10 साल में 166% बढ़ा तंबाकू निर्यात, किसानों को बेहतर दाम; सरकार ने संसद में दी जानकारी
Mansi | Jul 28, 2026, 18:47 IST
पिछले एक दशक में भारत से तंबाकू और तंबाकू उत्पादकों के निर्यात में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार के अनुसार, बेहतर कृषि पद्धतियों, ई-नीलामी व्यवस्था और बाज़ार सुधारों से किसानों को बेहतर कीमत मिली है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर तंबाकू को लेकर सख्त नियम और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँ इस क्षेत्र के सामने भविष्य की बड़ी चुनौति बनी हुई हैं।
10 साल में 166% बढ़ा तंबाकू निर्यात
भारत से तंबाकू और तंबाकू उत्पादों का निर्यात पिछले दस वर्षों में लगातार बढ़ा है। सरकार के ताज़ा आँकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में निर्यात की मात्रा में 53.10 प्रतिशत और मूल्य के हिसाब से 166.51 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह जानकारी केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने लोकसभा में एक लिखित जवाब के दौरान दी।
सरकार के अनुसार, वर्ष 2015-16 में भारत से 240.93 मिलियन किलोग्राम तंबाकू और तंबाकू उत्पादों का निर्यात हुआ था, जिसकी कीमत 6,450.66 करोड़ रुपये थी। वहीं, वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 368.85 मिलियन किलोग्राम और 17,192.04 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। इन आँकड़ों से साफ है कि वैश्विक बाज़ार में भारतीय तंबाकू की मांग पहले की तुलना में बढ़ी है।
भारत दुनिया में चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा तंबाकू उत्पादक देश है। देश के कई राज्यों में बड़ी संख्या में किसान तंबाकू की खेती करते हैं और इससे उनकी आजीविका जुड़ी हुई है। ऐसे में निर्यात बढ़ने का सीधा असर किसानों की आय और बाज़ार पर भी पड़ता है।
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संसद में बताया कि फ्ल्यू-क्योर्ड वर्जीनिया तंबाकू की खेती करने वाले किसानों को बेहतर कीमत दिलाने के लिए कई कदम उठाए गए। इनमें अच्छी गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराना, गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिस को बढ़ावा देना और हर साल बाज़ार की मांग के अनुसार अधिकृत उत्पादन क्षेत्र तय करना शामिल है। इसका उद्देश्य उत्पादन और मांग के बीच संतुलन बनाए रखना तथा कीमतों में अनावश्यक उतार-चढ़ाव को रोकना है।
इन्हीं प्रयासों का असर किसानों को मिलने वाली कीमतों में भी दिखाई दिया। सरकार के मुताबिक, एफसीवी तंबाकू का औसत बिक्री मूल्य 134.43 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 251.14 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। यानी किसानों को मिलने वाली औसत कीमत में करीब 86.82 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
तंबाकू की बिक्री प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक नीलामी (ई-ऑक्शन) व्यवस्था को मजबूत किया है। सरकार का कहना है कि इससे किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलने के साथ-साथ भुगतान भी समय पर हो रहा है। ई-नीलामी व्यवस्था के कारण मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी बनी है।
किसानों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ
सरकार ने यह भी बताया कि तंबाकू बोर्ड ग्रोअर्स वेलफेयर स्कीम के तहत वर्ष 2025-26 में 1,300 से अधिक किसानों को आर्थिक सहायता दी गई। यह सहायता प्राकृतिक या आकस्मिक मृत्यु, गंभीर बीमारी के इलाज, बच्चों की शिक्षा, विवाह और प्राकृतिक आपदाओं से क्षतिग्रस्त तंबाकू भट्ठियों (बार्न) की मरम्मत जैसे मामलों में उपलब्ध कराई गई।
सरकार ने तंबाकू क्षेत्र में कर चोरी और अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए भी नए कदम उठाए हैं। 1 फरवरी 2026 से कुछ तंबाकू उत्पादों पर क्षमता आधारित केंद्रीय उत्पाद शुल्क लागू किया गया है। इसके अलावा, जीएसटी नियमों में संशोधन कर खुदरा बिक्री मूल्य के आधार पर कर निर्धारण की व्यवस्था लागू की गई है। तंबाकू और पान मसाला बनाने वाली कंपनियों के लिए अपनी उत्पादन क्षमता, मशीनों की संख्या और मासिक उत्पादन की जानकारी देना भी अनिवार्य किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे कर चोरी पर नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।
तंबाकू निर्यात में आई बढ़ोतरी भारतीय कृषि निर्यात के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। यदि वैश्विक बाज़ार में मांग बनी रहती है, तो किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना भी बनी रहेगी। हालांकि, तंबाकू एक ऐसी फसल है जिस पर दुनिया के कई देशों में स्वास्थ्य संबंधी कारणों से सख्त नियम लागू किए जा रहे हैं। ऐसे में आने वाले वर्षों में निर्यात को बनाए रखने के लिए गुणवत्ता, उत्पादकता और वैश्विक मानकों का पालन करना भारतीय तंबाकू क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
सरकार के अनुसार, वर्ष 2015-16 में भारत से 240.93 मिलियन किलोग्राम तंबाकू और तंबाकू उत्पादों का निर्यात हुआ था, जिसकी कीमत 6,450.66 करोड़ रुपये थी। वहीं, वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 368.85 मिलियन किलोग्राम और 17,192.04 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। इन आँकड़ों से साफ है कि वैश्विक बाज़ार में भारतीय तंबाकू की मांग पहले की तुलना में बढ़ी है।
भारत दुनिया में चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा तंबाकू उत्पादक देश है। देश के कई राज्यों में बड़ी संख्या में किसान तंबाकू की खेती करते हैं और इससे उनकी आजीविका जुड़ी हुई है। ऐसे में निर्यात बढ़ने का सीधा असर किसानों की आय और बाज़ार पर भी पड़ता है।
किसानों को बेहतर दाम मिलने का दावा
इन्हीं प्रयासों का असर किसानों को मिलने वाली कीमतों में भी दिखाई दिया। सरकार के मुताबिक, एफसीवी तंबाकू का औसत बिक्री मूल्य 134.43 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 251.14 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। यानी किसानों को मिलने वाली औसत कीमत में करीब 86.82 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
ई-नीलामी से बढ़ी पारदर्शिता
किसानों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ
सरकार ने यह भी बताया कि तंबाकू बोर्ड ग्रोअर्स वेलफेयर स्कीम के तहत वर्ष 2025-26 में 1,300 से अधिक किसानों को आर्थिक सहायता दी गई। यह सहायता प्राकृतिक या आकस्मिक मृत्यु, गंभीर बीमारी के इलाज, बच्चों की शिक्षा, विवाह और प्राकृतिक आपदाओं से क्षतिग्रस्त तंबाकू भट्ठियों (बार्न) की मरम्मत जैसे मामलों में उपलब्ध कराई गई।
कर चोरी रोकने के लिए नए नियम
तंबाकू निर्यात में आई बढ़ोतरी भारतीय कृषि निर्यात के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। यदि वैश्विक बाज़ार में मांग बनी रहती है, तो किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना भी बनी रहेगी। हालांकि, तंबाकू एक ऐसी फसल है जिस पर दुनिया के कई देशों में स्वास्थ्य संबंधी कारणों से सख्त नियम लागू किए जा रहे हैं। ऐसे में आने वाले वर्षों में निर्यात को बनाए रखने के लिए गुणवत्ता, उत्पादकता और वैश्विक मानकों का पालन करना भारतीय तंबाकू क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।