सखी मंडलों को सरकार का बड़ा तोहफा, E-Commerce से जुड़ेंगी महिलाएँ, सरकार देगी आर्थिक मदद

Mansi | Jul 30, 2026, 18:01 IST
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गुजरात सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की नई योजना शुरू की है। स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के तहत ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़ने और पंजीकरण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। ऑनलाइन बिक्री को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक ऑर्डर पर प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।

ई-कॉमर्स से जुड़ेगा महिलाओं का स्वरोज़गार
ई-कॉमर्स से जुड़ेगा महिलाओं का स्वरोज़गार
ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उनके उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुँचाने की दिशा में गुजरात सरकार ने नई पहल की है। गुजरात लाइवलीहुड प्रमोशन कंपनी लिमिटेड (GLPC) ने स्वयं सहायता समूहों (सखी मंडलों) के लिए मार्केटिंग सपोर्ट स्कीम शुरू की है। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को केवल स्थानीय बाजार तक सीमित रखने के बजाय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों तक पहुँचाना है।

सरकार का मानना है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को बेहतर बाजार और डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराए जाएँ, तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। इसी सोच के साथ वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना में 25 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।

किन पंजीकरणों के लिए मिलेगी आर्थिक सहायता?

नई योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने में मदद दी जाएगी। इसके लिए आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने में भी वित्तीय सहायता मिलेगी। अब तक अधिकांश सखी मंडल अपने उत्पाद स्थानीय मेलों, प्रदर्शनियों और सीमित बाजारों में बेचते थे, लेकिन नई व्यवस्था उन्हें ऑनलाइन बाजार तक पहुँचने का अवसर देगी। योजना के अंतर्गत जीएसटी पंजीकरण के लिए 15 हजार रुपये तक, एफएसएसएआई लाइसेंस बनवाने के लिए 10 हजार रुपये तक और पैन कार्ड पंजीकरण के लिए 2 हजार रुपये तक की सहायता दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छोटे स्वयं सहायता समूह भी बिना अतिरिक्त आर्थिक बोझ के ऑनलाइन कारोबार शुरू कर सकें।

ऑनलाइन बिक्री पर भी मिलेगा प्रोत्साहन

योजना में केवल ऑनलाइन पंजीकरण ही नहीं, बल्कि डिजिटल बिक्री को बढ़ावा देने का भी प्रावधान किया गया है। प्रत्येक ऑनलाइन ऑर्डर पर 20 रुपये का प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसके अलावा, प्रत्येक सखी मंडल को इस योजना के तहत जीवनकाल में अधिकतम 5 लाख रुपये तक की सहायता मिल सकेगी। इससे महिलाओं को घर बैठे अपने उत्पाद बेचने और नियमित आय अर्जित करने का अवसर मिलने की उम्मीद है।

'लखपति दीदी' अभियान को कैसे मिलेगी मजबूती?

सरकार का कहना है कि यह योजना 'लखपति दीदी' अभियान को गति देने में अहम भूमिका निभाएगी। यदि स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को व्यापक बाजार मिलता है, तो ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ेगी और वे आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बन सकेंगी। साथ ही, ग्रामीण उद्यमिता को भी बढ़ावा मिलेगा। राजकोट जिले के धोराजी तालुका के पाटनवाव गाँव की ओसम सखी मंडल की अध्यक्ष रेखाबेन गिरीशभाई पेठाणी इस बदलाव का एक उदाहरण हैं। वर्ष 2016 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने RSETI से फूड प्रोसेसिंग का प्रशिक्षण लिया और पारंपरिक मसाला व्यवसाय शुरू किया।

छोटे कारोबार से लाखों की आय तक का सफर

रेखाबेन ने बैंक से 1.5 लाख रुपये का ऋण लेकर अपने कारोबार का विस्तार किया। इसके साथ उन्होंने स्थानीय महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध कराया। वर्तमान में उनकी मसाला इकाई से 10.96 लाख रुपये से अधिक की वार्षिक आय हो रही है। सरकार का मानना है कि नई मार्केटिंग सपोर्ट स्कीम से ऐसे अनेक सखी मंडलों को अपने उत्पाद देश और विदेश के ग्राहकों तक पहुँचाने का अवसर मिलेगा।

यदि योजना का लाभ अधिक से अधिक स्वयं सहायता समूहों तक पहुँचता है, तो ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय बाजार पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उन्हें नए ग्राहक मिलेंगे, उत्पादों की बिक्री बढ़ेगी और आय के नए अवसर पैदा होंगे। सरकार को उम्मीद है कि यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ महिला उद्यमिता को भी नई दिशा देगी।
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