खेती में बढ़ीं महिलाओं की ज़िम्मेदारियाँः 2025 में कृषि क्षेत्र के लगभग 60% वर्कफोर्स में महिलाएँ, सरकार ने संसद में दी जानकारी

Mansi | Jul 29, 2026, 17:47 IST
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देश की कृषि व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। सरकार के अनुसार, वर्ष 2025 में कृषि क्षेत्र के कुल कार्यबल का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं का है। खेती, पशुपालन, बागवानी और कृषि आधारित उद्यमों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही है। जानिए सरकार ने संसद में क्या जानकारी दी और महिला किसानों के सामने अब भी कौन-सी चुनौतियाँ बनी हुई हैं।

2025 में कृषि क्षेत्र के लगभग 60% वर्कफोर्स में महिलाएँ<br>
2025 में कृषि क्षेत्र के लगभग 60% वर्कफोर्स में महिलाएँ
देश की कृषि व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। खेतों में बुवाई, रोपाई और कटाई से लेकर पशुपालन, बागवानी, मछली पालन और कृषि प्रसंस्करण तक महिलाओं की भूमिका पहले की तुलना में कहीं अधिक मज़बूत हुई है। सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि वर्ष 2025 में देश के कृषि क्षेत्र कार्यबल का लगभग 59.8 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं का रहा। यह आँकड़ा राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण पर आधारित है।

सरकार का कहना है कि महिला किसानों को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, कृषि अवसंरचना कोष, कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रशिक्षण कार्यक्रम और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आधुनिक खेती और बाजार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। खेती में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही है।

सरकार ने महिलाओं की भागीदारी को लेकर दिए आँकड़े

लोकसभा में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि वर्ष 2025 में कृषि गतिविधियों से जुड़े कुल कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी 59.8%रही। सरकार के अनुसार, कृषि क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं में लगभग 41 प्रतिशत महिलाएँ स्वरोजगार श्रेणी में भी शामिल हैं। इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में महिलाएँ केवल खेतों में श्रमिक के रूप में ही नहीं, बल्कि खेती और उससे जुड़े कार्यों का संचालन भी कर रही हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों से पुरुषों का दूसरे क्षेत्रों में रोज़गार के लिए पलायन, स्वयं सहायता समूहों का विस्तार और सरकारी योजनाओं तक महिलाओं की बढ़ती पहुँच इसके प्रमुख कारण हैं। अब महिलाएँ केवल खेतों में श्रम नहीं कर रहीं, बल्कि खेती की योजना बनाने, बीज चयन, सिंचाई, फसल प्रबंधन और आय बढ़ाने से जुड़े निर्णयों में भी भागीदारी निभा रही हैं।

खेतों से उद्यमिता तक कैसे पहुँची महिलाएँ?

आज महिलाएँ पारंपरिक खेती के साथ-साथ डेयरी, बकरी पालन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, बागवानी और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में भी सक्रिय हैं। कई राज्यों में महिला किसान किसान उत्पादक संगठकों और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन कर अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उद्यमिता को भी बढ़ावा मिला है।

महिला किसानों के लिए सरकार कौन-कौन सी योजनाएँ चला रही है?

सरकार का कहना है कि महिला किसानों को कृषि क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए कई योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। PM-KISAN के तहत पात्र महिला किसानों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से आर्थिक सहायता मिल रही है। वहीं कृषि अवसंरचना कोष के ज़रिए भंडारण, प्रसंस्करण और कृषि से जुड़े ढाँचागत विकास के लिए भी महिलाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है।इसके अलावा कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को आधुनिक खेती, जैविक कृषि, मशरूम उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण और उद्यमिता से जुड़े प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं, ताकि वे खेती को आय का बेहतर स्रोत बना सकें।

कृषि अवसंरचना कोष से महिलाओं को क्या लाभ मिल रहा है?

सरकार के अनुसार, कृषि अवसंरचना कोष के तहत महिला किसानों और महिला समूहों को भंडारण, कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्करण इकाइयाँ और अन्य कृषि ढाँचे विकसित करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इससे महिलाओं को खेती के साथ-साथ कृषि आधारित व्यवसाय शुरू करने का अवसर भी मिल रहा है।

महिला किसानों के सामने अब भी कौन-सी चुनौतियाँ हैं?

महिलाओं की भागीदारी बढ़ने के बावजूद कई चुनौतियाँ अब भी बनी हुई हैं। बड़ी संख्या में महिलाओं के नाम पर कृषि भूमि नहीं है, जिससे उन्हें संस्थागत ऋण, बीमा और कई सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ लेने में कठिनाई होती है। इसके अलावा आधुनिक मशीनों, नई तकनीक और बड़े बाज़ारों तक उनकी पहुँच भी अभी सीमित मानी जाती है। महिलाओं को भूमि अधिकार, वित्तीय सहायता और तकनीकी संसाधनों तक समान अवसर मिलें, तो कृषि क्षेत्र में उनकी भूमिका और अधिक प्रभावी हो सकती है।

प्रशिक्षण और बाज़ार तक पहुँच पर सरकार का कितना ज़ोर है?

केंद्रों , डिजिटल माध्यमों और विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से महिला किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने पर ज़ोर दे रही है। इसे साथ ही कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन और बेहतर विपणन व्यवस्था से जोड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं, ताकि उनकी आय में वृद्धी हो सके।

महिलाओं की बढ़ती भागीदारी केवल श्रमशक्ति बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय कृषि को अधिक समावेशी और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव है। यदि महिला किसानों को समान अवसर, आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता और निर्णय प्रक्रिया में पर्याप्त भागीदारी मिले, तो कृषि क्षेत्र की उत्पादकता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों को नया बल मिल सकता है।
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