₹3,000 प्रति किलो बिकी भारत की पहली कमर्शियल माचा चाय! क्या इससे चाय किसानों की बढ़ेगी कमाई?

Lata Mishra | Jul 04, 2026, 11:51 IST
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असम भारत का पहला राज्य बन गया है जिसने कमर्शियल स्तर पर माचा चाय का उत्पादन किया है। गुवाहाटी टी ऑक्शन सेंटर में इसकी पहली खेप ₹3,000 प्रति किलो में बिकी। इस उपलब्धि से चाय किसानों के लिए प्रीमियम बाजार, बेहतर आय और निर्यात के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

माचा चाय की पहली खेप की नीलामी गुवाहाटी टी ऑक्शन सेंटर में हुई, जहां इसे <strong>₹3,000 प्रति किलोग्राम</strong> का दाम मिला।​
माचा चाय की पहली खेप की नीलामी गुवाहाटी टी ऑक्शन सेंटर में हुई, जहां इसे ₹3,000 प्रति किलोग्राम का दाम मिला।​
भारत की चाय इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। देश के सबसे बड़े चाय उत्पादक राज्य असम ने पहली बार व्यावसायिक (कमर्शियल) स्तर पर माचा (Matcha) चाय का उत्पादन किया है। इसके साथ ही असम ऐसा करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है। इस उपलब्धि की सबसे खास बात यह रही कि माचा चाय की पहली खेप की नीलामी गुवाहाटी टी ऑक्शन सेंटर में हुई, जहां इसे ₹3,000 प्रति किलोग्राम का दाम मिला। यह कीमत सामान्य चाय की तुलना में कई गुना अधिक है और इससे चाय किसानों के लिए नई संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।

क्या होती है माचा चाय?

माचा (Matcha) एक विशेष प्रकार की ग्रीन टी है, जिसे चाय की पत्तियों को बारीक पीसकर पाउडर के रूप में तैयार किया जाता है। इसकी शुरुआत जापान में हुई थी, जहां पारंपरिक चाय समारोहों में इसका उपयोग किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में माचा दुनिया भर में एक लोकप्रिय हेल्थ ड्रिंक बनकर उभरी है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा अधिक होती है, इसलिए स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के बीच इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

असम ने कैसे हासिल की यह सफलता?

असम के टिनसुकिया ज़िले स्थित छोटा टिंगराई टी एस्टेट ने लगभग दस वर्षों की मेहनत और जापानी विशेषज्ञों के सहयोग से माचा चाय का सफल उत्पादन किया है। माचा तैयार करने की प्रक्रिया सामान्य चाय से अलग होती है। इसके लिए पौधों को कुछ समय तक छाया में उगाया जाता है, पत्तियों की सावधानी से तुड़ाई की जाती है और फिर उन्हें विशेष तकनीक से बारीक पीसा जाता है। यही वजह है कि इसकी गुणवत्ता और कीमत दोनों सामान्य चाय से कहीं अधिक होती हैं।

₹3,000 प्रति किलो क्यों मिली कीमत?

माचा चाय को प्रीमियम श्रेणी की चाय माना जाता है। इसकी खेती और प्रोसेसिंग में अधिक मेहनत, समय और तकनीक लगती है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में माचा की मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि आपूर्ति अपेक्षाकृत सीमित है। इसी कारण इसकी कीमत सामान्य चाय की तुलना में कई गुना अधिक रहती है।

POLL: क्या भारत में चाय बागानों को माचा चाय उत्पादन में निवेश करना चाहिए?

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चाय किसानों के लिए क्या मायने रखती है यह उपलब्धि?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत में माचा चाय का उत्पादन बढ़ता है, तो चाय किसानों को पारंपरिक चाय के मुकाबले अधिक मूल्य मिलने की संभावना बन सकती है। इससे किसानों के सामने केवल काली चाय (Black Tea) पर निर्भर रहने के बजाय प्रीमियम स्पेशलिटी टी उत्पादन का नया विकल्प खुल सकता है। अगर अन्य चाय बागान भी इस दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ चाय उद्योग को भी नई पहचान मिल सकती है।

निर्यात के लिए भी खुल सकते हैं नए अवसर

जापान, अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में माचा चाय की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में भारत के लिए प्रीमियम ग्रीन टी के वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर पैदा हो सकता है। यदि भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरते हैं, तो इससे चाय निर्यात बढ़ाने और विदेशी मुद्रा अर्जित करने में भी मदद मिल सकती है।

चाय उद्योग को मिलेगा नया रास्ता

भारत लंबे समय से अपनी काली चाय के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। लेकिन बदलती उपभोक्ता पसंद को देखते हुए स्पेशलिटी टी की मांग तेजी से बढ़ रही है। असम में कमर्शियल माचा चाय का सफल उत्पादन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत माना जा रहा है। इससे चाय उद्योग को विविधता मिलेगी और किसानों के लिए अधिक मूल्य वाली खेती के नए अवसर विकसित हो सकते हैं।
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