अगले 6 दिन खेती के लिए अहम, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट; मछुआरों को सतर्क रहने की सलाह
Gaon Connection | Jul 25, 2026, 11:51 IST
जुलाई के आखिरी सप्ताह में देश के विभिन्न राज्यों में भारी बारिश का पूर्वानुमान है। मानसून पश्चिम, मध्य, उत्तर और पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय रहेगा। मौसम विभाग ने मछुआरों के लिए खतरे का संकेत देते हुए समुद्र में तेज हवाओं और ऊँची लहरों की चेतावनी जारी की है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों से अतिरिक्त पानी निकालें और कृषि कार्यों में सावधानी बरतें।
किसानों और मछुआरों के लिए अहम मौसम अपडेट
जुलाई का आखिरी सप्ताह खेती के लिहाज़ से बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि इस दौरान होने वाली बारिश कई फसलों की आगे की बढ़वार तय करती है। इस बार भी 25 से 30 जुलाई के बीच देश के कई हिस्सों में मानसून के सक्रिय रहने के संकेत हैं। पश्चिम, मध्य, उत्तर और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। मौसम विभाग ने समुद्र में तेज हवाओं और ऊँची लहरों को देखते हुए मछुआरों के लिए सतर्कता की सलाह दी है।
आईएमडी ने लोगों से मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की अपील की है। विभाग के अनुसार, जिन क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है, वहाँ निचले इलाकों में जलभराव, अचानक बाढ़ भूस्खलन और गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की घटनाएँ हो सकती हैं। ऐसे में अनावश्यक यात्रा करने से बचने, नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहन तथा स्थानिय प्रशासन और मौसम विभाग द्वारा जारी ताज़ा सलाह पर लगातार नजर रखने की जरूरत है।
आईएमडी के अनुसार गुजरात, सौराष्ट्र और कच्छ में 25 जुलाई के आसपास कहीं-कहीं अत्यधिक भारी वर्षा होने की संभावना है। इसके अलावा पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान, मध्य प्रदेश, गोवा और मध्य महाराष्ट्र के कई हिस्सों में 25 से 30 जुलाई के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। लगातार वर्षा वाले क्षेत्रों में खेतों में जलभराव की स्थिति बनने की आशंका है, इसलिए किसानों को खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था बनाए रखने की सलाह दी गई है।
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी कई स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बना रह सकता है, जबकि मैदानी क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की घटनाएँ भी हो सकती हैं।
आईएमडी की कृषि मौसम सलाह के अनुसार जिन क्षेत्रों में लगातार बारिश की संभावना है, वहाँ खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें। भारी बारिश के दौरान उर्वरक और कीटनाशकों का छिड़काव करने से बचने की सलाह दी गई है, क्योंकि इससे दवाओं का प्रभाव कम हो सकता है। वहीं जिन क्षेत्रों में सामान्य बारिश होगी, वहाँ यह मौसम धान, मक्का, सोयाबीन, कपास और दलहन जैसी खरीफ फसलों की बढ़वार के लिए अनुकूल माना जा रहा है।
मौसम विभाग ने अरब सागर और उससे लगे समुद्री क्षेत्रों में तेज हवाएँ चलने तथा समुद्र में प्रतिकूल परिस्थितियाँ बनने की आशंका जताई है। बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में भी समुद्र उग्र रह सकता है। विभाग ने मछुआरों को सलाह दी है कि चेतावनी अवधि के दौरान समुद्र में न जाएँ। जो मछुआरे पहले से समुद्र में हैं, उन्हें जल्द से जल्द सुरक्षित तट पर लौट आने की सलाह दी गई है।
मौसम विभाग का कहना है कि स्थानीय स्तर पर मौसम की स्थिति में बदलाव संभव है। ऐसे में किसानों को अपने जिले के मौसम पूर्वानुमान और कृषि मौसम सलाह के आधार पर ही सिंचाई, निराई-गुड़ाई, उर्वरक एवं कीटनाशकों के छिड़काव जैसे कृषि कार्य करने चाहिए। समय पर मौसम की जानकारी लेकर किए गए निर्णय फसलों को संभावित नुकसान से बचाने में मददगार साबित हो सकते हैं।
आईएमडी ने लोगों से मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की अपील की है। विभाग के अनुसार, जिन क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है, वहाँ निचले इलाकों में जलभराव, अचानक बाढ़ भूस्खलन और गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की घटनाएँ हो सकती हैं। ऐसे में अनावश्यक यात्रा करने से बचने, नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहन तथा स्थानिय प्रशासन और मौसम विभाग द्वारा जारी ताज़ा सलाह पर लगातार नजर रखने की जरूरत है।
पश्चिम और मध्य भारत में भारी बारिश के आसार
उत्तर और पूर्वोत्तर भारत में भी रहेगा बारिश का असर
किसानों के लिए मौसम के साथ सावधानी भी जरूरी
मछुआरों के लिए जारी हुई चेतावनी
मौसम विभाग का कहना है कि स्थानीय स्तर पर मौसम की स्थिति में बदलाव संभव है। ऐसे में किसानों को अपने जिले के मौसम पूर्वानुमान और कृषि मौसम सलाह के आधार पर ही सिंचाई, निराई-गुड़ाई, उर्वरक एवं कीटनाशकों के छिड़काव जैसे कृषि कार्य करने चाहिए। समय पर मौसम की जानकारी लेकर किए गए निर्णय फसलों को संभावित नुकसान से बचाने में मददगार साबित हो सकते हैं।