पश्चिम एशिया संकट के बीच भारतीय इलायची की बढ़ी मांग, ग्वाटेमाला में फसल खराब होने से निर्यात दोगुना

Gaon Connection | May 19, 2026, 15:47 IST
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पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारतीय इलायची की मांग बढ़ी है। ग्वाटेमाला में फसल नुकसान के कारण भारत से निर्यात दोगुना हो गया है। अंतरराष्ट्रीय खरीदार भारतीय इलायची की प्रीमियम क्वालिटी खरीद रहे हैं। घरेलू बाजार में भी कीमतें मजबूत बनी हुई हैं। आने वाले समय में उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है, जिससे कीमतें स्थिर रह सकती हैं।
इलायची किसानों को राहत
इलायची किसानों को राहत
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारतीय इलायची ने वैश्विक बाजार में फिर से अपनी मजबूत पकड़ बना ली है। उद्योग सूत्रों के मुताबिक भारत से इलायची का निर्यात लगभग दोगुना हो गया है। 'BusinessLine' की रिपोर्ट के अनुसार, इस तेजी की सबसे बड़ी वजह ग्वाटेमाला में भारी फसल नुकसान है। ग्वाटेमाला भारत का सबसे बड़ा प्रतिस्पर्धी माना जाता है लेकिन वहां ला नीना प्रभाव और कीट हमलों के कारण उत्पादन करीब 50 प्रतिशत तक घट गया है। ग्वाटेमाला में सप्लाई घटने के बाद अंतरराष्ट्रीय खरीदार अब भारतीय इलायची की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं।

भारतीय इलायची की प्रीमियम क्वालिटी की बढ़ी मांग

बोडिनायकनूर (तमिलनाडु) के इलायची निर्यातक एसकेएम धनवंतन ने बताया कि वैश्विक खरीदार नियमित सप्लाई बनाए रखने के लिए अब भारत की प्रीमियम बोल्ड ग्रेड इलायची खरीद रहे हैं। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए शिपिंग सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है, लेकिन इसके बावजूद कई खरीदार ज्यादा मालभाड़ा देने और वैकल्पिक सुरक्षित मार्ग अपनाने को तैयार हैं, ताकि भारतीय इलायची की सप्लाई जारी रह सके।

2200 से 2350 रुपये प्रति किलो तक मजबूत बने हुए हैं दाम

पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद घरेलू इलायची बाजार में मजबूती बनी हुई है। नीलामी बाजार में इलायची की कीमतें फिलहाल 2200 से 2350 रुपये प्रति किलो के बीच बनी हुई हैं। व्यापारियों का मानना है कि वैश्विक उपलब्धता सीमित रहने और मांग बढ़ने के कारण आने वाले महीनों में भी कीमतें मजबूत रह सकती हैं।

मई की बारिश से सुधरी फसल की स्थिति

इडुक्की के इलायची उत्पादक एसबी प्रभाकर ने बताया कि तुड़ाई का सीजन धीरे-धीरे खत्म हो रहा है और जून तक हल्की तुड़ाई जारी रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि 2025-26 में इलायची उत्पादन 35 हजार से 37 हजार टन रहने का अनुमान है। इसका कारण बेहतर मौसम और किसानों द्वारा की गई अच्छी देखभाल है। प्रभाकर के मुताबिक अप्रैल की हीटवेव का फसलों पर असर पड़ा था, लेकिन मई में अच्छी बारिश होने से पौधों की स्थिति फिर से सुधर गई है। उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध के कारण शुरुआत में इलायची की आवाजाही प्रभावित हुई थी, लेकिन अब हालात बेहतर हो रहे हैं।

अगले सीजन में 40 हजार टन उत्पादन की उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मौसम सामान्य रहा और किसानों ने इसी तरह फसलों की देखभाल जारी रखी, तो अगले सीजन में इलायची उत्पादन 40 हजार टन तक पहुंच सकता है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर निर्यात और घरेलू मांग दोनों बढ़ते रहे, तो भारी आवक के बावजूद कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रह सकती हैं। हालांकि खाद और कृषि रसायनों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से उत्पादन लागत बढ़ने की चिंता भी बनी हुई है।
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