₹10 करोड़ के घोटाले को लेकर हरियाणा में बड़ा एक्शन, एग्रीकल्चरल बोर्ड के बड़े अफसर को नौकरी से निकाला गया, IDFC बैंक स्कैम से जुड़े तार

Gaon Connection | May 02, 2026, 13:22 IST
Share
हरियाणा में सरकारी सिस्टम में करोड़ों के वित्तीय खेल का खुलासा हुआ है। एचएसएएमबी के वित्त एवं लेखा नियंत्रक राजेश सांगवान को 590 करोड़ रुपये के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले में बर्खास्त किया गया है। 10 करोड़ रुपये की संदिग्ध ट्रांजैक्शन के बाद जांच एजेंसियां सक्रिय हुई हैं। नियमों की अनदेखी और रद्द चेक के दुरुपयोग के आरोप हैं।
हरियाणा में भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई
हरियाणा में भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई
हरियाणा में सरकारी सिस्टम के भीतर चल रही एक बड़ी वित्तीय साजिश का पर्दाफाश हुआ है। करोड़ों रुपये के खेल में शामिल आरोपों के बीच सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड (HSAMB) के वित्त एवं लेखा नियंत्रक राजेश सांगवान को बर्खास्त कर दिया है। 590 करोड़ रुपये के IDFC फर्स्ट बैंक घोटाले से जुड़े इस मामले में 10 करोड़ रुपये की संदिग्ध ट्रांजैक्शन सामने आने के बाद जांच एजेंसियां सक्रिय हो गईं और अब कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

10 करोड़ की फर्जी ट्रांजैक्शन

सरकारी आदेश के मुताबिक 14 जनवरी 2026 को 10 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी की गई। इसमें 9.75 करोड़ रुपये SRR Planning Gurus Pvt Ltd और 25 लाख रुपये Mannat Contractors को RTGS के माध्यम से भेजे गए। इस पूरे मामले की जांच राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (SV&ACB) ने 23 फरवरी को FIR दर्ज कर शुरू की जबकि 8 अप्रैल को CBI भी जांच में शामिल हो गई।

बिना जांच के खाता खुलवाया, नियमों की अनदेखी

जांच में सामने आया कि HSAMB का IDFC फर्स्ट बैंक में खाता जुलाई 2025 में खोला गया था। 2 जुलाई को प्रस्ताव रखा गया, 7 जुलाई को फॉर्म भरा गया और 10 जुलाई को खाता चालू हो गया। आरोप है कि राजेश सांगवान ने बिना उचित जांच (ड्यू डिलिजेंस) और बिना अन्य बैंकों से दरों की तुलना किए इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

मुख्य आरोपी से संपर्क और रिश्वत लेने के आरोप

रिपोर्ट के अनुसार, इस घोटाले का मास्टरमाइंड रिभव ऋषि बताया जा रहा है, जो उस समय बैंक का ब्रांच मैनेजर था। कॉल डिटेल रिकॉर्ड से यह भी सामने आया कि सांगवान लगातार मुख्य आरोपियों के संपर्क में थे। सह-आरोपियों के बयानों में यह भी कहा गया है कि उन्हें इस मामले में अवैध रूप से बड़ी रकम दी गई थी।

गंभीर लापरवाही: रद्द चेक का दुरुपयोग, चेकबुक भी बाहर गई

आदेश में यह भी बताया गया कि सांगवान ने रद्द किए गए चेक (चेक नंबर 6) की निगरानी नहीं की, जिसका बाद में दुरुपयोग हुआ। साथ ही उन्होंने चेकबुक को एक बाहरी व्यक्ति (रिभव ऋषि) को सौंप दिया और उसकी वापसी सुनिश्चित नहीं की। बैंक स्टेटमेंट में गड़बड़ी 6 फरवरी 2026 को सामने आने के बावजूद उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।

बिना विभागीय जांच के बर्खास्तगी

सरकार ने इस मामले को संगठित साजिश मानते हुए और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका के चलते संविधान के अनुच्छेद 311(2)(b) के तहत बिना विभागीय जांच के ही सांगवान को 30 अप्रैल 2026 को बर्खास्त कर दिया।

अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई

इस मामले में पहले भी 23 अप्रैल को विकास एवं पंचायत विभाग के अधीक्षक नरेश कुमार को 6.55 करोड़ रुपये और एक लग्जरी कार लेने के आरोप में बर्खास्त किया गया था। वहीं शिक्षा विभाग के मुख्य लेखा अधिकारी रणधीर सिंह को 54 करोड़ रुपये के घोटाले में शामिल होने के आरोप में हटाया गया।
Tags:
  • HSAMB fraud Haryana
  • 10 crore fraud India
  • IDFC First Bank scam India
  • Haryana corruption case 2026
  • financial scam government India
  • finance controller dismissed Haryana
  • CBI investigation fraud India
  • cheque fraud case India
  • government fund siphoning case