किसानों के लिए खुशखबरी! रूस समेत 5 देशों में छाने को तैयार भारतीय कृषि उत्पाद, भारत-EAEU FTA पर बातचीत तेज़
Gaon Connection | Jun 08, 2026, 13:20 IST
भारत और रूस के नेतृत्व वाले यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत तेज हो गई है। इस महीने मॉस्को में होने वाले दूसरे दौर की वार्ता में भारत कृषि उत्पादों, समुद्री खाद्य पदार्थों और प्रोसेस्ड फूड के निर्यात से जुड़ी जटिल गुणवत्ता, प्रमाणन और परीक्षण प्रक्रियाओं को आसान बनाने की मांग करेगा। सरकार का मानना है कि गैर-शुल्कीय बाधाएं कम होने से भारतीय किसानों, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और निर्यातकों को रूस, कजाकिस्तान, बेलारूस, आर्मेनिया और किर्गिस्तान जैसे बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलेगी।
मॉस्को में होगी अहम व्यापार वार्ता
भारत और रूस के नेतृत्व वाले यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर बातचीत तेज हो गई है। इस महीने के अंत में मॉस्को में होने वाले दूसरे दौर की वार्ता में भारत कृषि उत्पादों, समुद्री खाद्य पदार्थों और प्रोसेस्ड फूड के निर्यात से जुड़ी जटिल अनुपालन और प्रमाणन प्रक्रियाओं को आसान बनाने का मुद्दा उठाने जा रहा है। माना जा रहा है कि यदि इन नियमों में ढील मिलती है तो भारतीय किसानों, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और समुद्री उत्पाद निर्यातकों के लिए रूस समेत EAEU देशों के बाजारों तक पहुंच आसान हो सकती है।
वर्तमान में कई कृषि और खाद्य उत्पादों के निर्यात में स्वच्छता, गुणवत्ता, पैकेजिंग और परीक्षण से जुड़े नियम बड़ी बाधा बने हुए हैं। भारत चाहता है कि इन गैर-शुल्कीय बाधाओं (Non-Tariff Barriers) को कम किया जाए, ताकि भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ सके और निर्यात को नई गति मिले।
रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय व्यापार वार्ताकार इस महीने के अंत में मॉस्को जाएंगे, जहां प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते पर दूसरे दौर की बातचीत होगी। भारत और EAEU के बीच इस समझौते की शर्तों (Terms of Reference) पर पिछले वर्ष हस्ताक्षर किए गए थे, जबकि पहली दौर की वार्ता नवंबर 2025 में हुई थी।
वार्ता के दौरान भारत विशेष रूप से कृषि उत्पादों, समुद्री खाद्य पदार्थों और प्रोसेस्ड फूड के निर्यात को आसान बनाने के लिए नियमों में सरलता की मांग करेगा। इसके लिए सैनिटरी और फाइटोसैनिटरी (SPS) उपायों तथा तकनीकी व्यापार बाधाओं (Technical Barriers to Trade) पर चर्चा होगी। दरअसल कई बार आयातक देशों द्वारा लगाए गए गुणवत्ता, परीक्षण और प्रमाणन संबंधी नियम शुल्क से भी बड़ी बाधा बन जाते हैं जिससे निर्यातकों की लागत बढ़ जाती है और बाजार तक पहुंच मुश्किल हो जाती है।
सैनिटरी और फाइटोसैनिटरी (SPS) नियम मानव, पशु और पौधों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए बनाए जाते हैं। वहीं तकनीकी व्यापार बाधाओं में उत्पाद मानक, लेबलिंग आवश्यकताएं, पैकेजिंग नियम, गुणवत्ता प्रमाणन और परीक्षण प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। भारत का मानना है कि इन प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाकर दोनों पक्षों के बीच व्यापार को बढ़ावा दिया जा सकता है।
यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) में रूस, आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान शामिल हैं। यह समूह यूरोप और एशिया के बीच एक महत्वपूर्ण आर्थिक ब्लॉक माना जाता है। भारत और EAEU के बीच मुक्त व्यापार समझौता लागू होने से कृषि उत्पादों, समुद्री खाद्य पदार्थों, खाद्य प्रसंस्करण उत्पादों और अन्य वस्तुओं के निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है। इससे भारतीय किसानों, निर्यातकों और खाद्य उद्योग को नए बाजार मिलने की संभावना है।
वर्तमान में कई कृषि और खाद्य उत्पादों के निर्यात में स्वच्छता, गुणवत्ता, पैकेजिंग और परीक्षण से जुड़े नियम बड़ी बाधा बने हुए हैं। भारत चाहता है कि इन गैर-शुल्कीय बाधाओं (Non-Tariff Barriers) को कम किया जाए, ताकि भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ सके और निर्यात को नई गति मिले।