अब अंतरिक्ष से दिखेगा खेत-खलिहान का हाल, ISRO का EOS-05 लॉन्च, जानिए क्यों है ख़ास
Mansi | Sept 04, 2026, 18:07 IST
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने ईओएस-05 सैटेलाइट का सफल प्रक्षेपण किया है, जो भारत का पहला जियोसिंक्रोनस इमेजिंग सैटेलाइट है। यह सैटेलाइट विशेष रूप से कृषि और आपदा प्रबंधन के लिए जरूरी जानकारियां जुटाएगा। ईओएस-03 मिशन की असफलता के बाद यह सफलता भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो हमारी धरती निगरानी की क्षमता को और अधिक बढ़ाएगा।
EOS-05 उपग्रह के ज़रिए ISRO ने अंतरिक्ष से धरती की निगरानी की अपनी क्षमता को और मज़बूत कि
किसान के खेत में फसल कैसी है, किसी इलाक़े में बाढ़ का पानी कितना फैला है या किसी बड़े क्षेत्र में धरती पर क्या बदलाव हो रहे हैं, ऐसी कई जानकारियाँ अब अंतरिक्ष से जुटाने की भारत की क्षमता और मजबूत हुई है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 4 सितंबर 2026 को GSLV-F17 रॉकेट के ज़रिए EOS-05 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा। यह प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से किया गया। ISRO के मुताबिक़ GSLV-F17 ने EOS-05 को उसकी निर्धारित सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफ़र ऑर्बिट (Sub-GTO) में सफलतापूर्वक स्थापित किया।
EOS-05 इसलिए ख़ास है क्योंकि ISRO इसे भारत का पहला जियोसिंक्रोनस कक्षा से इमेजिंग करने वाला सैटेलाइट बता रहा है। यानी यह सामान्य अर्थ ऑब्ज़र्वेशन सैटेलाइटों से अलग तरह की निगरानी क्षमता उपलब्ध कराने की दिशा में एक अहम क़दम है। ISRO के आधिकारिक रिकॉर्ड में EOS-05 को अत्याधुनिकअर्थ ऑब्ज़र्वेशन स्पेसक्राफ़्ट बताया गया है। इसका इस्तेमाल धरती की निगरानी और उससे जुड़ी जानकारियाँ जुटाने के लिए किया जाएगा।
EOS-05 को जियोसिंक्रोनस कक्षा में काम करने के लिए तैयार किया गया है। ISRO के GSLV-F17/EOS-05 Mission पेज के मुताबिक़, यह भारत का पहला ऐसा इमेजिंग सैटेलाइट है जिसे जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से पृथ्वी की तस्वीरें और डेटा जुटाने के लिए विकसित किया गया है। मिशन में इस्तेमाल हुआ GSLV-F17, भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV) की 19वीं उड़ान है। जियोसिंक्रोनस कक्षा में काम करने वाले सैटेलाइट का एक बड़ा फ़ायदा यह है कि वह धरती के किसी बड़े क्षेत्र पर लगातार निगरानी रखने के लिए उपयोगी हो सकता है। ऐसे सैटेलाइटों से मिलने वाला डेटा मौसम, पर्यावरण, आपदा प्रबंधन और धरती की सतह में होने वाले बदलावों को समझने में मदद कर सकता है।
EOS-05 का इस्तेमाल केवल अंतरिक्ष विज्ञान तक सीमित नहीं रहेगा। अर्थ ऑब्ज़र्वेशन से मिलने वाले डेटा का इस्तेमाल धरती पर मौजूद संसाधनों और बदलावों को समझने में किया जा सकता है। खेती में भी सैटेलाइट से मिलने वाली तस्वीरें और डेटा फसल की स्थिति, खेती के इलाक़ों में बदलाव और मौसम या प्राकृतिक घटनाओं के असर का आकलन करने में मददगार हो सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि सैटेलाइट सीधे किसी किसान के खेत में जाकर उसकी फसल की बीमारी बता देगा। बल्कि अंतरिक्ष से मिलने वाले डेटा को वैज्ञानिक और संबंधित सरकारी एजेंसियाँ अलग-अलग स्रोतों के साथ मिलाकर इस्तेमाल कर सकती हैं। इससे बड़े इलाक़े में खेती की स्थिति को समझना और योजना बनाना आसान हो सकता है।
भारत जैसे बड़े देश में बाढ़, चक्रवात, जंगल की आग और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान तेज़ी से जानकारी जुटाना बेहद ज़रूरी होता है। अर्थ ऑब्ज़र्वेशन सैटेलाइट्स ऐसी परिस्थितियों में प्रभावित इलाक़ों की तस्वीरें और दूसरे तरह के डेटा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। EOS-05 से मिलने वाली इमेजिंग क्षमता भी धरती की निगरानी को मजबूत करने की दिशा में अहम है। इससे बड़े इलाक़ों में होने वाले बदलावों को देखने और उनका आकलन करने में मदद मिल सकती है। आपदा के समय ऐसी जानकारी राहत और बचाव से जुड़ी एजेंसियों के लिए उपयोगी हो सकती है।
EOS-05 की सफलता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले GSLV-F10 के ज़रिए EOS-03 को अंतरिक्ष में भेजने का प्रयास किया गया था। ISRO की आधिकारिक लॉन्च सूची के मुताबिक़ 12 अगस्त 2021 को हुआ GSLV-F10/EOS-03 मिशन सफल नहीं हो पाया था। ISRO की एक आधिकारिक जानकारी में बताया गया था कि उस मिशन की विफलता का कारण क्रायोजेनिक अपर स्टेज में आई तकनीकी समस्या थी। फ़ेल्योर एनालिसिस कमेटी ने जाँच के बाद क्रायोजेनिक स्टेज को अधिक मज़बूत बनाने के लिए सुधारों की सिफ़ारिश की थी।
इस मिशन में इस्तेमाल किया गया GSLV-F17, GSLV का 19वाँ मिशन है। ISRO के लॉन्च रिकॉर्ड में इससे पहले GSLV-F16/NISAR मिशन को जुलाई 2025 में सफलतापूर्वक लॉन्च किए जाने का रिकॉर्ड दर्ज है। ISRO के मुताबिक़, GSLV-F17 ने EOS-05 को Sub-GTO में स्थापित करके अपना मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया। इसके बाद सैटेलाइट को अपनी निर्धारित कक्षा में पहुँचाने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
आज खेती सिर्फ़ खेत में खड़े होकर फसल देखने तक सीमित नहीं रह गई है। मौसम, पानी, मिट्टी, फसल और प्राकृतिक आपदाओं से जुड़ी बड़ी तस्वीर समझने में सैटेलाइट डेटा की भूमिका लगातार बढ़ रही है। EOS-05 इसी दिशा में भारत की Earth Observation क्षमता को आगे ले जाने वाला मिशन है। ISRO के आधिकारिक रिकॉर्ड में EOS-05 को Earth Observation spacecraft और भारत का पहला जियोसिंक्रोनस इमेजिंग सैटेलाइट बताया गया है। ऐसे में इसकी सफलता का असर केवल अंतरिक्ष क्षेत्र तक सीमित नहीं माना जा सकता। आने वाले समय में अंतरिक्ष से मिलने वाली जानकारी का बेहतर इस्तेमाल खेती, पर्यावरण, आपदा प्रबंधन और धरती की निगरानी से जुड़े कामों में किया जा सकता है।
EOS-05 इसलिए ख़ास है क्योंकि ISRO इसे भारत का पहला जियोसिंक्रोनस कक्षा से इमेजिंग करने वाला सैटेलाइट बता रहा है। यानी यह सामान्य अर्थ ऑब्ज़र्वेशन सैटेलाइटों से अलग तरह की निगरानी क्षमता उपलब्ध कराने की दिशा में एक अहम क़दम है। ISRO के आधिकारिक रिकॉर्ड में EOS-05 को अत्याधुनिकअर्थ ऑब्ज़र्वेशन स्पेसक्राफ़्ट बताया गया है। इसका इस्तेमाल धरती की निगरानी और उससे जुड़ी जानकारियाँ जुटाने के लिए किया जाएगा।