भारतीय आमों को मिला नया विदेशी बाज़ार, पहली बार आइसलैंड पहुँचा दशहरी, चौसा और लंगड़ा आम; बढ़ीं निर्यात की उम्मीदें
Gaon Connection | Jun 26, 2026, 19:20 IST
भारत ने पहली बार आइसलैंड में भारतीय आमों के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। रेक्याविक और अक्यूरेरी में हुए आयोजन में दशहरी, चौसा, लंगड़ा और केसर आमों का प्रदर्शन किया गया। आयातकों और कारोबारियों ने भारतीय आमों की गुणवत्ता की सराहना की। आइसलैंड में बढ़ती माँग को देखते हुए भारतीय आमों के निर्यात की नई संभावनाएँ खुलने की उम्मीद है।
आइसलैंड में छाया भारतीय आम!
भारत के आम अब दुनिया के नए बाज़ारों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। इसी दिशा में पहली बार आइसलैंड में भारतीय आमों के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहाँ दशहरी, चौसा, लंगड़ा और केसर जैसी लोकप्रिय किस्मों को स्थानीय उपभोक्ताओं, आयातकों और कारोबारियों के सामने पेश किया गया। इस पहल का उद्देश्य भारतीय आमों की गुणवत्ता, स्वाद और विविधता को नए अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक पहुँचाना और निर्यात के नए अवसर तलाशना था।
आइसलैंड में आम की अच्छी माँग और वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की सीमित उपलब्धता को देखते हुए भारतीय आमों के लिए यहाँ बड़ा अवसर माना जा रहा है। वर्तमान में यह देश मुख्य रूप से थाईलैंड, ब्राज़ील, कंबोडिया, घाना और पेरू से आम आयात करता है। ऐसे में भारतीय आमों की मौजूदगी भारत के कृषि निर्यात को नई दिशा दे सकती है और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को भी मज़बूती मिल सकती है।
भारतीय दूतावास और कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के संयुक्त प्रयास से 24 जून को आइसलैंड की राजधानी रेक्याविक और 25 जून को उत्तरी आइसलैंड के अक्यूरेरी में भारतीय आमों के प्रचार-प्रसार का कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह आइसलैंड में अपनी तरह का पहला आयोजन था, जिसमें भारतीय आमों की प्रमुख किस्मों और उनकी वैश्विक पहचान को सामने रखा गया।
कार्यक्रम में आए मेहमानों को दशहरी, चौसा, लंगड़ा और केसर आमों का स्वाद चखाया गया। भारतीय आमों के बेहतरीन स्वाद, प्राकृतिक मिठास, सुगंध और गुणवत्ता की उपस्थित लोगों ने खुलकर सराहना की। कार्यक्रम में आयातकों, राजनयिक समुदाय, विभिन्न व्यावसायिक संस्थानों के प्रतिनिधियों और आइसलैंड के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने भी भाग लिया।
भारत के राजदूत आर. रवीन्द्र ने भारतीय आमों की विभिन्न किस्मों की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आइसलैंड में भारतीय आमों के निर्यात की अच्छी संभावनाएँ मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय आम अपनी गुणवत्ता और विविधता के कारण वैश्विक बाज़ार में अलग पहचान रखते हैं।
आइसलैंड के विदेश मंत्रालय में व्यापार समझौता निदेशक स्वेन के. एइनार्सन ने भारत–ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे आइसलैंड में भारतीय आमों के आयात की संभावनाएँ भी बढ़ सकती हैं।
आइसलैंड ट्रेड फेडरेशन के महासचिव ओलाफुर स्टीफेंसन ने कहा कि आइसलैंड के कारोबारी समुदाय की भारत में रुचि लगातार बढ़ रही है। उन्होंने विशेष रूप से भारतीय कृषि उत्पादों, खासकर आमों के आयात को भविष्य के लिए एक बेहतर अवसर बताया।
भारतीय दूतावास की द्वितीय सचिव अनिशा तोमर ने भारत में आम उत्पादन पर प्रस्तुति देते हुए बताया कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है। उन्होंने गुणवत्ता सुनिश्चित करने, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक पहुँच बढ़ाने और भारतीय आमों के वैश्विक प्रचार के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी।
आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में आइसलैंड ने लगभग 33 लाख अमेरिकी डॉलर मूल्य के आमों का आयात किया था। इनमें से लगभग 10 लाख अमेरिकी डॉलर मूल्य के आम केवल थाईलैंड से मँगाए गए थे। स्थानीय उपभोक्ताओं से बातचीत में यह भी सामने आया कि आइसलैंड के लोग आम को काफ़ी पसंद करते हैं और उसका सबसे अधिक उपयोग स्मूदी, मिष्ठान और फ्रूट सलाद में करते हैं।
ऐसे में भारतीय आमों के लिए आइसलैंड एक उभरता हुआ बाज़ार बन सकता है। यदि भारतीय निर्यातक गुणवत्ता और आपूर्ति बनाए रखने में सफल रहते हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत की हिस्सेदारी इस बाज़ार में बढ़ सकती है और भारतीय आम दुनिया के नए उपभोक्ताओं तक पहुँच सकते हैं।
आइसलैंड में आम की अच्छी माँग और वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की सीमित उपलब्धता को देखते हुए भारतीय आमों के लिए यहाँ बड़ा अवसर माना जा रहा है। वर्तमान में यह देश मुख्य रूप से थाईलैंड, ब्राज़ील, कंबोडिया, घाना और पेरू से आम आयात करता है। ऐसे में भारतीय आमों की मौजूदगी भारत के कृषि निर्यात को नई दिशा दे सकती है और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को भी मज़बूती मिल सकती है।
पहली बार आइसलैंड में हुआ भारतीय आमों का प्रचार कार्यक्रम
दशहरी, चौसा, लंगड़ा और केसर ने जीता लोगों का दिल
भारतीय आमों के निर्यात की संभावनाओं पर ज़ोर
व्यापार समझौते से बढ़ सकती है आमों की पहुँच
कारोबारी समुदाय ने दिखाई रुचि
भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश
आइसलैंड में भारतीय आमों के लिए बड़ा अवसर
ऐसे में भारतीय आमों के लिए आइसलैंड एक उभरता हुआ बाज़ार बन सकता है। यदि भारतीय निर्यातक गुणवत्ता और आपूर्ति बनाए रखने में सफल रहते हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत की हिस्सेदारी इस बाज़ार में बढ़ सकती है और भारतीय आम दुनिया के नए उपभोक्ताओं तक पहुँच सकते हैं।