हरेला पर उत्तराखंड में 10 लाख पौधे रोपने का लक्ष्य, पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी पर ज़ोर, जानें क्या है इस पर्व का महत्व
Gaon Connection | Jul 16, 2026, 15:55 IST
उत्तराखंड में प्रकृति और हरियाली को समर्पित लोकपर्व हरेला पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। मानसून और खरीफ़ बुआई की शुरुआत का प्रतीक यह पर्व पर्यावरण संरक्षण, अच्छी फसल और सुख-समृद्धि का संदेश देता है। इस अवसर पर राज्यभर में 10 लाख पौधे लगाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोगों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने की अपील की। देहरादून में 5 लाख सब्ज़ी के पौधों और 70 हजार फलदार एवं अन्य पौधों का भी वितरण किया जा रहा है।
हरेला पर्व बना प्रकृति के प्रति आस्था का प्रतीक
उत्तराखंड में 16 जुलाई यानी आज प्रकृति और हरियाली को समर्पित लोकपर्व हरेला पूरे उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण, अच्छी कृषि, सुख-समृद्धि और धार्मिक आस्था से जुड़े इस पर्व के अवसर पर पूरे राज्य में 10 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। सुबह नौ दिन पहले टोकरियों में बोए गए हरेला को काटा गया और परिवार के बड़े-बुज़ुर्गों ने शुभकामनाओं के साथ हरेला की पत्तियाँ सदस्यों के सिर पर रखकर उनके सुख-समृद्धि की कामना की।
हरेला को उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और प्रकृति के प्रति आस्था का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन का प्रतीक भी है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ देते हुए पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हरेला केवल एक पर्व नहीं, बल्कि जल, जंगल और ज़मीन के संरक्षण के साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित भविष्य बनाने का संकल्प है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी प्राकृतिक सुंदरता, जैव विविधता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से है। ऐसे में प्रदेशवासियों की ज़िम्मेदारी है कि वे अपने जल स्रोतों, नदियों और गाड़-गदेरों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए लगातार प्रयास करें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान ने देशभर में वृक्षारोपण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाई है और उत्तराखंड में भी इसी भावना के साथ बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने लोगों से अधिक से अधिक पेड़ लगाने और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। उन्होंने सामाजिक संगठनों और संस्थाओं से भी इस अभियान में आगे आकर सहयोग करने का आग्रह किया। उनके अनुसार वृक्षारोपण अब केवल सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि जनभावना से जुड़ा विषय बन चुका है, जो नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और प्रकृति से जोड़ने का माध्यम भी बनेगा।
हरेला पर्व के अवसर पर उत्तराखंड में बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाया जा रहा है। राज्यभर में 10 लाख पौधे लगाए जा रहे हैं। वहीं देहरादून नगर निगम ने मिशन पोषण संकल्प के तहत स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से शहर के सभी वार्डों में 5 लाख सब्ज़ी के पौधों का वितरण किया है।
इसके अलावा विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में सहजन के पौधे लगाए जा रहे हैं। सार्वजनिक स्थलों और चिन्हित हरित क्षेत्रों में जनभागीदारी के साथ वृक्षारोपण अभियान संचालित किया जा रहा है। इस दौरान करीब 70 हजार फलदार, चारा और अन्य प्रजातियों के पौधों का भी वितरण किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य हरेला पर्व के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ हरित उत्तराखंड के संकल्प को मज़बूत करना है।
हरेला उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में मनाया जाने वाला एक प्रमुख लोकपर्व है, जो मानसून के आगमन और खरीफ़ फसलों की बुआई की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। 'हरेला' का अर्थ है 'हरियाली का दिन'। यह पर्व पर्यावरण संरक्षण, समृद्धि, अच्छी फसल और भगवान शिव तथा माता पार्वती के पावन विवाह की स्मृति से जुड़ा हुआ है।
यह पर्व कृषि परंपराओं और सांस्कृतिक आस्था का अनूठा संगम है।
हरेला को उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और प्रकृति के प्रति आस्था का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन का प्रतीक भी है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ देते हुए पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हरेला केवल एक पर्व नहीं, बल्कि जल, जंगल और ज़मीन के संरक्षण के साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित भविष्य बनाने का संकल्प है।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश, जनभागीदारी से चल रहा पौधारोपण अभियान
मुख्यमंत्री ने लोगों से अधिक से अधिक पेड़ लगाने और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। उन्होंने सामाजिक संगठनों और संस्थाओं से भी इस अभियान में आगे आकर सहयोग करने का आग्रह किया। उनके अनुसार वृक्षारोपण अब केवल सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि जनभावना से जुड़ा विषय बन चुका है, जो नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और प्रकृति से जोड़ने का माध्यम भी बनेगा।
राज्यभर में 10 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य, देहरादून में 5 लाख सब्ज़ी के पौधों का वितरण
इसके अलावा विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में सहजन के पौधे लगाए जा रहे हैं। सार्वजनिक स्थलों और चिन्हित हरित क्षेत्रों में जनभागीदारी के साथ वृक्षारोपण अभियान संचालित किया जा रहा है। इस दौरान करीब 70 हजार फलदार, चारा और अन्य प्रजातियों के पौधों का भी वितरण किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य हरेला पर्व के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ हरित उत्तराखंड के संकल्प को मज़बूत करना है।
हरेला का महत्व
यह पर्व कृषि परंपराओं और सांस्कृतिक आस्था का अनूठा संगम है।
- बीज बोने की परंपरा: हरेला से नौ दिन पहले घरों और खेतों में पत्तों की डलिया या छोटी टोकरियों में जौ, सरसों, मक्का समेत पाँच से सात प्रकार के बीज बोए जाते हैं।
- समृद्धि का प्रतीक: हरेला के दिन इन बीजों से निकली हरी कोपलों को काटकर परिवार के बड़े सदस्य सभी के सिर पर रखते हैं या कान के पीछे लगाते हैं। इसे अच्छे स्वास्थ्य, लंबी आयु, सुख-समृद्धि और भरपूर फसल का आशीर्वाद माना जाता है।
- सामुदायिक सहभागिता: इस अवसर पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाए जाते हैं, परिवार एकत्र होते हैं और खीर, पुआ, पूरी जैसे पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं। यह पर्व लोगों को प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संदेश भी देता है।