एक साल में विकसित कीं 386 नई फसल किस्में, जलवायुअनुकूल खेती पर रहा फोकस, स्थापना दिवस पर ICAR ने गिनाईं उपलब्धियाँ

Gaon Connection | Jul 16, 2026, 17:35 IST
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आईसीएआर ने अपने 98वें स्थापना दिवस पर बताया कि पिछले एक वर्ष में 44 फसलों की 386 उन्नत किस्में विकसित की गईं, जिनमें 94% जलवायु-अनुकूल और 29 बायोफोर्टिफाइड किस्में शामिल हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसान कृषि की आत्मा और वैज्ञानिक उसका मस्तिष्क हैं। समारोह में 43 नई फसल किस्मों, 17 कृषि तकनीकों और 14 प्रकाशनों का विमोचन हुआ। साथ ही 72 एमओयू पर हस्ताक्षर कर कृषि तकनीकों के प्रसार को गति देने की पहल की गई।

किसान कृषि की आत्मा, वैज्ञानिक उसका मस्तिष्क: शिवराज
किसान कृषि की आत्मा, वैज्ञानिक उसका मस्तिष्क: शिवराज
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने पिछले एक वर्ष में 44 फसलों की 386 नई और उन्नत किस्में विकसित की हैं। इनमें 94 प्रतिशत किस्में जलवायु-अनुकूल हैं, जबकि 29 किस्में जैव-सुदृढ़ीकृत (बायोफोर्टिफाइड) हैं। यह जानकारी केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को आईसीएआर के 98वें स्थापना दिवस समारोह में दी। उन्होंने कहा कि आईसीएआर भारत के कृषि परिवर्तन का अग्रदूत है और इसके वैज्ञानिकों के शोध व नवाचारों ने देश को खाद्यान्न, बागवानी, दुग्ध और मत्स्य उत्पादन में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।

नई दिल्ली में आयोजित स्थापना दिवस समारोह में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि "किसान कृषि की आत्मा हैं, जबकि वैज्ञानिक उसका मस्तिष्क हैं।" उन्होंने जलवायु-अनुकूल खेती, मांग आधारित अनुसंधान, दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता, गुणवत्तापूर्ण कृषि शिक्षा, कृषि तकनीकों के व्यावसायीकरण और कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के जरिए नई तकनीकों को तेजी से किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया। समारोह में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह, प्रो. एस. पी. सिंह बघेल, भागीरथ चौधरी, रामनाथ ठाकुर, नीति आयोग के सदस्य के. वी. राजू, मत्स्य पालन विभाग के सचिव नरेश पाल गंगवार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी और कृषि वैज्ञानिक मौजूद रहे।

एक साल में 1.70 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक मूल्य, करोड़ों किसानों तक पहुंचीं नई तकनीकें

स्थापना दिवस समारोह में कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव और आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने वर्ष 2025-26 की उपलब्धियां पेश करते हुए बताया कि फसलों, बागवानी, पशुधन और मत्स्य क्षेत्र में उत्पादन बढ़ने से करीब 1.70 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक मूल्य सृजित हुआ। इसमें कृषि अनुसंधान का अनुमानित योगदान 55 हजार करोड़ रुपये रहा।

उन्होंने बताया कि आईसीएआर की विकसित तकनीकें सीधे करीब एक करोड़ किसानों तक पहुंचीं, जबकि मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए पांच करोड़ से अधिक किसानों तक इनका प्रसार हुआ। इसी दौरान 18 अंतरराष्ट्रीय समझौता ज्ञापनों (एमओयू) के जरिए वैश्विक सहयोग को भी मजबूती मिली। डॉ. जाट ने कहा कि आईसीएआर विज्ञान आधारित और मांग आधारित कृषि अनुसंधान के जरिए विकसित भारत 2047 और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

नई फसल किस्मों और तकनीकों का विमोचन, 72 एमओयू से किसानों तक पहुंचेगी तकनीक

स्थापना दिवस समारोह में 43 नई फसल किस्मों, 17 कृषि प्रौद्योगिकियों और 14 प्रकाशनों का विमोचन किया गया। इनमें बासमती और लवणीय-क्षारीय मिट्टी के लिए जलवायु-अनुकूल धान की किस्में, निर्यातोन्मुख आम उत्पादन तकनीक, भारत का पहला स्वदेशी अफ्रीकी स्वाइन फीवर टीका, डिजिटल स्वाइन रोग एटलस और छोटे किसानों के लिए कम लागत वाला कसावा हार्वेस्टर जैसी तकनीकें शामिल हैं।

तकनीकों को तेजी से किसानों तक पहुंचाने के उद्देश्य से आईसीएआर ने 51 उद्योग साझेदारों के साथ 72 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इसके अलावा परिषद ने 150 अस्थायी दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र देकर उनकी सेवाओं का नियमितीकरण भी किया। समारोह में कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति, वैज्ञानिक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, किसान संगठनों के सदस्य, छात्र-छात्राएं और अन्य हितधारक भी शामिल हुए। आईसीएआर ने कहा कि वह रणनीतिक साझेदारियों, अत्याधुनिक अनुसंधान और किसान-केंद्रित तकनीकों के जरिए जलवायु-अनुकूल और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार काम करता रहेगा।
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