Export Report: गैर-बासमती चावल और भैंस के मांस की बढ़ी मांग, 14% बढ़ा कृषि निर्यात
Mansi | Jul 31, 2026, 12:44 IST
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही ने भारत के कृषि निर्यात में शानदार वृद्धि की सूचना दी है। जहाँ गैर-बासमती चावल और कैराबीफ़ का निर्यात बढ़ा है, वहीं बासमती चावल में कमी आई है। दालों और प्रसंस्कृत खाद्य माल में मजबूती देखने को मिली है। ताजे फलों और सब्जियों का निर्यात गिरने के बावजूद, यह वृद्धि भारत के कृषि क्षेत्र के उज्ज्वल भविष्य का संकेत देती है।
कृषि निर्यात में बढ़ोतरी का प्रमुख आधार बने गैर-बासमती चावल और कैराब़ीफ
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत के कृषि निर्यात को मज़बूत शुरुआत मिली है। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के आँकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जून 2026 के दौरान APEDA के दायरे में आने वाले कृषि उत्पादों का निर्यात 6.711 अरब डॉलर से बढ़कर 7.641 अरब डॉलर हो गया। यानी मूल्य के आधार पर इसमें लगभग 14 % की वृद्धि दर्ज की गई। इस बढ़ोतरी में गैर-बासमती चावल और कैराबीफ़ (भैंस के मांस) की वैश्विक मांग का सबसे बड़ा योगदान रहा।
पहली तिमाही के आँकड़े यह भी बताते हैं कि अलग-अलग कृषि उत्पादों के निर्यात का प्रदर्शन समान नहीं रहा। जहाँ कुछ उत्पादों की विदेशी बाजारों में मांग बढ़ी, वहीं कुछ श्रेणियों में निर्यात पिछले वर्ष की तुलना में कम रहा। इससे यह संकेत मिलता है कि वैश्विक बाजार में भारतीय कृषि उत्पादों की मांग उत्पाद के अनुसार अलग-अलग बनी हुई है।
अप्रैल-जून तिमाही में गैर-बासमती चावल का निर्यात मूल्य 1.41 अरब डॉलर से बढ़कर 1.59 अरब डॉलर पहुँच गया, जो लगभग 12 % की वृद्धि है। वहीं मात्रा के आधार पर इसका निर्यात 3.32 मिलियन टन से बढ़कर 4.38 मिलियन टन रहा। यानी निर्यात की मात्रा में लगभग 32 % का इज़ाफ़ा दर्ज किया गया। इससे स्पष्ट है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय गैर-बासमती चावल की मांग पहले की तुलना में बढ़ी है। निर्यात में आई यह बढ़ोतरी भारतीय चावल व्यापार के लिए सकारात्मक संकेत मनी जा रही है और आने वाले महीनों में भी इसकी मांग बनी रहने की उम्मीद जताई जा रही है।
पहली तिमाही में सबसे अधिक बढ़ोतरी कैराबीफ़ के निर्यात में दर्ज की गई। इसका निर्यात मूल्य 896.82 मिलियन डॉलर से बढ़कर 1.49 अरब डॉलर हो गया, जो करीब 66 % की वृद्धि है। वहीं निर्यात की मात्रा 2.57 लाख टन से बढ़कर 3.40 लाख टन रही। यह आँकड़े बताते हैं कि वैश्विक बाजार में भारतीय कैराबीफ़ की मांग लगातार बनी हुई है। निर्यात में आई यह बढ़त कुल कृषि निर्यात को गति देने वाले प्रमुख कारणों में शामिल रही और इस क्षेत्र ने पहली तिमाही के प्रदर्शन में अहम योगदान दिया।
गैर-बासमती चावल के विपरीत बासमती चावल के निर्यात में इस तिमाही गिरावट दर्ज की गई। निर्यात मूल्य 1.49 अरब डॉलर से घटकर 1.44 अरब डॉलर रह गया, जबकि निर्यात की मात्रा 17.32 लाख टन से घटकर 15.39 लाख टन हो गई। यानी मूल्य और मात्रा, दोनों के आधार पर पिछले वर्ष की तुलना में कमी दर्ज की गई। इससे यह संकेत मिलता है कि कुछ प्रमुख निर्यात बाज़ारों में मांगत अपेक्षाकृत कर रही व्यापारिक परिस्थितियों का असर पड़ा। हलांकि बासमति चावल भारत का महत्वपूर्ण निर्यात उत्पाद बना हुआ है।
दालों के निर्यात में इस तिमाही उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। निर्यात मूल्य 238.75 मिलियन डॉलर से बढ़कर 363.77 मिलियन डॉलर पहुँच गया, जो लगभग 52 % की बढ़ोतरी है। मात्रा के आधार पर भी दालों का निर्यात 2.39 लाख टन से बढ़कर 4.02 लाख टन से अधिक रहा। इसके अलावा विविध प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का निर्यात भी लगभग 14% बढ़कर 470.70 मिलियन डॉलर तक पहुँच गया। वहीं प्रसंस्कृत सब्जियों के निर्यात में भी मामूली वृद्धि दर्ज की गई।
पहली तिमाही के आँकड़ों के अनुसार ताज़े फलों का निर्यात 324.87 मिलियन डॉलर से घटकर 281.11 मिलियन डॉलर रह गया। इसी तरह ताज़ी सब्जियों, डेयरी उत्पादों, मूंगफली, ग्वारगम और पोल्ट्री उत्पादों के निर्यात में भी पिछले वर्ष की तुलना में गिरावट दर्ज की गई। इससे साफ़ है कि सभी कृषि उत्पादों के निर्यात में समान बढ़ोतरी नहीं हुई।
APEDA आँकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत के कृषि निर्यात को गैर-बासमती चावल, कैराबीफ़ और दालों के निर्यात से सबसे अधिक मजबूती मिली। वहीं कुछ पारंपरिक कृषि उत्पादों के निर्यात में गिरावट भी दर्ज की गई। आने वाले महीनों में वैश्विक मांग और व्यापारिक परिस्थितियाँ कृषि निर्यात की दिशा तय करेंगी, लेकिन पहली तिमाही के आँकड़े भारत के कृषि निर्यात के लिए सकारात्मक शुरुआत का संकेत देते हैं।
पहली तिमाही के आँकड़े यह भी बताते हैं कि अलग-अलग कृषि उत्पादों के निर्यात का प्रदर्शन समान नहीं रहा। जहाँ कुछ उत्पादों की विदेशी बाजारों में मांग बढ़ी, वहीं कुछ श्रेणियों में निर्यात पिछले वर्ष की तुलना में कम रहा। इससे यह संकेत मिलता है कि वैश्विक बाजार में भारतीय कृषि उत्पादों की मांग उत्पाद के अनुसार अलग-अलग बनी हुई है।
गैर-बासमती चावल के निर्यात में क्यों आई तेज़ी?
कैराबीफ़ के निर्यात ने बनाया नया रिकॉर्ड
बासमती चावल का निर्यात क्यों घटा?
दालों और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों ने भी दिखाई बढ़त
किन कृषि उत्पादों के निर्यात में आई गिरावट?
APEDA आँकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत के कृषि निर्यात को गैर-बासमती चावल, कैराबीफ़ और दालों के निर्यात से सबसे अधिक मजबूती मिली। वहीं कुछ पारंपरिक कृषि उत्पादों के निर्यात में गिरावट भी दर्ज की गई। आने वाले महीनों में वैश्विक मांग और व्यापारिक परिस्थितियाँ कृषि निर्यात की दिशा तय करेंगी, लेकिन पहली तिमाही के आँकड़े भारत के कृषि निर्यात के लिए सकारात्मक शुरुआत का संकेत देते हैं।