क्या भारत की ओर बढ़ रहा है ' सुपर अल नीनो' का खतरा? जानिए सरकार ने संसद में क्या कहा
Mansi | Jul 30, 2026, 16:15 IST
सरकार ने 'सुपर अल नीनो' की स्थिति को औपचारिक रूप से नहीं स्वीकार किया है। अल नीनो की संभावित तीव्रता चार प्रमुख श्रेणियों में वर्गीकृत करने की परंपरा है। साल 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून में अल नीनो के प्रभाव देखे जा सकते हैं। मौजूदा अनुमान बताते हैं कि यह स्थिति और भी मजबूत हो सकती है और मौसम विभाग इस पर लगातार निगरानी रख रहा है।
अल नीनों के असर पर मौसम आईएमडी की निगरानी
हाल के दिनों में 'सुपर अल नीनो' को लेकर कई तरह की चर्चाएँ सामने आई हैं। इसी बीच पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से इस विषय पर बताया कि विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) और भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा 'सुपर एल नीनो' नाम से कोई आधिकारिक श्रेणी निर्धारित नहीं की गई है।
सरकार ने कहा कि अल नीनो की घटनाओं को सामान्यतः भूमध्यरेखीय मध्य प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में होने वाली असामान्य बढ़ोतरी के आधार पर कमज़ोर, मध्यम, मज़बूत और बहुत मज़बूत श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान एल नीनो की स्थिति विकसित हुई है। जून में इसकी तीव्रता कमज़ोर थी, जबकि जुलाई में यह मध्यम स्तर तक पहुँच गई।
सरकार के अनुसार, मौजूदा आकलन बताते हैं कि अक्टूबर से दिसंबर 2026 के दौरान अल नीनो और अधिक मज़बूत हो सकता है तथा बहुत तीव्र श्रेणी तक पहुँचने की संभावना है। हालांकि, इसका भारत के विभिन्न हिस्सों पर कितना प्रभाव पड़ेगा, यह केवल अल नीनो की तीव्रता पर निर्भर नहीं करेगा। महासागर और वायुमंडल की अन्य परिस्थितियाँ भी मौसम के स्वरूप को प्रभावित करती हैं। इसलिए अभी यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि इसका मानसून, वर्षा और कृषि पर कितना व्यापक असर पड़ेगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 'सुपर अल नीनो' शब्द किसी आधिकारिक मौसम श्रेणी का हिस्सा नहीं है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन और आईएमडी अल नीनो की तीव्रता को कमज़ोर, मध्यम, मज़बूत और बहुत मज़बूत श्रेणियों में ही आँकते हैं। ऐसे में 'सुपर अल नीनो' शब्द का इस्तेमाल आधिकारिक मौसम पूर्वानुमानों में नहीं किया जाता। सरकार ने लोगों से मौसम संबंधी जानकारी के लिए केवल अधिकृत एजेंसियों द्वारा जारी पूर्वानुमानों और सलाह पर भरोसा करने की अपील की है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग अल नीनो और अन्य प्रमुख जलवायु कारकों की लगातार निगरानी कर रहा है। विभाग केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ विभिन्न हितधारकों को नियमित रूप से मौसमी, मासिक और विस्तारित अवधि के मौसम पूर्वानुमान उपलब्ध करा रहा है। इससे कृषि, जल संसाधन और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभाग समय रहते आवश्यक तैयारियाँ कर सकते हैं। मौसम विभाग अगले सात दिनों के लिए प्रभाव आधारित पूर्वानुमान और जोखिम आधारित चेतावनियाँ भी जारी करता है। इनका उद्देश्य राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और किसानों को संभावित मौसमीय परिस्थितियों के बारे में पहले से सचेत करना है, ताकि आवश्यक कदम समय रहते उठाए जा सकें। बदलती जलवायु परिस्थितियों के बीच समय पर मिलने वाली मौसम संबंधी जानकारी खेती और आपदा प्रबंधन, दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सरकार ने कहा कि अल नीनो की घटनाओं को सामान्यतः भूमध्यरेखीय मध्य प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में होने वाली असामान्य बढ़ोतरी के आधार पर कमज़ोर, मध्यम, मज़बूत और बहुत मज़बूत श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान एल नीनो की स्थिति विकसित हुई है। जून में इसकी तीव्रता कमज़ोर थी, जबकि जुलाई में यह मध्यम स्तर तक पहुँच गई।