World Environment Day: हीट वेव बन रही मानवाधिकारों का संकट, सबसे ज्यादा ख़तरे में मजदूर, बुजुर्ग और कमजोर तबके

Preeti Nahar | Jun 04, 2026, 17:16 IST
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बढ़ती हीट वेव अब केवल मौसम की नहीं, बल्कि मानवाधिकार और आजीविका की भी बड़ी चुनौती बनती जा रही है। NHRC के अनुसार निर्माण श्रमिकों, दिहाड़ी मजदूरों, गिग वर्कर्स, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और अन्य कमजोर वर्गों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ रहा है। आयोग ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय क्षरण के बीच बढ़ती गर्मी से निपटने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।

बढ़ती गर्मी में पेड़ की छांव में आराम करते मजदूर
बढ़ती गर्मी में पेड़ की छांव में आराम करते मजदूर
देश के कई हिस्सों में लगातार बढ़ रही गर्मी और हीट वेव अब केवल मौसम से जुड़ी चुनौती नहीं रह गई है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) का मानना है कि यह समस्या अब लोगों के जीवन, स्वास्थ्य और आजीविका से सीधे जुड़ा मानवाधिकार का मुद्दा बन चुकी है। खासकर वे लोग जो खुले आसमान के नीचे काम करते हैं या जिनके पास गर्मी से बचने के पर्याप्त साधन नहीं हैं, सबसे अधिक जोखिम में हैं।

नई दिल्ली में आयोजित पर्यावरण एवं जलवायु कोर ग्रुप की बैठक में NHRC ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय क्षरण के कारण हीट वेव की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इसका सबसे ज्यादा असर निर्माण श्रमिकों, दिहाड़ी मजदूरों, गिग वर्कर्स, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर वर्गों पर पड़ रहा है।

मजदूरों की सेहत और कमाई दोनों पर असर

बैठक में बताया गया कि निर्माण स्थलों, सड़कों और खुले क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को सबसे ज्यादा गर्मी झेलनी पड़ती है। तापमान बढ़ने के साथ ही हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। कई बार अत्यधिक गर्मी के कारण काम के घंटे कम करने पड़ते हैं, जिससे मजदूरों की रोजाना की आय भी प्रभावित होती है।

NHRC के महासचिव भारत लाल
NHRC के महासचिव भारत लाल
NHRC के महासचिव भारत लाल ने कहा कि हीट वेव शहरी क्षेत्रों में तेजी से गंभीर चुनौती बन रही है और हाल के वर्षों में इससे होने वाली मौतों की संख्या भी चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक प्रभावित वही लोग हैं जिनकी आजीविका रोजाना काम पर निर्भर करती है।

पर्यावरणीय क्षरण से बढ़ रही समस्या

NHRC के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने कहा कि जलाशयों, नदियों और जंगलों का लगातार नुकसान बढ़ती गर्मी का प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि वर्षों से पर्यावरण को जो नुकसान पहुंचा है, उसे पूरी तरह वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन उसके प्रभाव को कम करने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।

NHRC के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन
NHRC के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन
उन्होंने चेतावनी दी कि अनियोजित शहरीकरण और कंक्रीट के बढ़ते विस्तार ने शहरों को और अधिक गर्म बना दिया है। ऐसे में प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और हरित क्षेत्रों का विस्तार जरूरी है।

बुजुर्ग, महिलाएं और कमजोर वर्ग भी जोखिम में

बैठक में बताया गया कि हीट वेव का असर केवल मजदूरों तक सीमित नहीं है। बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे और वे लोग जिनके पास पर्याप्त आवास या ठंडक की सुविधाएं नहीं हैं, भी गंभीर खतरे का सामना कर रहे हैं। गर्मी से जुड़ी बीमारियों का खतरा इन समूहों में अधिक होता है। बैठक में सुझाव दिया गया कि ऐसे संवेदनशील वर्गों के लिए सामुदायिक कूलिंग सेंटर, सार्वजनिक हरित क्षेत्र और विशेष सुरक्षा उपाय विकसित किए जाएं।

हीट वेव से निपटने के लिए क्या सुझाव दिए गए

बैठक में विशेषज्ञों ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

गर्मी में धूप से बचती महिलाएं
गर्मी में धूप से बचती महिलाएं
- इनमें हीट वेव से होने वाली मौतों और बीमारियों की बेहतर निगरानी, वार्ड स्तर पर हीट जोखिम मानचित्र तैयार करना, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को मजबूत करना और सभी राज्यों में हीट एक्शन प्लान को प्रभावी ढंग से लागू करना शामिल है।

- इसके अलावा शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ाने, जलाशयों के संरक्षण, कूल रूफ तकनीक को बढ़ावा देने, वर्षा जल संचयन और मजदूरों के लिए सुरक्षित कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

बैठक में दिए गए प्रमुख सुझाव

- अलग-अलग इलाकों में गर्मी का असर कितना है, इसकी पहचान के लिए आधुनिक तकनीक की मदद से हीट जोखिम मानचित्र तैयार किए जाएं।

- सभी राज्यों और शहरों में हीट एक्शन प्लान को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए और इसके लिए विशेष अधिकारियों की नियुक्ति की जाए।

- हीट वेव से होने वाली बीमारियों और मौतों का सही रिकॉर्ड रखने के लिए एक मजबूत और एकीकृत डेटा प्रणाली बनाई जाए।

- मजदूरों, प्रवासी श्रमिकों, गिग वर्कर्स, महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगों जैसे संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा के लिए विशेष कदम उठाए जाएं। इनके लिए कूलिंग सेंटर और हरित सार्वजनिक स्थान उपलब्ध कराए जाएं।

- अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए ताकि हीट स्ट्रोक और गर्मी से जुड़ी बीमारियों का समय पर इलाज हो सके।

- ऐसे भवन और बुनियादी ढांचे विकसित किए जाएं जो गर्मी का असर कम करें। कूल रूफ, हवादार डिजाइन और गर्मी रोकने वाली निर्माण सामग्री को बढ़ावा दिया जाए।

- पेड़-पौधे, शहरी वन, पार्क और जलाशयों की संख्या बढ़ाई जाए ताकि तापमान को नियंत्रित किया जा सके।

- वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और जल निकायों के संरक्षण को बढ़ावा देकर जल संसाधनों को सुरक्षित बनाया जाए।

- उद्योगों और इमारतों से निकलने वाली अतिरिक्त गर्मी को नियंत्रित करने के लिए नियमों को सख्ती से लागू किया जाए।

- लोगों को हीट वेव के खतरों और बचाव के उपायों के बारे में जागरूक किया जाए। इसके लिए स्थानीय भाषाओं में चेतावनी और सूचना प्रणाली विकसित की जाए।

- शहरों की विकास योजनाओं और बजट में हीट वेव से निपटने के उपायों को प्राथमिकता दी जाए और इसके लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराया जाए।

जीवन और आजीविका दोनों की चुनौती

हीट वेव अब केवल तापमान बढ़ने की समस्या नहीं है। यह लोगों के स्वास्थ्य, रोजगार और सम्मानजनक जीवन के अधिकार से जुड़ा मुद्दा बन चुकी है। NHRC का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा बोझ समाज के गरीब और कमजोर वर्गों को ही उठाना पड़ेगा।
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