Rain Alert: पहाड़ों में बारिश और ओलावृष्टि, किसानों को फसलों की सुरक्षा के लिए सतर्क रहने की सलाह
Gaon Connection | Mar 14, 2026, 19:07 IST
शिमला में मौसम विभाग ने गंभीर चेतावनी दी है, खासकर पर्वत क्षेत्रों के लिए। ऊना, हमीरपुर, चोंबा, और कांगड़ा के निवासियों को गरज के साथ बारिश, ओले और तेज हवाओं का सामना करना पड़ सकता है। किसानों से अनुरोध है कि वे अपनी फसलों और पशुधन की अच्छी देखभाल करें।
पहाड़ों में बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट
India Meteorological Department (IMD) के शिमला केंद्र ने पहाड़ी इलाकों में मौसम को लेकर चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में ऊना, हमीरपुर, चोंबा, कांगड़ा में अलग-अलग जगहों पर गरज के साथ बारिश, ओले, बिजली गिरने के साथ 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। ऐसे मौसम में किसानों को अपनी फसलों और पशुधन की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
मौसम विभाग के अनुसार जिन क्षेत्रों में गेहूं की फसल बूटिंग अवस्था में है, वहाँ बारिश या तूफानी मौसम के दौरान सिंचाई और रासायनिक छिड़काव नहीं करना चाहिए। साथ ही खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था भी बनाए रखें ताकि फसल को नुकसान न हो।
प्याज और लहसुन की फसल में नमी अधिक होने से फफूंद और अन्य रोगों का खतरा बढ़ सकता है। किसानों को खेतों में मिट्टी चढ़ाने और खरपतवार हटाने की सलाह दी गई है। वहीं मूली, शलगम और गाजर जैसी जड़ वाली सब्जियों में इंटरक्रॉपिंग के तौर पर मेथी, पालक, धनिया, मटर और ब्रोकोली की खेती की जा सकती है।
मटर की फसल में इस समय फूल आने का चरण चल रहा है। ऐसे में तेज हवा से पौधों के गिरने की संभावना रहती है, इसलिए पौधों को सहारा देने की सलाह दी गई है। सरसों की फसल में भी फूल आने का समय है। बारिश के दौरान कीटनाशकों का छिड़काव करने से बचने और खेतों में जल निकासी का ध्यान रखने को कहा गया है।
आलू की फसल में लेट ब्लाइट रोग का खतरा रहता है, इसलिए लगातार निगरानी रखने की जरूरत है। अगर इसके लक्षण दिखाई दें तो साफ मौसम में उचित फफूंदनाशक का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
- फूलगोभी और पत्तागोभी जैसी कोल फसलों में भी नमी के कारण रोग बढ़ सकते हैं, इसलिए खेतों में पानी जमा न होने दें और पौधों की नियमित जाँच करें।
- पॉलीहाउस और मशरूम उत्पादन में सावधानी
- पॉलीहाउस में उगाई जा रही सब्जियों में तापमान और नमी का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। फफूंद रोगों की रोकथाम के लिए नियमित निगरानी करें।
- मशरूम उत्पादन करने वाले किसानों को अच्छी वेंटिलेशन रखने और तापमान लगभग 17–18 डिग्री सेल्सियस के आसपास बनाए रखने की सलाह दी गई है।
फूलों की खेती करने वाले किसानों को तेज हवाओं से बचाव के लिए छोटे पौधों को सहारा देने और खेतों की नियमित सफाई रखने की सलाह दी गई है। इससे पौधों को नुकसान कम होगा।
मौसम विभाग ने पशुपालकों को भी सावधान रहने की सलाह दी है। ठंडी हवाओं और बारिश के दौरान पशुओं को खुले में न रखें और उन्हें सूखी व साफ जगह पर रखें। पशुओं के लिए संतुलित आहार और साफ पानी की व्यवस्था भी जरूरी है।
मधुमक्खी पालन करने वाले किसानों को छत्तों को तेज हवाओं और बारिश से बचाने के लिए सुरक्षित स्थान पर रखने की सलाह दी गई है।
मछली पालन करने वाले किसानों को तालाबों में पानी की गुणवत्ता बनाए रखने और जरूरत के अनुसार चूना व अन्य प्रबंधन उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।
मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में बदलते मौसम को देखते हुए किसान समय पर जरूरी सावधानियां अपनाएं। इससे फसलों और पशुधन को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
गेहूं की फसल में सिंचाई और स्प्रे से बचें
सब्जियों में रोगों की निगरानी जरूरी
दलहनी और तिलहनी फसलों में सावधानी
आलू और कोल फसलों पर रखें नजर
- फूलगोभी और पत्तागोभी जैसी कोल फसलों में भी नमी के कारण रोग बढ़ सकते हैं, इसलिए खेतों में पानी जमा न होने दें और पौधों की नियमित जाँच करें।
- पॉलीहाउस और मशरूम उत्पादन में सावधानी
- पॉलीहाउस में उगाई जा रही सब्जियों में तापमान और नमी का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। फफूंद रोगों की रोकथाम के लिए नियमित निगरानी करें।
- मशरूम उत्पादन करने वाले किसानों को अच्छी वेंटिलेशन रखने और तापमान लगभग 17–18 डिग्री सेल्सियस के आसपास बनाए रखने की सलाह दी गई है।
फूलों की खेती में पौधों को सहारा दें
पशुपालन और मधुमक्खी पालन में भी सतर्कता
मधुमक्खी पालन करने वाले किसानों को छत्तों को तेज हवाओं और बारिश से बचाने के लिए सुरक्षित स्थान पर रखने की सलाह दी गई है।
मछली पालन में भी सावधानी
मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में बदलते मौसम को देखते हुए किसान समय पर जरूरी सावधानियां अपनाएं। इससे फसलों और पशुधन को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।