भारत-चीन चावल कारोबार पर लगा विराम, चीन ने 7 भारतीय निर्यातकों का रजिस्ट्रेशन किया रद्द
Gaon Connection | Aug 12, 2026, 12:14 IST
चीन ने जीएमओ के आरोप में सात भारतीय चावल निर्यातकों का पंजीकरण रद्द कर दिया है। इससे भारत और चीन के बीच चावल का पूरा व्यापार रुक गया है। चीन ने भारतीय चावल की कई खेपों को जीएमओ की मौजूदगी का आरोप लगाकर खारिज कर दिया है। भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में जीएम चावल की व्यावसायिक खेती नहीं होती है।
चीन के कदम से भारतीय कारोबारियों की चिंता बढ़ी
भारत और चीन के बीच चावल का कारोबार पूरी तरह ठप हो गया है। चीन के सीमा शुल्क प्रशासन (GACC) ने भारतीय चावल निर्यात करने वाली सात कंपनियों का पंजीकरण रद्द कर दिया है। चीन ने इन कंपनियों से आने वाली चावल की खेप में आनुवंशिक रूप से संशोधित जीव (जीएमओ) पाए जाने का आरोप लगाया है। इससे पहले इसी साल तीन भारतीय निर्यातकों को निलंबित किया गया था, जबकि अब उनका पंजीकरण भी रद्द कर दिया गया है। जिन कंपनियों पर कार्रवाई हुई है, वे छत्तीसगढ़, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में स्थित हैं। भारतीय अधिकारियों, कारोबारियों और निर्यातकों ने चीन के इस कदम पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि भारत में जीएम चावल की व्यावसायिक खेती नहीं होती है। इसके बावजूद चीन की ओर से भारतीय गैर-बासमती चावल की कम से कम 70 खेपों को मई के अंत तक जीएमओ की मौजूदगी का आरोप लगाकर खारिज किया जा चुका है।
भारत की ओर से चीन को यह स्पष्ट किया जा चुका है कि देश में कोई भी जीएम फसल व्यावसायिक रूप से नहीं उगाई जाती है। इसके बावजूद चावल की खेपों को खारिज करने और निर्यातकों का पंजीकरण रद्द करने की कार्रवाई जारी है। निर्यातकों का कहना है कि चीन की अपनी एजेंसी भारत से रवाना होने से पहले खेपों की जांच और मंजूरी देती है, ऐसे में चीन पहुंचने के बाद उसी खेप में जीएमओ मिलने का दावा कई सवाल खड़े करता है। कारोबारियों का कहना है कि चीन के लिए चावल भेजने में माल ढुलाई पर ही लागत का बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता है, इसलिए ऐसी स्थिति में निर्यात का जोखिम बढ़ गया है। इस घटनाक्रम से भारतीय चावल उद्योग में चिंता बढ़ी है कि चीन की ओर से बनाया जा रहा जीएमओ संबंधी नैरेटिव आगे चलकर पश्चिमी देशों, खासकर यूरोपीय संघ, में भारतीय बासमती और गैर-बासमती चावल के निर्यात को प्रभावित कर सकता है।
चीन के GACC ने सात भारतीय चावल निर्यातकों के पंजीकरण रद्द किए हैं। इससे पहले तीन कंपनियों को निलंबित किया गया था। बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, निर्यातकों का कहना है कि चीन की यह कार्रवाई व्यावहारिक रूप से उनके लिए चीन को चावल निर्यात करने पर रोक के समान है। संबंधित कंपनियां छत्तीसगढ़, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में स्थित हैं।
बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के अध्यक्ष अभिषेक देव को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। संगठन ने चीन के GACC के सामने मुद्दा उठाने का अनुरोध किया है।
एसोसिएशन के मुताबिक, विशाखापत्तनम बंदरगाह से चीन के शेकोउ बंदरगाह भेजी गई 520 टन स्वर्णा सफेद चावल की 100 प्रतिशत टूटी हुई खेप को हाल ही में जीएमओ की मौजूदगी के आरोप में खारिज कर दिया गया। संगठन ने कहा कि इस खेप की भारत में रवाना होने से पहले जांच की गई थी। एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश जैन ने कहा कि भारत में जीएम चावल को मंजूरी नहीं मिली है और देश में जीएम चावल की व्यावसायिक खेती भी नहीं होती है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब भारत आगामी खरीफ मौसम से जीन-संपादित चावल की खेती शुरू करने की तैयारी कर रहा है। जीन-संपादित फसल और आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) फसल एक जैसी नहीं होतीं। जीएम फसल में आम तौर पर किसी बाहरी जीव का जीन डाला जाता है, जबकि जीन-संपादन में पौधे के मौजूदा जीन में लक्षित बदलाव किया जाता है।
मई के तीसरे सप्ताह में भारतीय अधिकारियों और चीन के GACC अधिकारियों के बीच बातचीत भी हुई थी। हालांकि, भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, चीन की ओर से भारतीय चावल की खेपों को खारिज करने के लिए इस्तेमाल की जा रही जांच पद्धति के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। इससे निर्यातकों की चिंता और बढ़ गई है।
चीन की कार्रवाई से भारत के चावल निर्यात पर व्यापक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। कारोबारियों का कहना है कि चीन में मांग पूरी हो जाने के बाद वहां से भारतीय चावल की खेपों को लेकर सख्ती बढ़ी है। कुछ कारोबारी इसे भारत के खिलाफ एक व्यापक व्यापारिक नैरेटिव तैयार करने की कोशिश के तौर पर भी देख रहे हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने बासमती और गैर-बासमती सहित कुल 21.56 मिलियन टन चावल का निर्यात किया, जिसकी कीमत 11.53 अरब डॉलर रही। इसी अवधि में वैश्विक चावल कारोबार का अनुमान करीब 59.8 मिलियन टन था। चालू वित्त वर्ष में अप्रैल और मई के दौरान भारत ने 4 मिलियन टन से अधिक चावल का निर्यात किया, जिसका मूल्य करीब 2.03 अरब डॉलर रहा। निर्यातकों का कहना है कि सरकार को चीन की ओर से लगाए जा रहे जीएमओ संबंधी आरोपों का स्पष्ट और प्रभावी तरीके से जवाब देना चाहिए, ताकि भारतीय चावल की वैश्विक बाजार में छवि पर प्रतिकूल असर न पड़े।
भारत की ओर से चीन को यह स्पष्ट किया जा चुका है कि देश में कोई भी जीएम फसल व्यावसायिक रूप से नहीं उगाई जाती है। इसके बावजूद चावल की खेपों को खारिज करने और निर्यातकों का पंजीकरण रद्द करने की कार्रवाई जारी है। निर्यातकों का कहना है कि चीन की अपनी एजेंसी भारत से रवाना होने से पहले खेपों की जांच और मंजूरी देती है, ऐसे में चीन पहुंचने के बाद उसी खेप में जीएमओ मिलने का दावा कई सवाल खड़े करता है। कारोबारियों का कहना है कि चीन के लिए चावल भेजने में माल ढुलाई पर ही लागत का बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता है, इसलिए ऐसी स्थिति में निर्यात का जोखिम बढ़ गया है। इस घटनाक्रम से भारतीय चावल उद्योग में चिंता बढ़ी है कि चीन की ओर से बनाया जा रहा जीएमओ संबंधी नैरेटिव आगे चलकर पश्चिमी देशों, खासकर यूरोपीय संघ, में भारतीय बासमती और गैर-बासमती चावल के निर्यात को प्रभावित कर सकता है।
चीन ने 7 निर्यातकों का पंजीकरण रद्द किया
520 टन चावल की खेप भी हुई खारिज
एसोसिएशन के मुताबिक, विशाखापत्तनम बंदरगाह से चीन के शेकोउ बंदरगाह भेजी गई 520 टन स्वर्णा सफेद चावल की 100 प्रतिशत टूटी हुई खेप को हाल ही में जीएमओ की मौजूदगी के आरोप में खारिज कर दिया गया। संगठन ने कहा कि इस खेप की भारत में रवाना होने से पहले जांच की गई थी। एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश जैन ने कहा कि भारत में जीएम चावल को मंजूरी नहीं मिली है और देश में जीएम चावल की व्यावसायिक खेती भी नहीं होती है।
जीएमओ और जीन-संपादित चावल में अंतर
मई के तीसरे सप्ताह में भारतीय अधिकारियों और चीन के GACC अधिकारियों के बीच बातचीत भी हुई थी। हालांकि, भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, चीन की ओर से भारतीय चावल की खेपों को खारिज करने के लिए इस्तेमाल की जा रही जांच पद्धति के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। इससे निर्यातकों की चिंता और बढ़ गई है।
भारत का चावल निर्यात 11.53 अरब डॉलर
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने बासमती और गैर-बासमती सहित कुल 21.56 मिलियन टन चावल का निर्यात किया, जिसकी कीमत 11.53 अरब डॉलर रही। इसी अवधि में वैश्विक चावल कारोबार का अनुमान करीब 59.8 मिलियन टन था। चालू वित्त वर्ष में अप्रैल और मई के दौरान भारत ने 4 मिलियन टन से अधिक चावल का निर्यात किया, जिसका मूल्य करीब 2.03 अरब डॉलर रहा। निर्यातकों का कहना है कि सरकार को चीन की ओर से लगाए जा रहे जीएमओ संबंधी आरोपों का स्पष्ट और प्रभावी तरीके से जवाब देना चाहिए, ताकि भारतीय चावल की वैश्विक बाजार में छवि पर प्रतिकूल असर न पड़े।