PMFBY: आलू-टमाटर समेत इन फसलों का बीमा 15 अगस्त तक, जानिए कितना देना होगा प्रीमियम
Mansi | Aug 07, 2026, 16:26 IST
हिमाचल प्रदेश में खरीफ़ सीज़न के लिए फसल बीमा पोर्टल शुरू हो गया है। किसान 15 अगस्त 2026 तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ उठा सकते हैं। धान और मक्का का बीमा केवल दो प्रतिशत प्रीमियम पर उपलब्ध कराया गया है। टमाटर और आलू की फसलों को भी मौसम आधारित बीमा योजना में शामिल किया गया है। यह योजना किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगी।
हिमाचल के किसान 15 अगस्त तक फसल बीमा कराकर फसल नुकसान से सुरक्षा पा सकते हैं
खरीफ़ सीज़न में प्राकृतिक आपदाओं से फसल को होने वाले नुकसान से बचाव के लिए हिमाचल प्रदेश के किसानों के लिए राहत की ख़बर है। राज्य में फसल बीमा पोर्टल शुरू हो गया है, जिसके बाद किसान 15 अगस्त 2026 तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत अपनी अधिसूचित फसलों का बीमा करा सकते हैं।
राज्य सरकार के अनुसार, पोर्टल शुरू होने से उन किसानों को बड़ी राहत मिलेगी, जो पिछले कुछ समय से पंजीकरण शुरू होने का इंतज़ार कर रहे थे। समय रहते बीमा कराने पर सूखा, बाढ़, भूस्खलन, ओलावृष्टि और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की स्थिति में आर्थिक सहायता मिलने का प्रावधान है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ़ मौसम में धान और मक्का की फसल को शामिल किया गया है। दोनों फसलों के लिए 60,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की बीमित राशि निर्धारित की गई है। किसानों को बीमित राशि का केवल 2 % प्रीमियम देना होगा। यानी प्रति हेक्टेयर लगभग 1,200 रुपये और प्रति बीघा क़रीब 98 रुपये का प्रीमियम देना पड़ेगा। शेष राशि केंद्र और राज्य सरकार वहन करेंगी।
पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत टमाटर और आलू की फसलों को भी शामिल किया गया है। टमाटर के लिए 2 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की बीमित राशि पर लगभग 800 रुपये प्रति बीघा प्रीमियम निर्धारित किया गया है, जबकि आलू के लिए 1.5 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की बीमित राशि पर 600 रुपये प्रति बीघा प्रीमियम देना होगा।
योजना के तहत सूखा, बाढ़, सैलाब, प्राकृतिक आग, भूमि कटाव, जलभराव, ओलावृष्टि, भूस्खलन और अन्य स्थानीय प्राकृतिक आपदाओं से फसल को हुए नुकसान पर दावा किया जा सकता है। फसल कटाई के बाद निर्धारित अवधि के भीतर यदि प्राकृतिक कारणों से उपज को नुकसान होता है, तो उस स्थिति में भी मुआवज़े का प्रावधान किया गया है।
ग़ैर-ऋणी किसान राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल, संबंधित बैंक, लोक मित्र केंद्र (CSC), सहकारी बैंक और अन्य अधिकृत वित्तीय संस्थानों के माध्यम से फसल बीमा करा सकते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि अंतिम तारीख़ का इंतज़ार करने के बजाय किसान समय रहते आवेदन पूरा कर लें, ताकि तकनीकी या दस्तावेज़ संबंधी दिक्कतों से बचा जा सके। निर्धारित प्रावधानों के अनुसार ऋणी किसानों की अधिसूचित फसलों का बीमा संबंधित प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। यदि कोई ऋणी किसान बीमा नहीं कराना चाहता है, तो उसे निर्धारित समय के भीतर अपने बैंक में आवश्यक घोषणा-पत्र जमा करना होगा।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरुआत 13 जनवरी 2016 को किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान के आर्थिक जोखिम से सुरक्षा देने के उद्देश्य से की गई थी। योजना के तहत खरीफ़ फसलों पर किसान का प्रीमियम हिस्सा 2 प्रतिशत, रबी फसलों पर 1.5 % और व्यावसायिक एवं बागवानी फसलों पर 5 % रखा गया है। शेष प्रीमियम का भुगतान केंद्र और राज्य सरकारें करती हैं। बदलते मौसम और लगातार बढ़ रही प्राकृतिक आपदाओं के बीच फसल बीमा किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनता जा रहा है। फसल खराब होने की स्थिति में मिलने वाली आर्थिक सहायता से किसान दोबारा खेती शुरू कर सकते हैं, जिससे उनकी आय और खेती की निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलती है।
राज्य सरकार के अनुसार, पोर्टल शुरू होने से उन किसानों को बड़ी राहत मिलेगी, जो पिछले कुछ समय से पंजीकरण शुरू होने का इंतज़ार कर रहे थे। समय रहते बीमा कराने पर सूखा, बाढ़, भूस्खलन, ओलावृष्टि और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की स्थिति में आर्थिक सहायता मिलने का प्रावधान है।