अप्रैल में 4 महीने के उच्च स्तर पर पहुँची महंगाई, ग्रामीण परिवारों पर बढ़ा खर्च का बोझ, ये चीज़े हुईं महंगी
Gaon Connection | May 12, 2026, 18:13 IST
देश में खुदरा महंगाई अप्रैल में बढ़कर चार महीने के उच्चतम स्तर पर पहुँच गई है। खाने-पीने की चीजों की कीमतों में तेजी से यह वृद्धि हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई शहरी क्षेत्रों की तुलना में अधिक बढ़ी है। टमाटर, नारियल और सोने-चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी ने महंगाई को बढ़ाया है।
महंगाई का नया झटका!
देश में खुदरा महंगाई अप्रैल महीने में बढ़कर चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। खाने-पीने की चीजों की कीमतों में तेजी आने से महंगाई दर बढ़ी है। देश में खुदरा महंगाई अप्रैल 2026 में बढ़कर 3.48% पहुंच गई है। मार्च में यह 3.40% थी। सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार खाद्य महंगाई बढ़ने से कुल महंगाई दर में इजाफा हुआ है। हालांकि आलू और प्याज जैसी कुछ सब्जियों की कीमतों में गिरावट से थोड़ी राहत भी मिली।
अप्रैल में ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा महंगाई बढ़कर 3.74% हो गई, जो मार्च में 3.63% थी। वहीं शहरी क्षेत्रों में यह 3.11% से बढ़कर 3.16% पहुंच गई। अप्रैल में राष्ट्रीय स्तर पर कुल CPI इंडेक्स 105.12 दर्ज किया गया, जबकि मार्च में यह 104.84 था।
खाद्य महंगाई यानी Consumer Food Price Index (CFPI) अप्रैल में बढ़कर 4.20% हो गई। मार्च में यह 3.87% थी। ग्रामीण इलाकों में खाद्य महंगाई 4.26% और शहरी क्षेत्रों में 4.10% दर्ज की गई। विशेषज्ञों के मुताबिक टमाटर, नारियल और ज्वेलरी की कीमतों में तेजी ने खाद्य महंगाई बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई।
अप्रैल में टमाटर की कीमतों में सालाना आधार पर 35.28% की तेजी दर्ज की गई। हालांकि मार्च में यह बढ़ोतरी 36% थी। वहीं चांदी के गहनों की कीमतों में सबसे ज्यादा 144.34% की बढ़ोतरी हुई।
इसके अलावा:
कुछ सब्जियों की कीमतों में गिरावट से महंगाई पर थोड़ा नियंत्रण भी देखने को मिला। अप्रैल में:
हाउसिंग महंगाई अप्रैल में राष्ट्रीय स्तर पर 2.15% रही। ग्रामीण क्षेत्रों में यह 2.65% और शहरी क्षेत्रों में 1.96% दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि मकान और किराए से जुड़ा खर्च फिलहाल नियंत्रित बना हुआ है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने बताया कि अप्रैल के आंकड़ों के लिए देशभर के गांवों और शहरों से पूरी तरह डेटा जुटाया गया। कीमतों की जानकारी 1,407 शहरी बाजारों और 1,465 गांवों से एकत्र की गई। इसमें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के आंकड़े भी शामिल किए गए। मंत्रालय के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में 99.44% और शहरी क्षेत्रों में 99.82% बाजारों से कीमतों की रिपोर्टिंग हुई।
रिजर्व बैंक ने अल नीनो की आशंका को भी महंगाई के लिए बड़ा जोखिम माना है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अल नीनो के असर से मानसून सामान्य से कमजोर रहता है, तो खेती और फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसका सीधा असर बाजार में खाद्यान्न और सब्जियों की सप्लाई पर पड़ेगा, जिससे खाने-पीने की चीजों के दाम और बढ़ सकते हैं। भारत की कृषि व्यवस्था काफी हद तक मानसून पर निर्भर करती है, इसलिए मौसम में बदलाव का असर महंगाई पर भी तेजी से दिखाई देता है।
महंगाई बढ़ने का सबसे ज्यादा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। खाद्य वस्तुओं और जरूरी सामान की कीमतें बढ़ने से परिवारों का मासिक बजट बिगड़ सकता है। अगर आने वाले महीनों में कच्चे तेल, ईंधन और खाद्य पदार्थों के दाम और बढ़ते हैं, तो रोजमर्रा का खर्च और ज्यादा बढ़ सकता है। ऐसे में लोगों को खर्च और बचत दोनों को लेकर ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत पड़ सकती है।
गांवों में ज्यादा बढ़ी महंगाई
खाद्य महंगाई 4.20% पर पहुंची
टमाटर और सोना-चांदी ने बढ़ाया दबाव
इसके अलावा:
- नारियल (कोपरा) की कीमतें 44.55% बढ़ीं
- सोना, हीरा और प्लैटिनम ज्वेलरी 40.72% महंगी हुई
- फूलगोभी की कीमतों में 25.58% का उछाल आया
आलू-प्याज ने दी राहत
- आलू की कीमतें 23.69% घटीं
- प्याज 17.67% सस्ता हुआ