भारतीय मक्का की विदेशों में बढ़ी माँग, तीन साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच सकता है निर्यात, जानें कारण
Gaon Connection | Jul 02, 2026, 14:43 IST
भारत से मक्का का निर्यात वर्ष 2026 में तीन साल के सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच सकता है। रिकॉर्ड उत्पादन और प्रतिस्पर्धी कीमतों के कारण वियतनाम, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और भूटान जैसे देशों से माँग बढ़ी है। पहले पाँच महीनों में 10.8 लाख टन मक्का का निर्यात हुआ। निर्यात बढ़ने से घरेलू कीमतों को भी सहारा मिला है।
भारत से मक्का निर्यात में तेज़ उछाल
भारत से मक्का का निर्यात इस साल तीन वर्षों के सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँचने का अनुमान है। इसकी बड़ी वजह देश में रिकॉर्ड उत्पादन, घरेलू बाज़ार में कम कीमतें और एशियाई देशों के लिए भारतीय मक्का का प्रतिस्पर्धी दाम पर उपलब्ध होना है। बढ़ते निर्यात से न केवल भारत की वैश्विक बाज़ार में हिस्सेदारी बढ़ी है, बल्कि देश में मक्का की कीमतों को भी सहारा मिला है, जो पिछले कुछ महीनों से अधिक आपूर्ति के कारण दबाव में थीं।
वियतनाम, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और भूटान जैसे देशों ने इस साल के पहले पाँच महीनों में भारत से मक्का की ख़रीद बढ़ाई है। अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच युद्ध के बाद वैश्विक समुद्री मालभाड़ा बढ़ने से एशियाई देशों के लिए अमेरिका और दक्षिण अमेरिका से मक्का मँगाना महँगा हो गया। ऐसे में भारत से मक्का की आपूर्ति अधिक किफ़ायती साबित हुई।
एग्री बिज़नेस कंपनी ओलम एग्री इंडिया के डिप्टी कंट्री हेड नितिन गुप्ता ने रॉयटर्स से कहा कि पिछले कुछ महीनों में भारतीय मक्का की निर्यात माँग लगातार मज़बूत बनी रही। उस समय भारत में मक्का की कीमतों पर दबाव था, जबकि बढ़े हुए मालभाड़े की वजह से अमेरिका और दक्षिण अमेरिका से एशियाई देशों तक मक्का पहुँचाने की लागत ज़्यादा थी। इससे भारतीय मक्का को प्रतिस्पर्धी बढ़त मिली।
भारत के वाणिज्य मंत्रालय के अस्थायी आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 के पहले पाँच महीनों में देश से 10.8 लाख मीट्रिक टन मक्का का निर्यात हुआ, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह केवल 2,28,844 टन था। नितिन गुप्ता के मुताबिक़, पूरे वर्ष 2026 में भारत का मक्का निर्यात बढ़कर 18 लाख टन तक पहुँच सकता है। यह वर्ष 2023 के बाद सबसे अधिक होगा और पिछले साल के 8,05,935 टन निर्यात के मुकाबले दोगुने से भी ज़्यादा रहेगा।
वर्ष 2025-26 के फसल सीज़न में भारत का मक्का उत्पादन 27 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 5.5 करोड़ टन पहुँच गया। वर्ष 2024 में इथेनॉल उत्पादकों की मज़बूत माँग के कारण किसानों को अच्छे दाम मिले थे, जिससे उन्होंने मक्का की बुआई बढ़ाई और उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि हुई।
यदि उत्पादन अच्छा रहता है तो नई फसल आने के बाद अक्टूबर से भारतीय मक्का निर्यात फिर तेज़ हो सकता है। हालांकि, अल नीनो की वजह से वर्षा को लेकर बनी चिंता भी बनी हुई है। यदि बारिश सामान्य से कम रहती है और मक्का की कीमतें नीचे रहती हैं, तो किसान अगली बुआई में मक्का की जगह दूसरी फसलों का रुख़ कर सकते हैं।
वियतनाम, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और भूटान जैसे देशों ने इस साल के पहले पाँच महीनों में भारत से मक्का की ख़रीद बढ़ाई है। अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच युद्ध के बाद वैश्विक समुद्री मालभाड़ा बढ़ने से एशियाई देशों के लिए अमेरिका और दक्षिण अमेरिका से मक्का मँगाना महँगा हो गया। ऐसे में भारत से मक्का की आपूर्ति अधिक किफ़ायती साबित हुई।
पहले पाँच महीनों में निर्यात कई गुना बढ़ा, रिकॉर्ड उत्पादन से मिली रफ़्तार
भारत के वाणिज्य मंत्रालय के अस्थायी आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 के पहले पाँच महीनों में देश से 10.8 लाख मीट्रिक टन मक्का का निर्यात हुआ, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह केवल 2,28,844 टन था। नितिन गुप्ता के मुताबिक़, पूरे वर्ष 2026 में भारत का मक्का निर्यात बढ़कर 18 लाख टन तक पहुँच सकता है। यह वर्ष 2023 के बाद सबसे अधिक होगा और पिछले साल के 8,05,935 टन निर्यात के मुकाबले दोगुने से भी ज़्यादा रहेगा।
अक्टूबर से फिर तेज़ी आने की उम्मीद
यदि उत्पादन अच्छा रहता है तो नई फसल आने के बाद अक्टूबर से भारतीय मक्का निर्यात फिर तेज़ हो सकता है। हालांकि, अल नीनो की वजह से वर्षा को लेकर बनी चिंता भी बनी हुई है। यदि बारिश सामान्य से कम रहती है और मक्का की कीमतें नीचे रहती हैं, तो किसान अगली बुआई में मक्का की जगह दूसरी फसलों का रुख़ कर सकते हैं।