2026 Milk Report: दूध उत्पादन में भारत का दबदबा! 105.4 मिलियन टन पहुँच सकता है प्रोडक्शन

Mansi | Jul 30, 2026, 17:26 IST
Share

भारत का दुग्ध उत्पादन 2026 में 105.4 मिलियन टन तक पहुँचने की संभावना है, जिससे दुधारू गायों की संख्या 6.25 करोड़ के आसपास हो सकती है। मक्खन का उत्पादन भारत को यूरोपीय संघ और न्यूज़ीलैंड जैसे देशों से आगे रखेगा। मिल्क पाउडर का उत्पादन भी 7.90 लाख टन होने का अनुमान है। यह विकास किसानों की आय में सुधार लाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा देने में सहायक होगा।

दूध उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धी की ओर बढ़ता भारत
दूध उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धी की ओर बढ़ता भारत
भारत में खेती के साथ पशुपालन भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अहम आधार है। देश के करोड़ों किसान दूध उत्पादन से अपनी आय बढ़ाते हैं और यही वजह है कि भारत लगातार दुनिया के प्रमुख दुग्ध उत्पादक देशों में अपनी स्थिति बनाए हुए है। अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 में भी भारत दूध उत्पादन के मामले में अपनी बढ़त बरकरार रखेगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में भारत में गाय के दूध का उत्पादन 103.2 मिलियन टन रहा, जो 2026 में बढ़कर 105.4 मिलियन टन तक पहुँचने का अनुमान है। उत्पादन में यह बढ़ोतरी देश के डेयरी क्षेत्र की मज़बूती को दर्शाती है, वहीं ग्रामीण परिवारों की आय में भी इसकी अहम भूमिका मानी जा रही है।

दूध उत्पादन में लगातार बढ़ रही बढ़त

रिपोर्ट के अनुसार, उत्पादन बढ़ने के साथ दुधारू गायों की संख्या भी बढ़ने की संभावना है। वर्ष 2026 में देश में दूध देने वाली गायों की संख्या लगभग 6.25 करोड़ तक पहुँच सकती है, जो रिपोर्ट में शामिल सभी देशों में सबसे अधिक है। इस विषय पर भारतीय एग्रो इंडस्ट्रीज फाउंडेशन (BAIF) के वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. विकास तिवारी ने बताया, "भारत के दुनिया में सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक होने का प्रमुख कारण दुधारू पशुओं की अधिक संख्या है। हालांकि, अब केवल संख्या ही नहीं, बल्कि प्रति पशु दूध उत्पादन बढ़ाने पर भी ज़ोर दिया जा रहा है। नस्ल सुधार कार्यक्रमों के कारण स्वदेशी नस्लों की उत्पादकता पहले की तुलना में बेहतर हुई है। अच्छी देखभाल, संतुलित आहार और वैज्ञानिक प्रबंधन से कम पशुओं से भी अधिक दूध उत्पादन संभव हो रहा है, जिससे डेयरी क्षेत्र लगातार मज़बूत हो रहा है।"

देश में ही होगी अधिकांश दूध की खपत

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 में भारत में दूध की घरेलू खपत लगभग 93 मिलियन टन रहने का अनुमान है। यानी देश में उत्पादित दूध का बड़ा हिस्सा घरेलू बाज़ार में ही उपयोग होगा। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि भारत में डेयरी उत्पादों की माँग लगातार बनी हुई है और उत्पादन का अधिकांश हिस्सा देश के भीतर ही खप जाता है।

मक्खन उत्पादन में भी भारत सबसे आगे

दूध के साथ-साथ मक्खन उत्पादन में भी भारत की बढ़त जारी रहने की संभावना है। वर्ष 2025 में जहाँ मक्खन का उत्पादन 7.19 मिलियन टन था, वहीं 2026 में इसके बढ़कर 7.44 मिलियन टन होने का अनुमान है। इसी अवधि में घरेलू खपत भी बढ़कर 7.39 मिलियन टन तक पहुँच सकती है। इस मामले में भारत यूरोपीय संघ और न्यूज़ीलैंड जैसे देशों से आगे बना हुआ है।वर्ष 2026 में मिल्क पाउडर का उत्पादन 7.70 लाख टन से बढ़कर 7.90 लाख टन तक पहुँच सकता है। वहीं इसकी घरेलू खपत लगभग 7.79 लाख टन रहने का अनुमान है। यह दर्शाता है कि डेयरी क्षेत्र में केवल दूध ही नहीं, बल्कि प्रसंस्कृत उत्पादों की माँग भी लगातार बढ़ रही है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा

डेयरी क्षेत्र में लगातार हो रही प्रगति ग्रामीण परिवारों के लिए आय का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। नस्ल सुधार, पशु पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं और वैज्ञानिक प्रबंधन पर लगातार काम होता रहा, तो आने वाले वर्षों में भारत केवल कुल दूध उत्पादन ही नहीं, बल्कि प्रति पशु उत्पादकता के मामले में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ डेयरी क्षेत्र और अधिक मज़बूत होने की उम्मीद है।
Tags:
  • Milk Production
  • India Dairy
  • USDA Report
  • Dairy Farming
  • Cow Milk
  • Butter Production
  • Milk Powder
  • Dairy Farmers
  • Livestock
  • Rural Economy