Natural Farming: पंचायत की जमीन पर होगी प्राकृतिक खेती! हरियाणा सरकार ला रही नई नीति, कहा-किसानों को मिलेंगे कई लाभ
Preeti Nahar | Jun 08, 2026, 09:51 IST
हरियाणा सरकार पंचायत की जमीन पर प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए नई नीति लाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत पंचायत और कृषि विभाग की जमीन पर लंबे समय के लिए प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को मौका मिलेगा। साथ ही प्रति एकड़ आर्थिक सहायता, बाजार की सुविधा, प्रमाणन और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं भी दी जाएंगी।
पंचायत भूमि पर खेती के लिए आएगी नई पॉलिसी
रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर बढ़ती निर्भरता के बीच हरियाणा सरकार अब खेती को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार पंचायत की जमीन पर प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए नई नीति तैयार करने जा रही है।
सरकार का मानना है कि इससे किसानों की लागत घटेगी, मिट्टी की सेहत सुधरेगी और उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य उत्पाद मिल सकेंगे। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को आर्थिक और तकनीकी सहायता देने की भी योजना है।
मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini ने घोषणा की है कि राज्य सरकार अगले वर्ष पंचायत की जमीन पर प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष नीति तैयार करेगी। इस नीति का उद्देश्य गाँव स्तर पर रसायन-मुक्त खेती का दायरा बढ़ाना और किसानों को नई आय के अवसर उपलब्ध कराना है।
सरकार ने यह भी घोषणा की है कि कृषि विभाग की लगभग 800 एकड़ जमीन केवल उन किसानों को पट्टे पर दी जाएगी जो कम से कम 10 वर्षों तक प्राकृतिक या जैविक खेती करने के लिए तैयार होंगे। इससे प्राकृतिक खेती के बड़े मॉडल विकसित करने में मदद मिलेगी।
सरकार ने कहा है कि APEDA प्रमाणित प्राकृतिक और जैविक किसानों को 10,000 रुपये प्रति एकड़ प्रतिवर्ष की सहायता पांच वर्षों तक दी जाएगी। इसके अलावा प्रमाणन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए राज्य बीज प्रमाणीकरण एजेंसी को भी अधिकृत किया जाएगा।
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से कुरुक्षेत्र जिले में 2,000 एकड़ का प्राकृतिक खेती क्लस्टर विकसित किया जाएगा। यह परियोजना "स्मार्ट एग्रीकल्चर" पहल के तहत चलाई जाएगी। खास बात यह है कि यदि किसानों को किसी प्रकार का नुकसान होता है तो सरकार उसकी भरपाई करने का आश्वासन भी दे रही है।
प्राकृतिक और जैविक उत्पादों को बेहतर बाजार दिलाने के लिए पंचकूला, करनाल, सोनीपत, रोहतक, गुरुग्राम, हिसार और अन्य मंडियों में विशेष बिक्री स्थान उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही परीक्षण प्रयोगशालाएं और APEDA मान्यता प्राप्त प्रमाणन केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे।
राज्य में कुरुक्षेत्र, जींद, सिरसा और करनाल में प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण केंद्र पहले से संचालित हैं। अब तक 12 हजार से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि हजारों सरपंचों को भी प्राकृतिक खेती के बारे में प्रशिक्षित किया गया है।
सरकार के अनुसार प्राकृतिक खेती योजना शुरू होने के बाद लगभग 2 लाख किसानों ने करीब 3 लाख एकड़ भूमि का पंजीकरण कराया है। इनमें से 23,930 किसानों की 44,077 एकड़ भूमि का सत्यापन भी हो चुका है। वर्ष 2025-26 में 20,727 एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की गई।
सरकार का मानना है कि इससे किसानों की लागत घटेगी, मिट्टी की सेहत सुधरेगी और उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य उत्पाद मिल सकेंगे। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को आर्थिक और तकनीकी सहायता देने की भी योजना है।