देश में दलहन उत्पादन बढ़ाने को मिलेगी नई रफ़्तार, आईसीएआर ने अरहर की ‘आशा’ किस्म का पूर्ण जीनोम किया तैयार
Umang | Aug 05, 2026, 11:55 IST
आईसीएआर ने अरहर की 'आशा' किस्म का भारत का पहला पूर्ण टेलोमियर-टू-टेलोमियर (टी2टी) जीनोम तैयार किया है। इसमें सभी 11 गुणसूत्रों का पूरा आनुवंशिक विवरण शामिल है और 36,557 जीनों की पहचान की गई है। इस उपलब्धि से उपयोगी जीनों की खोज, आधुनिक प्रजनन और जीन संपादन तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा। इससे अधिक उपज देने वाली, जलवायु-अनुकूल और पोषक तत्वों से भरपूर अरहर की नई किस्में विकसित करने में मदद मिलेगी। यह उपलब्धि देश में दलहन उत्पादन बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा को मज़बूत करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है।
जलवायु-अनुकूल और अधिक उपज वाली अरहर की राह आसान
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने अरहर की ‘आशा’ किस्म का भारत का पहला टेलोमियर-टू-टेलोमियर (टी2टी यानि एक छोर से दूसरे छोर) जीनोम तैयार किया है। यह उपलब्धि देश में दलहन फसलों पर होने वाले शोध के लिए काफ़ी महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है। इस जीनोम के तैयार होने से वैज्ञानिक अरहर के जीनों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे और नई तकनीकों की मदद से अधिक उपज देने वाली तथा मौसम की मार झेलने वाली किस्में विकसित कर सकेंगे।
अरहर भारत की सबसे ज़्यादा उगाई जाने वाली दलहन फसलों में से एक है। यह प्रोटीन का अच्छा स्रोत होने के साथ लोगों के रोज़मर्रा के भोजन का भी अहम हिस्सा है। ऐसे में इस नई उपलब्धि से अरहर की खेती को बढ़ावा मिलेगा, किसानों को बेहतर किस्में मिलेंगी और देश में दलहन उत्पादन बढ़ाने की दिशा में भी मदद मिलेगी।
आईसीएआर ने बताया कि तैयार किए गए टी2टी जीनोम में अरहर के सभी 11 गुणसूत्र शामिल हैं। इसका आकार 75 करोड़ 26 लाख 50 हज़ार बेस पेयर है और इसमें 36,557 जीनों की पहचान की गई है। इस जीनोम को एनसीबीआई के वैश्विक डाटाबेस में भी जमा कराया गया है। आरएनए परीक्षण में 99.9 प्रतिशत से ज़्यादा सटीक परिणाम मिले हैं।
आईसीएआर के राष्ट्रीय पादप जैव प्रौद्योगिकी संस्थान ने वर्ष 2011 में ‘आशा’ किस्म का पहला ड्राफ़्ट जीनोम तैयार किया था। यह पूरी तरह भारत में तैयार किया गया दुनिया का पहला फसल जीनोम था। इसके बाद 2017 में इसका बेहतर संस्करण जारी किया गया। अब पहली बार इसका पूरा टी2टी जीनोम तैयार किया गया है।
इस जीनोम की मदद से ऐसे जीनों की पहचान करना आसान होगा, जो अधिक उत्पादन, बेहतर पोषण, रोगों से बचाव और बदलते मौसम को सहने की क्षमता से जुड़े हैं। इससे वैज्ञानिक कम समय में नई और बेहतर अरहर की किस्में विकसित कर सकेंगे। साथ ही जीन संपादन और आधुनिक प्रजनन तकनीकों पर होने वाले शोध को भी गति मिलेगी।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए ‘आत्मनिर्भरता इन पल्सेज़ मिशन’ शुरू किया है। हाल ही में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वैज्ञानिकों से बिना जीएम तकनीक के दलहन की पैदावार बढ़ाने के उपाय खोजने को कहा था। ऐसे समय में आईसीएआर की यह उपलब्धि किसानों, शोध संस्थानों और देश के दलहन उत्पादन के लिए बड़ी क़ामयाबी मानी जा रही है।
अरहर भारत की सबसे ज़्यादा उगाई जाने वाली दलहन फसलों में से एक है। यह प्रोटीन का अच्छा स्रोत होने के साथ लोगों के रोज़मर्रा के भोजन का भी अहम हिस्सा है। ऐसे में इस नई उपलब्धि से अरहर की खेती को बढ़ावा मिलेगा, किसानों को बेहतर किस्में मिलेंगी और देश में दलहन उत्पादन बढ़ाने की दिशा में भी मदद मिलेगी।