मौसम विज्ञान के क्षेत्र में बड़ी छलांग! भारत ने बनाया दुनिया का सबसे एडवांस ग्लोबल मॉडल, अब गाँव-गाँव तक पहुँचेगा सटीक पूर्वानुमान
Umang | Jul 22, 2026, 17:10 IST
भारत ने 'भारतएफएस' नाम का अत्याधुनिक स्वदेशी मौसम पूर्वानुमान मॉडल विकसित किया है, जो 6 किलोमीटर के दायरे तक रीयल-टाइम मौसम की सटीक जानकारी देगा। इससे किसानों, आपदा प्रबंधन और जल संसाधन प्रबंधन को बड़ा लाभ मिलेगा, जबकि भारत इस क्षमता वाला दुनिया का पहला देश बन गया है।
मौसम की भविष्यवाणी में भारत ने रचा इतिहास
भारत ने मौसम पूर्वानुमान के क्षेत्र में बड़ी तकनीकी छलांग लगाई है। देश ने 'भारत फोरकास्ट सिस्टम' (भारतएफएस) नाम से अपना अत्याधुनिक वैश्विक मौसम पूर्वानुमान मॉडल तैयार किया है जो रीयल-टाइम में केवल 6 किलोमीटर के दायरे तक मौसम की सटीक जानकारी देने में सक्षम है। इसकी मदद से अब मौसम का पूर्वानुमान केवल ज़िले या शहर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पंचायतों और गाँवों के समूह तक पहुँचेगा। इससे किसानों, जल संसाधन प्रबंधन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को पहले से कहीं अधिक सटीक जानकारी मिल सकेगी।
केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह पूरी तरह स्वदेशी मौसम पूर्वानुमान प्रणाली भारतीय वैज्ञानिकों ने देश की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकसित की है। सरकार का दावा है कि इस तकनीक के साथ भारत दुनिया का एकमात्र देश बन गया है, जो 6 किलोमीटर रिज़ॉल्यूशन पर वैश्विक स्तर का रीयल-टाइम मौसम पूर्वानुमान मॉडल चला रहा है।
भारतएफएस को नई पीढ़ी की मौसम पूर्वानुमान तकनीक पर विकसित किया गया है, जिससे यह हर 6 किलोमीटर क्षेत्र के लिए अलग-अलग मौसम का अनुमान तैयार कर सकता है। पहले भारत में इस्तेमाल होने वाला मॉडल लगभग 12 किलोमीटर के दायरे का पूर्वानुमान देता था, जबकि दुनिया के अधिकतर वैश्विक मौसम मॉडल 9 से 14 किलोमीटर के बीच काम करते हैं। ऐसे में नया मॉडल पहले की तुलना में कहीं अधिक बारीक और सटीक जानकारी उपलब्ध कराएगा।
गाँव और पंचायत स्तर पर मौसम की जानकारी मिलने से किसान बुवाई, सिंचाई और कटाई का समय बेहतर ढंग से तय कर सकेंगे। वहीं मानसून के दौरान जलाशयों के संचालन में भी मदद मिलेगी, जिससे बाढ़ के जोखिम को कम करने और पानी के बेहतर प्रबंधन में सहायता मिलेगी। सरकार के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक बारिश जैसी घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। भारतएफएस ने विशेष रूप से मानसूनी क्षेत्रों में भारी वर्षा का पूर्वानुमान लगाने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार दिखाया है। इससे समय रहते चेतावनी जारी करने और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को और मज़बूत किया जा सकेगा।
भारतएफएस को तेज़ी से संचालित करने में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के दो नए सुपरकंप्यूटर 'अर्का' (आईआईटीएम, पुणे) और 'अरुणिका' (एनसीएमआरडब्ल्यूएफ, नोएडा) की अहम भूमिका रही है। इनकी मदद से मौसम संबंधी गणनाएँ पहले की तुलना में कहीं तेज़ हो रही हैं, जिससे अब रीयल-टाइम मौसम पूर्वानुमान जारी करना संभव हो गया है। यह मॉडल भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम), पुणे के वैज्ञानिकों ने राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (एनसीएमआरडब्ल्यूएफ), नोएडा और भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के सहयोग से विकसित किया है।
भारतएफएस केवल एक नया मौसम मॉडल नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता का भी प्रतीक है। इसे पूरी तरह भारतीय वैज्ञानिकों ने भारतीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकसित किया है, जिससे हिमालय, पश्चिमी घाट और देश के अन्य जटिल भौगोलिक क्षेत्रों में मौसम का अधिक सटीक पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा।
सरकार का कहना है कि इस प्रणाली से देश की मौसम सेवाएँ और अधिक मज़बूत होंगी। साथ ही भारत पड़ोसी देशों को भी बेहतर मौसम पूर्वानुमान सेवाएँ उपलब्ध करा सकेगा, जिससे क्षेत्रीय सहयोग और भारत की तकनीकी नेतृत्व क्षमता को भी बढ़ावा मिलेगा।
केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह पूरी तरह स्वदेशी मौसम पूर्वानुमान प्रणाली भारतीय वैज्ञानिकों ने देश की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकसित की है। सरकार का दावा है कि इस तकनीक के साथ भारत दुनिया का एकमात्र देश बन गया है, जो 6 किलोमीटर रिज़ॉल्यूशन पर वैश्विक स्तर का रीयल-टाइम मौसम पूर्वानुमान मॉडल चला रहा है।
6 किलोमीटर के दायरे का मौसम बताएगा भारतएफएस
किसानों से लेकर आपदा प्रबंधन तक सभी को होगा फायदा
सुपरकंप्यूटरों ने बढ़ाई मौसम मॉडल की ताक़त
'मेक इन इंडिया' को मिली नई पहचान
सरकार का कहना है कि इस प्रणाली से देश की मौसम सेवाएँ और अधिक मज़बूत होंगी। साथ ही भारत पड़ोसी देशों को भी बेहतर मौसम पूर्वानुमान सेवाएँ उपलब्ध करा सकेगा, जिससे क्षेत्रीय सहयोग और भारत की तकनीकी नेतृत्व क्षमता को भी बढ़ावा मिलेगा।