रिकॉर्ड उत्पादन ने खोला रास्ता, भारत ने फिर शुरू किया गेहूं निर्यात, कांडला पोर्ट से UAE को पहली खेप रवाना

Gaon Connection | May 04, 2026, 12:44 IST
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चार साल बाद भारत ने गेहूं निर्यात फिर से शुरू किया है। कांडला बंदरगाह से यूएई के लिए पहली खेप रवाना हुई है। रिकॉर्ड उत्पादन और वैश्विक बाजार में बढ़ती कीमतों से भारतीय गेहूं प्रतिस्पर्धी बना है। 2022 में गर्मी से फसल प्रभावित होने पर निर्यात पर रोक लगा दी गई थी।
भारत ने फिर शुरू किया गेहूं निर्यात
भारत ने फिर शुरू किया गेहूं निर्यात
लगातार चार साल के अंतराल के बाद भारत ने एक बार फिर गेहूं निर्यात की शुरुआत कर दी है। इस बार रिकॉर्ड उत्पादन, अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों और बेहतर मालभाड़ा दरों ने भारतीय गेहूं को एशिया और मध्य-पूर्व के खरीदारों के लिए प्रतिस्पर्धी बना दिया है। लंबे समय तक निर्यात पर रोक के बाद यह बदलाव संकेत देता है कि देश में अब गेहूं की उपलब्धता मजबूत स्थिति में पहुंच चुकी है।

कांडला पोर्ट से UAE के लिए पहली खेप रवाना

ट्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश की प्रमुख कंपनी ITC ने पश्चिमी तट स्थित कांडला बंदरगाह से करीब 22,000 मीट्रिक टन गेहूं संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह चार वर्षों में पहली बार है जब भारत से बड़े स्तर पर गेहूं निर्यात हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक बाजार में कीमतों में तेजी और शिपिंग लागत में सुधार के कारण भारतीय गेहूं की मांग फिर बढ़ी है। इससे निर्यातकों को नया मौका मिला है।

2022 में लगा था प्रतिबंध, गर्मी से प्रभावित हुई थी फसल

भारत ने 2022 में भीषण गर्मी के कारण गेहूं की फसल प्रभावित होने और घरेलू स्टॉक कम होने के चलते निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद 2023 और 2024 में भी इस रोक को जारी रखा गया, क्योंकि उत्पादन और भंडार दोनों दबाव में थे। उस दौरान देश में गेहूं की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थीं और यह आशंका भी जताई जा रही थी कि भारत को 2017 के बाद पहली बार गेहूं आयात करना पड़ सकता है।

रिकॉर्ड उत्पादन से बदला परिदृश्य, निर्यात को मिली मंजूरी

अब हालात बदल गए हैं। इस साल देश में रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद के चलते सरकार ने गेहूं निर्यात की अनुमति दी है। अच्छी फसल और पर्याप्त भंडार के कारण भारत एक बार फिर वैश्विक बाजार में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की स्थिति में है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर उत्पादन और कीमतों का यह संतुलन बना रहा, तो आने वाले समय में भारत गेहूं निर्यात के बड़े खिलाड़ियों में फिर शामिल हो सकता है।
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