांट काम कर रहे हैं, जबकि आने वाले समय में 70 से 80 नए प्लांट लगाए जाने की उम्मीद है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि सीबीजी और जैव ऊर्जा के क्षेत्र को और आगे ले जाने के लिए अभी कई स्तरों पर काम करने की ज़रूरत है।
जैव ऊर्जा को सिर्फ़ ऊर्जा उत्पादन तक सीमित न मानते हुए कृषि से जोड़कर देखा जा रहा है। सूर्य प्रताप शाही के मुताबिक़, किसानों की आमदनी बढ़ाने के प्रयासों में जैव ऊर्जा की अहम भूमिका हो सकती है। सीबीजी प्लांट में गोबर और कृषि अपशिष्ट जैसे जैविक पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है। यानी खेतों और पशुपालन से निकलने वाले ऐसे अवशेष, जिन्हें अक्सर बेकार समझ लिया जाता है, उनका इस्तेमाल ऊर्जा बनाने में किया जा सकता है। इससे किसानों के लिए अतिरिक्त आय का रास्ता भी बन सकता है।
सीबीजी उत्पादन का एक और फ़ायदा खेतों तक पहुँचने वाली जैविक खाद के रूप में देखा जा रहा है। कृषि मंत्री ने कहा कि इन प्लांटों से निकलने वाली जैविक खाद का इस्तेमाल खेतों में किया जा सकता है। लगातार रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता और मिट्टी की घटती गुणवत्ता के बीच जैविक खाद को बढ़ावा देना खेती के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। इससे खेतों में जैविक पदार्थ बढ़ाने और मिट्टी की सेहत सुधारने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, सीबीजी क्षेत्र के विस्तार के सामने एक बड़ी चुनौती कच्चे माल की उपलब्धता और उसे प्लांट तक पहुँचाने की है। गोबर और कृषि अपशिष्ट मुख्य रूप से गाँवों में उपलब्ध होते हैं, जबकि सीबीजी प्लांट अलग-अलग जगहों पर स्थापित किए जा रहे हैं। ऐसे में गाँवों से कच्चा माल इकट्ठा कर प्लांट तक पहुँचाने में परिवहन लागत बढ़ सकती है। कृषि मंत्री के अनुसार, इसके लिए एक व्यवस्थित संग्रहण और परिवहन व्यवस्था तैयार करनी होगी। साथ ही, प्लांट संचालकों को किसानों से कच्चा माल उचित कीमत पर खरीदना होगा, तभी यह व्यवस्था लंबे समय तक टिकाऊ बन पाएगी।
कृषि मंत्री ने बताया कि हाल के वर्षों में सौर ऊर्जा समेत दूसरे ऊर्जा स्रोतों के ज़रिये 5,000 मेगावाट से अधिक बिजली का उत्पादन हुआ है। सरकार के अनुसार, उत्तर प्रदेश देश में इथेनॉल और सीबीजी उत्पादन के क्षेत्र में भी आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के दौरान कई नए प्रकाशनों का विमोचन हुआ और करीब 5,000 करोड़ रुपये के नए निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। सरकार का कहना है कि इन निवेशों से हरित ऊर्जा के क्षेत्र में आगे और रोज़गार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री ने प्रदेश में मानसून और खेती की स्थिति पर भी बात की। उन्होंने बताया कि इस मानसून में अब तक उत्तर प्रदेश में सामान्य से करीब 20 प्रतिशत कम बारिश हुई है। हालांकि, सरकार के अनुसार अभी तक बारिश की कमी से फसलों को बड़े स्तर पर नुकसान नहीं हुआ है। लेकिन अगर आने वाले दिनों में भी मानसून कमज़ोर रहा, तो कुछ इलाकों में किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
ऐसे में एक तरफ़ प्रदेश सरकार जैव ऊर्जा के ज़रिये कृषि अवशेषों को आय और ऊर्जा के स्रोत में बदलने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ़ मानसून की स्थिति पर भी लगातार नज़र रखनी होगी। खेती, ऊर्जा और रोज़गार—तीनों को साथ जोड़कर आगे बढ़ना ही इस दिशा में सबसे बड़ी चुनौती और संभावना है।
कृषि मंत्री ने यह जानकारी एक कार्यक्रम के दौरान दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में इस समय करीब 20 सीबीजी प्लांट काम कर रहे हैं, जबकि आने वाले समय में 70 से 80 नए प्लांट लगाए जाने की उम्मीद है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि सीबीजी और जैव ऊर्जा के क्षेत्र को और आगे ले जाने के लिए अभी कई स्तरों पर काम करने की ज़रूरत है।
किसानों की आय बढ़ाने में मददगार हो सकती है जैव ऊर्जा
सीबीजी प्लांट से मिलेगी जैविक खाद, मिट्टी को भी फायदा
गाँवों से प्लांट तक गोबर पहुंचाना बड़ी चुनौती
5,000 करोड़ रुपये के निवेश समझौतों पर भी हस्ताक्षर
कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री ने प्रदेश में मानसून और खेती की स्थिति पर भी बात की। उन्होंने बताया कि इस मानसून में अब तक उत्तर प्रदेश में सामान्य से करीब 20 प्रतिशत कम बारिश हुई है। हालांकि, सरकार के अनुसार अभी तक बारिश की कमी से फसलों को बड़े स्तर पर नुकसान नहीं हुआ है। लेकिन अगर आने वाले दिनों में भी मानसून कमज़ोर रहा, तो कुछ इलाकों में किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
ऐसे में एक तरफ़ प्रदेश सरकार जैव ऊर्जा के ज़रिये कृषि अवशेषों को आय और ऊर्जा के स्रोत में बदलने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ़ मानसून की स्थिति पर भी लगातार नज़र रखनी होगी। खेती, ऊर्जा और रोज़गार—तीनों को साथ जोड़कर आगे बढ़ना ही इस दिशा में सबसे बड़ी चुनौती और संभावना है।