हर घर तिरंगा अभियान से यूपी की ग्रामीण महिलाओं को मिला बड़ा मौका, 30 हजार महिलाएँ बना रहीं 2 करोड़ झंडे
Mansi | Aug 12, 2026, 11:25 IST
उत्तर प्रदेश में स्वतंत्रता दिवस की शानदार तैयारियाँ चल रही हैं, जिसमें महिलाएँ तिरंगे के निर्माण में जुटी हुई हैं। लगभग तीस हजार महिलाएँ मिलकर दो करोड़ राष्ट्रीय ध्वज का निर्माण कर रही हैं। यह पहल न केवल उन्हें रोजगार मुहैया करा रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता का भी अनुभव करा रही है।
गाँव की महिलाएँ स्वतंत्रता दिवस से पहले तिरंगे तैयार कर देशभक्ति के साथ अपनी आजीविका को भी मज़बूत कर रही हैं
उत्तर प्रदेश में स्वतंत्रता दिवस की तैयारियाँ तेज़ हो गई हैं। इस बार हर घर तिरंगा अभियान को सफल बनाने में गाँव की महिलाएँ भी अहम भूमिका निभा रही हैं। प्रदेश के करीब 6 हजार स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी लगभग 30 हजार महिलाएँ मिलकर करीब 2 करोड़ राष्ट्रीय ध्वज तैयार कर रही हैं। खास बात यह है कि यह पहल केवल स्वतंत्रता दिवस के लिए तिरंगा तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण महिलाओं को काम और अतिरिक्त आमदनी का अवसर भी मिल रहा है।
गाँवों में महिलाएँ समूह बनाकर तिरंगे तैयार करने में जुटी हैं। अपने रोज़मर्रा के काम के साथ वे इस जिम्मेदारी को भी पूरा कर रही हैं। सरकार की ओर से मिले इस काम ने स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को एक साथ काम करने और अपनी क्षमता का इस्तेमाल करने का अवसर दिया है।
उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मुताबिक, प्रदेश में तिरंगा बनाने का काम तेजी से चल रहा है। अब तक करीब 1 करोड़ 90 लाख राष्ट्रीय ध्वज तैयार किए जा चुके हैं। अभियान के तहत करीब 2 करोड़ तिरंगे तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। तैयार किए जा रहे इन झंडों को केवल सरकारी स्तर पर ही नहीं रखा जाएगा, बल्कि इन्हें गाँव-गाँव और घर-घर पहुँचाने की व्यवस्था की जा रही है। ग्राम पंचायतों, स्थानीय ग्राम प्रधानों और अलग-अलग संस्थाओं के माध्यम से तिरंगों को प्रदेश के घरों और प्रतिष्ठानों तक पहुँचाया जाएगा। इससे स्वतंत्रता दिवस के दौरान अधिक से अधिक लोग अपने घरों पर तिरंगा फहरा सकेंगे।
तिरंगा निर्माण का काम किस तरह चल रहा है, इसकी जानकारी लेने के लिए अधिकारी भी गाँवों का दौरा कर रहे हैं। मिशन निदेशक अरुण कुमार ने लखनऊ के चिनहट विकासखंड की ग्राम पंचायत जुग्गौर और सिकन्दरपुर पहुँचकर तैयारियों का जायज़ा लिया। उन्होंने तिरंगा तैयार कर रहीं महिलाओं से बातचीत की और उनके काम को करीब से देखा। इस दौरान तैयार किए जा रहे झंडों की गुणवत्ता भी जाँची गई। इससे यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि अभियान के तहत तैयार होने वाले तिरंगे तय मानकों के अनुरूप हों।
चिनहट क्षेत्र के तुलसी माँ, छोटे साहब और बजरंगबली स्वयं सहायता समूहों को 1.50 लाख तिरंगे बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। इन समूहों की महिलाओं ने अब तक 1.30 लाख से अधिक झंडे तैयार कर लिए हैं। इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि गाँवों में महिलाएँ इस काम को कितनी तेजी से पूरा कर रही हैं।
हर घर तिरंगा अभियान के जरिए महिलाओं को मिला यह काम कुछ समय के लिए रोजगार देने तक सीमित नहीं है। ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत सरकार महिलाओं को ऐसे कामों से जोड़ने पर भी ज़ोर दे रही है, जिनसे उन्हें पूरे साल आमदनी मिल सके। इसके लिए स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को डेयरी, बकरी पालन, सिलाई, मसाला प्रसंस्करण, सोलर ड्रायर और हस्तशिल्प जैसे अलग-अलग उद्यमों से जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है। इसका मकसद महिलाओं की आय के स्रोत बढ़ाना और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए बेहतर अवसर देना है।
हर घर तिरंगा अभियान में ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी इस पहल को एक अलग पहचान दे रही है। एक तरफ ये महिलाएँ स्वतंत्रता दिवस के मौके पर घर-घर तिरंगा पहुँचाने की तैयारी में योगदान दे रही हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्हें अपनी आजीविका बढ़ाने का अवसर भी मिल रहा है।
करीब 30 हजार महिलाओं का इस काम से जुड़ना बताता है कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने का माध्यम बन रहे हैं। तिरंगा निर्माण के इस काम से उन्हें सामूहिक रूप से काम करने, अपनी मेहनत से कमाई करने और आगे दूसरे छोटे उद्यमों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। इस तरह उत्तर प्रदेश में इस साल का हर घर तिरंगा अभियान केवल स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों तक सीमित नहीं दिख रहा। यह ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार, हुनर और आत्मनिर्भरता से जुड़ने का एक अवसर भी बन गया है।
गाँवों में महिलाएँ समूह बनाकर तिरंगे तैयार करने में जुटी हैं। अपने रोज़मर्रा के काम के साथ वे इस जिम्मेदारी को भी पूरा कर रही हैं। सरकार की ओर से मिले इस काम ने स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को एक साथ काम करने और अपनी क्षमता का इस्तेमाल करने का अवसर दिया है।
करीब 1.90 करोड़ तिरंगे तैयार
महिलाओं के काम की हो रही है निगरानी
चिनहट क्षेत्र के तुलसी माँ, छोटे साहब और बजरंगबली स्वयं सहायता समूहों को 1.50 लाख तिरंगे बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। इन समूहों की महिलाओं ने अब तक 1.30 लाख से अधिक झंडे तैयार कर लिए हैं। इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि गाँवों में महिलाएँ इस काम को कितनी तेजी से पूरा कर रही हैं।
सिर्फ तिरंगा बनाने तक सीमित नहीं रहेगा काम
देशभक्ति के साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
करीब 30 हजार महिलाओं का इस काम से जुड़ना बताता है कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने का माध्यम बन रहे हैं। तिरंगा निर्माण के इस काम से उन्हें सामूहिक रूप से काम करने, अपनी मेहनत से कमाई करने और आगे दूसरे छोटे उद्यमों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। इस तरह उत्तर प्रदेश में इस साल का हर घर तिरंगा अभियान केवल स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों तक सीमित नहीं दिख रहा। यह ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार, हुनर और आत्मनिर्भरता से जुड़ने का एक अवसर भी बन गया है।