सीफूड एक्सपोर्ट में भारत की बड़ी छलांग, पहली बार ₹73890 करोड़ के पार पहुंची कमाई, इन देशों ने खरीदा सबसे ज़्यादा झींगा
Gaon Connection | Jun 01, 2026, 15:58 IST
भारत ने 2025-26 में 19.72 लाख मीट्रिक टन समुद्री उत्पादों का रिकॉर्ड निर्यात कर 73,890 करोड़ रुपये की कमाई की। फ्रोजन झींगा सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद रहा, जिसने कुल निर्यात आय में 66 फीसदी से अधिक योगदान दिया। अमेरिका और चीन प्रमुख बाजार रहे, जबकि विशाखापट्टनम, जेएनपीटी और कोच्चि शीर्ष निर्यात बंदरगाह बने।
भारत के सीफूड की दुनिया में बढ़ी मांग
वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत के सीफूड निर्यात ने वित्त वर्ष 2025-26 में नया रिकॉर्ड बनाया है। इस दौरान देश ने 19.72 लाख मीट्रिक टन समुद्री उत्पादों का निर्यात किया जिसकी कुल कीमत 73,890.46 करोड़ रुपये (8.46 अरब डॉलर) रही। यह जानकारी समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA) के अध्यक्ष पी. जवाहर ने दी है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत कार्यरत एमपीईडीए के आंकड़ों के अनुसार अमेरिका और चीन भारतीय समुद्री उत्पादों के सबसे बड़े आयातक बने रहे। वहीं फ्रोजन झींगा (Frozen Shrimp) देश के समुद्री निर्यात का सबसे बड़ा उत्पाद रहा।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 7.92 लाख मीट्रिक टन फ्रोजन झींगा का निर्यात किया। इससे 49,037.93 करोड़ रुपये (5.62 अरब डॉलर) की आय हुई। कुल निर्यात मात्रा में इसकी हिस्सेदारी 40.19 प्रतिशत रही, जबकि समुद्री उत्पाद निर्यात से होने वाली कुल डॉलर आय में इसका योगदान 66.52 प्रतिशत रहा। झींगा निर्यात में रुपये के हिसाब से 13.16 प्रतिशत और डॉलर के हिसाब से 8.64 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
फ्रोजन झींगा के सबसे बड़े खरीदार के रूप में अमेरिका पहले स्थान पर रहा जिसने 2.56 लाख मीट्रिक टन झींगा आयात किया। इसके बाद चीन ने 1.69 लाख मीट्रिक टन, यूरोपीय संघ ने 1.35 लाख मीट्रिक टन, दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों ने 83,810 टन, जापान ने 40,776 टन और मध्य पूर्व के देशों ने 30,478 टन झींगा खरीदा। एमपीईडीए के अनुसार एल. वन्नामी (व्हाइटलेग श्रिम्प) और ब्लैक टाइगर श्रिम्प दोनों के निर्यात में मात्रा और मूल्य के स्तर पर वृद्धि दर्ज की गई।
फ्रोजन मछली भारत का दूसरा सबसे बड़ा समुद्री निर्यात उत्पाद रही जिससे 5,658.37 करोड़ रुपये (643.70 मिलियन डॉलर) की आय हुई। वहीं सूखे समुद्री उत्पाद (Dried Products) तीसरे सबसे बड़े निर्यात वर्ग के रूप में उभरे। इनसे 5,079.09 करोड़ रुपये (577.44 मिलियन डॉलर) की कमाई हुई। इस श्रेणी के निर्यात मूल्य में 78.05 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 1.02 लाख मीट्रिक टन फ्रोजन स्क्विड का निर्यात किया, जिससे 4,493.80 करोड़ रुपये (513.84 मिलियन डॉलर) की आय हुई। वहीं फ्रोजन कटलफिश का निर्यात 13.32 प्रतिशत बढ़कर 67,157 मीट्रिक टन पहुंच गया। इससे 331.96 मिलियन डॉलर की कमाई हुई जो डॉलर मूल्य के हिसाब से 16.25 प्रतिशत की वृद्धि है। इसके अलावा चिल्ड उत्पादों से 622.31 करोड़ रुपये (71.27 मिलियन डॉलर) की आय हुई, जबकि जीवित समुद्री उत्पादों (Live Products) के निर्यात से होने वाली डॉलर आय में 11.46 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
मूल्य के लिहाज से अमेरिका भारतीय समुद्री उत्पादों का सबसे बड़ा बाजार बना रहा। अमेरिका ने 2.79 लाख मीट्रिक टन समुद्री उत्पाद आयात किए जिनकी कीमत 20,263.27 करोड़ रुपये (2.33 अरब डॉलर) रही। हालांकि अमेरिका को होने वाले निर्यात में गिरावट भी दर्ज की गई। रुपये के हिसाब से निर्यात मूल्य 10.82 प्रतिशत, डॉलर के हिसाब से 14.22 प्रतिशत और मात्रा के हिसाब से 19.51 प्रतिशत घट गई। अमेरिका को निर्यात होने वाले भारतीय समुद्री उत्पादों में 93.55 प्रतिशत हिस्सा फ्रोजन झींगा का रहा।
निर्यात मात्रा के लिहाज से चीन सबसे बड़ा आयातक देश रहा। चीन ने 4.90 लाख मीट्रिक टन समुद्री उत्पाद आयात किए जिनकी कीमत 1.61 अरब डॉलर रही। यूरोपीय संघ तीसरा सबसे बड़ा बाजार रहा जहां 2.97 लाख मीट्रिक टन समुद्री उत्पादों का निर्यात हुआ और इससे 1.59 अरब डॉलर की आय हुई। इसके बाद दक्षिण-पूर्व एशिया का स्थान रहा जिसने 4.51 लाख मीट्रिक टन समुद्री उत्पाद आयात किए।
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान समुद्री उत्पादों की सबसे ज्यादा ढुलाई विशाखापट्टनम बंदरगाह, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (JNPT) और कोच्चि बंदरगाह के जरिए की गई।