कर्नाटक में गुटखा-पान मसाला बैन, जानें सुपारी किसानों पर क्या असर पड़ेगा, कितना बड़ा है सुपारी कारोबार
Umang | Aug 12, 2026, 19:11 IST
कर्नाटक सरकार ने 10 अगस्त को तंबाकू और निकोटीन वाले गुटखा व पान मसाला उत्पादों की बिक्री और वितरण पर एक साल की रोक लगाई है। इस फैसले के बाद सुपारी किसानों पर संभावित असर को लेकर चिंता है। कैंपको ने कहा है कि प्रतिबंध का अनपेक्षित असर सुपारी उत्पादकों और वैध कारोबार पर नहीं पड़ना चाहिए। 2026-27 की पहली तिमाही में सुपारी व संबंधित उत्पादों से कर्नाटक को ₹90.02 करोड़ का GST मिला था।
कर्नाटक का गुटखा बैन कितना बदलेगा सुपारी का बाजार?
कर्नाटक में गुटखा और तंबाकू-निकोटीन वाले पान मसाला उत्पादों पर एक साल की रोक ने सुपारी किसानों के सामने भी संभावित असर का सवाल खड़ा कर दिया है। राज्य के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने 10 अगस्त को अधिसूचना जारी कर तंबाकू और निकोटीन वाले उत्पादों की बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगाया है। इसी के बाद सेंट्रल एरेकेनट एंड कोको मार्केटिंग एंड प्रोसेसिंग कोऑपरेटिव लिमिटेड यानी कैंपको ने कहा है कि इस फैसले का अनपेक्षित असर सुपारी उत्पादकों या वैध सुपारी कारोबार पर नहीं पड़ना चाहिए।
कैंपको की चिंता इसलिए अहम है क्योंकि सुपारी की खेती और उसका वैध कारोबार कर्नाटक के कृषि क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गुटखा और पान मसाला जैसे उत्पादों पर कार्रवाई के बाद मांग और कारोबार को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है, लेकिन कैंपको का कहना है कि तंबाकू और निकोटीन वाले उत्पादों पर प्रतिबंध को सुपारी की वैध खेती और व्यापार से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। राज्य सरकार का मौजूदा आदेश सार्वजनिक स्वास्थ्य के मद्देनज़र लागू किया गया है और यह एक साल तक प्रभावी रहेगा।
कर्नाटक के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने 10 अगस्त को आदेश जारी किया। इसके तहत तंबाकू और निकोटीन वाले गुटखा, पान मसाला तथा ऐसे अन्य उत्पादों की बिक्री और वितरण पर रोक लगाई गई है। मौजूदा जानकारी के मुताबिक़ यह प्रतिबंध पूरे राज्य में एक साल तक लागू रहेगा। यानी दुकानों और बाज़ारों में ऐसे उत्पादों की बिक्री पर रोक रहेगी। इस कदम के पीछे सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य को आधार बनाया है। प्रतिबंध के दायरे में तंबाकू और निकोटीन वाले उत्पाद हैं, ऐसे में सुपारी की सामान्य खेती और वैध कारोबार को इससे अलग रखना कैंपको की प्रमुख चिंता है।
गुटखा और पान मसाला के निर्माण में सुपारी का इस्तेमाल होने के कारण इन उत्पादों पर प्रतिबंध के बाद सुपारी की मांग पर संभावित असर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, मौजूदा जानकारी में यह नहीं कहा गया है कि कर्नाटक में सुपारी की खेती या सामान्य सुपारी कारोबार पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसी वजह से कैंपको ने सरकार से यह सुनिश्चित करने की बात कही है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए उठाए गए कदम का नुकसान उन किसानों को न हो, जो वैध तरीके से सुपारी का उत्पादन और कारोबार कर रहे हैं। कैंपको पहले भी सुपारी उत्पादकों से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय रहा है।
कर्नाटक में सुपारी और सुपारी आधारित उत्पादों का कारोबार राज्य के कृषि-व्यापार में अहम भूमिका रखता है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक़ वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में सुपारी और सुपारी आधारित उत्पादों की बिक्री से कर्नाटक सरकार को ₹90.02 करोड़ का जीएसटी संग्रह हुआ। ऐसे में गुटखा-पान मसाला पर एक साल की रोक के बाद सुपारी के बाज़ार पर पड़ने वाले असर पर नज़र रहेगी। फिलहाल कैंपको का रुख़ साफ़ है कि प्रतिबंध तंबाकू और निकोटीन वाले उत्पादों तक सीमित रहना चाहिए और इसका असर सुपारी उगाने वाले किसानों तथा वैध कारोबार पर नहीं पड़ना चाहिए।
कैंपको की चिंता इसलिए अहम है क्योंकि सुपारी की खेती और उसका वैध कारोबार कर्नाटक के कृषि क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गुटखा और पान मसाला जैसे उत्पादों पर कार्रवाई के बाद मांग और कारोबार को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है, लेकिन कैंपको का कहना है कि तंबाकू और निकोटीन वाले उत्पादों पर प्रतिबंध को सुपारी की वैध खेती और व्यापार से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। राज्य सरकार का मौजूदा आदेश सार्वजनिक स्वास्थ्य के मद्देनज़र लागू किया गया है और यह एक साल तक प्रभावी रहेगा।