अमेरिकी टैरिफ और यूरोप की कमजोर मांग के बावजूद भारत के घेरकिन निर्यात ने बनाया रिकॉर्ड, 2940 करोड़ रुपये के पार पहुंचा कारोबार
Gaon Connection | May 27, 2026, 11:38 IST
भारत के अचार वाले खीरे यानी घेरकिन के निर्यात ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में निर्यात मूल्य और मात्रा दोनों में वृद्धि दर्ज की गई है। जर्मनी, रूस, कनाडा और नीदरलैंड जैसे देशों से बढ़ी मांग ने इस रिकॉर्ड को संभव बनाया है।
घेरकिन निर्यात में आई मजबूती
अमेरिका में टैरिफ विवाद और यूरोप के कुछ बड़े बाजारों में कमजोर मांग के बावजूद भारत के घेरकिन यानी अचार वाले खीरे के निर्यात ने वित्त वर्ष 2025-26 में नया रिकॉर्ड बनाया है। जर्मनी, रूस, कनाडा और नीदरलैंड जैसे देशों से बढ़ी मांग के दम पर भारत का घेरकिन निर्यात मूल्य और मात्रा दोनों के लिहाज से अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। 'बिजनेस लाइन' की रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का घेरकिन निर्यात बढ़कर 307.61 मिलियन डॉलर (2,940 करोड़ रुपये) पहुंच गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 306.72 मिलियन डॉलर था।
भारत से घेरकिन निर्यात की मात्रा में भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में निर्यात मात्रा 8 प्रतिशत बढ़कर 3.14 लाख टन पहुंच गई, जबकि पिछले वर्ष यह 2.89 लाख टन थी। इंडियन घेरकिन एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जीएम विनोद ने कहा कि डॉलर और यूरो जैसी विदेशी मुद्राओं में मजबूती के कारण निर्यात मूल्य में भी बढ़ोतरी देखने को मिली। उन्होंने कहा कि शुरुआत में अमेरिकी टैरिफ विवाद के कारण निर्यात प्रभावित हुआ था, लेकिन विवाद सुलझने के बाद अमेरिका को होने वाली सप्लाई में सुधार आया।
डीजीसीआईएस के आंकड़ों के अनुसार अमेरिका को भारत का घेरकिन निर्यात मूल्य के लिहाज से 27 प्रतिशत घट गया। वित्त वर्ष 2025-26 में अमेरिका को 53.61 मिलियन डॉलर का निर्यात हुआ, जबकि पिछले वर्ष यह 73.51 मिलियन डॉलर था। मात्रा के हिसाब से भी अमेरिका को निर्यात 23 प्रतिशत घटकर 52,768 टन रह गया, जो एक साल पहले 68,376 टन था।
जीएम विनोद ने कहा कि स्पेन और फ्रांस जैसे प्रमुख यूरोपीय खरीदारों की मांग भी इस दौरान कमजोर रही। इसकी मुख्य वजह इन देशों में पहले से मौजूद ज्यादा घरेलू स्टॉक को माना जा रहा है। हालांकि जर्मनी, रूस, कनाडा और नीदरलैंड जैसे देशों ने भारत से खरीद बढ़ाकर कुल निर्यात को मजबूती दी।
अमेरिका के बाद जर्मनी भारतीय घेरकिन का दूसरा सबसे बड़ा बाजार बनकर उभरा। वित्त वर्ष 2025-26 में जर्मनी को 35,070 टन घेरकिन निर्यात किया गया, जबकि पिछले वर्ष यह 29,097 टन था। मूल्य के लिहाज से जर्मनी को निर्यात बढ़कर 40.09 मिलियन डॉलर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष 31.79 मिलियन डॉलर था।रूस, जो तीसरा सबसे बड़ा खरीदार है, वहां भी भारतीय घेरकिन की मांग तेजी से बढ़ी। रूस को निर्यात बढ़कर 43,627 टन पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष यह 28,598 टन था। मूल्य के हिसाब से रूस को निर्यात 31.76 मिलियन डॉलर रहा, जो एक साल पहले 25.28 मिलियन डॉलर था।
भारत से घेरकिन का निर्यात बल्क और बोतलबंद दोनों रूपों में किया जाता है। इसका उत्पादन और प्रोसेसिंग मुख्य रूप से कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में केंद्रित है। घेरकिन की खेती मुख्य रूप से कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग मॉडल के तहत किसानों से कराई जाती है। इसका अधिकांश उत्पादन निर्यात कर दिया जाता है क्योंकि भारत में अचार वाले खीरे की घरेलू मांग बेहद कम है।