Pulses Imports: भारत ने 6 महीने में विदेश से मंगाई 31.80 लाख टन दाल; जानिए किस देश से कितना आया अरहर, मसूर, चना और उड़द
Gaon Connection | Aug 18, 2026, 14:09 IST
जनवरी से जून 2026 के दौरान भारत का दाल आयात थोड़ा कम हुआ है। इस अवधि में चना और उड़द का आयात घटा है, जबकि अरहर का आयात बढ़ा। मसूर का आयात 51% बढ़कर सबसे तेज गति से बढ़ा है। पीली मटर का आयात भी 17% की वृद्धि दर्ज की गई। अफ्रीकी देशों की अरहर आपूर्ति में बड़ी हिस्सेदारी रही है।
दाल आयात की पूरी तस्वीर
भारत में वर्ष 2026 की पहली छमाही यानी जनवरी से जून के दौरान दालों का कुल आयात मामूली घटा है। इस अवधि में देश ने 31.80 लाख टन दालों का आयात किया, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह आंकड़ा 32.27 लाख टन था। यानी दालों का आयात करीब 1.46 प्रतिशत कम हुआ। आयात में यह कमी मुख्य रूप से चना और उड़द की विदेशी खेप घटने से आई है।
हालांकि, सभी प्रमुख दालों के आयात में गिरावट नहीं रही। इस दौरान अरहर, मसूर और पीली मटर की विदेशी आवक बढ़ी है। इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (IPGA) के हालिया बाज़ार अपडेट में डीजीसीआईएस के आंकड़ों के हवाले से यह जानकारी दी गई है। आंकड़ों से पता चलता है कि देश की दालों की जरूरत पूरी करने के लिए अलग-अलग दालों में आयात का रुख अलग रहा है। जहां चना और उड़द की आवक घटी, वहीं अरहर और मसूर के आयात में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई।
जनवरी-जून 2026 के दौरान अरहर का आयात 43.34 प्रतिशत बढ़कर 5.05 लाख टन से अधिक हो गया। इस दौरान भारत को अरहर की सबसे ज्यादा आपूर्ति मोज़ाम्बिक से हुई। मोज़ाम्बिक से 1.83 लाख टन से अधिक अरहर भारत पहुंची।
इसके बाद म्यांमार से 1.23 लाख टन से अधिक, तंज़ानिया से 1.01 लाख टन से अधिक और सूडान से करीब 49,049 टन अरहर का आयात हुआ। इससे पता चलता है कि अरहर की घरेलू जरूरत पूरी करने में अफ्रीकी उत्पादक देशों की भूमिका बढ़ी है।
दूसरी ओर, उड़द का आयात पहली छमाही में 19 प्रतिशत घट गया। म्यांमार अब भी भारत को उड़द की सबसे बड़ी आपूर्ति करने वाला देश रहा। जनवरी-जून के दौरान म्यांमार से 2.78 लाख टन उड़द आई। इसके बाद ब्राज़ील से 39,309 टन और थाईलैंड से 11,448 टन से अधिक उड़द का आयात हुआ।
मसूर के आयात में इस दौरान सबसे तेज़ बढ़ोतरी देखने को मिली। जनवरी-जून 2026 में भारत ने 9.63 लाख टन मसूर का आयात किया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 6.35 लाख टन था। इस तरह मसूर का आयात 51.58 प्रतिशत बढ़ गया।
कनाडा भारत को मसूर की सबसे बड़ी आपूर्ति करने वाला देश रहा। वहां से 5.10 लाख टन से अधिक मसूर भारत आई। ऑस्ट्रेलिया 4.17 लाख टन से अधिक आपूर्ति के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि रूस से 22,938 टन मसूर का आयात हुआ।
वहीं, चना आयात में 45 प्रतिशत से अधिक की बड़ी गिरावट आई। ऑस्ट्रेलिया से चने की खेप कम आने का असर कुल आयात पर पड़ा। इसके बावजूद ऑस्ट्रेलिया भारत को चना भेजने वाला सबसे बड़ा देश बना रहा और जनवरी-जून में वहां से 6.03 लाख टन से अधिक चना आया। तंज़ानिया से करीब 28,743 टन चना आया, जबकि ब्रिटेन और म्यांमार समेत अन्य देशों से भी आपूर्ति हुई।
इग्रेन इंडिया के राहुल चौहान ने बिजनेस लाइन को बताया कि चने के आयात में कमी की एक वजह घरेलू बाज़ार में इसकी कम कीमत और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अपेक्षाकृत ऊंची कीमत रही। ऐसे में विदेशी चना भारतीय बाज़ार में उतना प्रतिस्पर्धी नहीं रहा, जिससे आयात की मांग प्रभावित हुई।
इसके उलट पीली मटर का आयात जनवरी-जून 2026 के दौरान 17 प्रतिशत बढ़ा। कनाडा ने भारत को पीली मटर की सबसे ज्यादा आपूर्ति की और वहां से 5.7 लाख टन से अधिक खेप आई। रूस भी पीली मटर का प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहा।
इस तरह 2026 की पहली छमाही में भारत का कुल दाल आयात भले ही थोड़ा कम हुआ हो, लेकिन अलग-अलग दालों की तस्वीर अलग रही। अरहर, मसूर और पीली मटर की बढ़ती विदेशी आवक के मुकाबले चना और उड़द का आयात घटा है।
हालांकि, सभी प्रमुख दालों के आयात में गिरावट नहीं रही। इस दौरान अरहर, मसूर और पीली मटर की विदेशी आवक बढ़ी है। इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (IPGA) के हालिया बाज़ार अपडेट में डीजीसीआईएस के आंकड़ों के हवाले से यह जानकारी दी गई है। आंकड़ों से पता चलता है कि देश की दालों की जरूरत पूरी करने के लिए अलग-अलग दालों में आयात का रुख अलग रहा है। जहां चना और उड़द की आवक घटी, वहीं अरहर और मसूर के आयात में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई।
अरहर का आयात 43% बढ़ा, अफ्रीकी देशों की बड़ी हिस्सेदारी
इसके बाद म्यांमार से 1.23 लाख टन से अधिक, तंज़ानिया से 1.01 लाख टन से अधिक और सूडान से करीब 49,049 टन अरहर का आयात हुआ। इससे पता चलता है कि अरहर की घरेलू जरूरत पूरी करने में अफ्रीकी उत्पादक देशों की भूमिका बढ़ी है।
दूसरी ओर, उड़द का आयात पहली छमाही में 19 प्रतिशत घट गया। म्यांमार अब भी भारत को उड़द की सबसे बड़ी आपूर्ति करने वाला देश रहा। जनवरी-जून के दौरान म्यांमार से 2.78 लाख टन उड़द आई। इसके बाद ब्राज़ील से 39,309 टन और थाईलैंड से 11,448 टन से अधिक उड़द का आयात हुआ।
मसूर की विदेशी आवक 51% बढ़ी, कनाडा सबसे आगे
कनाडा भारत को मसूर की सबसे बड़ी आपूर्ति करने वाला देश रहा। वहां से 5.10 लाख टन से अधिक मसूर भारत आई। ऑस्ट्रेलिया 4.17 लाख टन से अधिक आपूर्ति के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि रूस से 22,938 टन मसूर का आयात हुआ।
वहीं, चना आयात में 45 प्रतिशत से अधिक की बड़ी गिरावट आई। ऑस्ट्रेलिया से चने की खेप कम आने का असर कुल आयात पर पड़ा। इसके बावजूद ऑस्ट्रेलिया भारत को चना भेजने वाला सबसे बड़ा देश बना रहा और जनवरी-जून में वहां से 6.03 लाख टन से अधिक चना आया। तंज़ानिया से करीब 28,743 टन चना आया, जबकि ब्रिटेन और म्यांमार समेत अन्य देशों से भी आपूर्ति हुई।
घरेलू चना सस्ता होने से आयात घटा, पीली मटर की आवक बढ़ी
इसके उलट पीली मटर का आयात जनवरी-जून 2026 के दौरान 17 प्रतिशत बढ़ा। कनाडा ने भारत को पीली मटर की सबसे ज्यादा आपूर्ति की और वहां से 5.7 लाख टन से अधिक खेप आई। रूस भी पीली मटर का प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहा।
इस तरह 2026 की पहली छमाही में भारत का कुल दाल आयात भले ही थोड़ा कम हुआ हो, लेकिन अलग-अलग दालों की तस्वीर अलग रही। अरहर, मसूर और पीली मटर की बढ़ती विदेशी आवक के मुकाबले चना और उड़द का आयात घटा है।