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IMD Alert: उत्तर भारत को कब मिलेगी ठंड से राहत?

Gaon Connection | Jan 17, 2026, 15:34 IST
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भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार अगले एक सप्ताह तक उत्तर-पश्चिम भारत में शीतलहर की संभावना कम है, लेकिन अगले 4–5 दिनों तक घना कोहरा छाया रह सकता है।
शीतलहर से राहत, लेकिन कोहरा और पश्चिमी विक्षोभ बनाएंगे मौसम की चुनौती।
उत्तर भारत में बीते कई दिनों से जारी कड़ाके की ठंड के बीच मौसम विभाग ने राहत भरी जानकारी दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार अगले एक सप्ताह के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत में शीतलहर की स्थिति बनने की संभावना कम है। हालांकि इसके साथ ही घना कोहरा, बार-बार आने वाले पश्चिमी विक्षोभ और पहाड़ी इलाकों में बारिश-बर्फबारी के कारण मौसम पूरी तरह स्थिर नहीं रहेगा। इसका असर जनजीवन, यातायात और खेती पर बना रह सकता है।

बीते 24 घंटों में पंजाब के अधिकांश हिस्सों में घना से बहुत घना कोहरा छाया रहा, जहां कई जगह दृश्यता 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई। अमृतसर और अंबाला जैसे शहरों में दृश्यता शून्य तक पहुंची। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आगरा, अलीगढ़, बरेली, मुरादाबाद, सरसावा और हिंडन जैसे इलाकों में भी बेहद कम दृश्यता दर्ज की गई। हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में भी घना कोहरा देखा गया। मौसम विभाग के अनुसार अगले 4-5 दिनों तक उत्तर-पश्चिम भारत और बिहार में सुबह व रात के समय घना कोहरा बना रह सकता है, जिससे सड़क, रेल और हवाई यातायात प्रभावित होने की आशंका है।

ठंड अभी भी असर में, कई राज्यों में तापमान सामान्य से नीचे

हालांकि शीतलहर की संभावना घट रही है, लेकिन ठंड का असर अभी भी बना हुआ है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और आसपास के पहाड़ी इलाकों में कई जगह न्यूनतम तापमान 0 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया है। हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तरी राजस्थान में कई स्थानों पर तापमान 1 से 5 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और बिहार में न्यूनतम तापमान सामान्य से 3 से 6 डिग्री कम रिकॉर्ड किया गया। देश के मैदानी इलाकों में सबसे कम न्यूनतम तापमान 3.0°C नारनौल (हरियाणा) में दर्ज हुआ।

IMD के अनुसार पूर्वी उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा में अलग-अलग स्थानों पर शीतलहर की स्थिति बनी हुई है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में शीत दिवस दर्ज किया गया है। इसका मतलब है कि दिन के समय भी तापमान सामान्य से नीचे रह रहा है और ठंड का अहसास लगातार बना हुआ है।

ठंड कुछ कम, पर कोहरा और बारिश बढ़ाएंगे मुश्किल।
ठंड कुछ कम, पर कोहरा और बारिश बढ़ाएंगे मुश्किल।


मौसम विभाग ने बताया है कि मौजूदा पश्चिमी विक्षोभ 18 जनवरी तक पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित करता रहेगा। इसके बाद 19 और 21 जनवरी को दो नए पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत में प्रवेश कर सकते हैं। इसके प्रभाव से 17 से 22 जनवरी के बीच जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी की संभावना है। 23 जनवरी को इन इलाकों में व्यापक स्तर पर बारिश-बर्फबारी और कुछ जगहों पर भारी वर्षा भी हो सकती है। उत्तराखंड में भी 17–18 जनवरी और फिर 21–23 जनवरी के दौरान बारिश और बर्फबारी के आसार हैं।

IMD के अनुसार 22 और 23 जनवरी को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि 23 जनवरी को पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तरी राजस्थान में भी बारिश के आसार हैं। इससे तापमान में उतार-चढ़ाव और कोहरे की स्थिति और प्रभावित हो सकती है।

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मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो दिनों में उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में न्यूनतम तापमान में लगभग 2 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके बाद तीन दिनों तक तापमान लगभग स्थिर रहेगा और फिर अगले दो दिनों में 3–5 डिग्री सेल्सियस तक की और बढ़ोतरी संभव है। पूर्वी भारत में भी अगले चार दिनों में धीरे-धीरे तापमान बढ़ने के संकेत हैं।

घने कोहरे के कारण सांस संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। अस्थमा और ब्रोंकाइटिस से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। बहुत घने कोहरे वाले इलाकों में बिजली लाइनों पर नमी जमने से आपूर्ति बाधित होने का खतरा भी रहता है। मौसम विभाग ने वाहन चलाते समय फॉग लाइट का इस्तेमाल करने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।

IMD ने किसानों को सलाह दी है कि जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा, पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में फसलों को ठंड से बचाने के लिए शाम के समय हल्की और बार-बार सिंचाई, मल्चिंग और नर्सरी को पॉलीथीन शीट से ढकने जैसे उपाय अपनाएं। पशुपालकों को मवेशियों को रात में शेड के अंदर रखने और पोल्ट्री शेड में अतिरिक्त गर्मी की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है।

कुल मिलाकर, 17 जनवरी का IMD अलर्ट बताता है कि भले ही शीतलहर की तीव्रता कुछ कम हो रही हो, लेकिन घना कोहरा, पश्चिमी विक्षोभ और पहाड़ी इलाकों में बारिश-बर्फबारी के कारण मौसम की चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है। ऐसे में आम लोगों, किसानों और यात्रियों को मौसम अपडेट पर लगातार नज़र रखना और सावधानी बरतना बेहद ज़रूरी है।

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