National Jackfruit Day: जिस कटहल के बीज को लोग कूड़े में फेंक देते थे, उसी से केरल की इस महिला ने बना दी 'कॉफी', अब किसानों की भी हो रही कमाई

Lata Mishra | Jul 04, 2026, 13:22 IST
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कटहल के बीजों से तैयार की गई कैफीन-मुक्त कॉफी ने न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार किया है, बल्कि महिलाओं को भी रोजगार के नए अवसर प्रदान किए हैं। केरल की उद्यमी जैमी साजी ने एक ऐसी अभिनव सोच से यह सिद्ध किया है कि अक्सर अनदेखी की जाने वाली चीजें भी संसाधन बन सकती हैं।

इस पहल से किसानों को अतिरिक्त आय का नया स्रोत, ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन का एक सफल मॉडल सामने आया है।
इस पहल से किसानों को अतिरिक्त आय का नया स्रोत, ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन का एक सफल मॉडल सामने आया है।
घर में जब कटहल कटता है तो उसका गूदा तो सब खाते हैं, लेकिन बीज अक्सर कूड़ेदान में चले जाते हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि यही बीज किसी किसान की अतिरिक्त कमाई का जरिया भी बन सकते हैं। केरल के वायनाड जिले की रहने वाली जैमी साजी ने यही कर दिखाया है। उन्होंने कटहल के बीजों से ऐसी कॉफी तैयार की है, जिसका स्वाद तो कॉफी जैसा है, लेकिन उसमें कैफीन नहीं होती। उनकी इस नई सोच से न सिर्फ एक नया उत्पाद बना, बल्कि किसानों और गांव की महिलाओं के लिए रोजगार के रास्ते भी खुले।

National Jackfruit Day पर यह कहानी बताती है कि खेती से निकलने वाली ऐसी चीजें, जिन्हें हम अक्सर बेकार समझ लेते हैं, सही सोच और फूड प्रोसेसिंग के जरिए कितनी कीमती बन सकती हैं।

एक कार्यक्रम से आया नया विचार

जैमी साजी बताती हैं कि कुछ साल पहले कृषि विभाग के एक कार्यक्रम में उन्हें पता चला कि कटहल का लगभग हर हिस्सा इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन उसके बीजों का उपयोग बहुत कम होता है। यहीं से उनके मन में सवाल आया—क्या इन बीजों से भी कुछ ऐसा बनाया जा सकता है, जिसकी बाजार में मांग हो? उन्होंने कई महीनों तक अलग-अलग तरीके अपनाए। आखिरकार बीजों को सुखाकर, भूनकर (रोस्ट करके) और पीसकर उन्होंने एक ऐसा पेय तैयार किया, जो स्वाद में कॉफी जैसा है।

जिन बीजों की कोई कीमत नहीं थी, आज किसान उन्हें बेच रहे हैं

पहले किसान और घरों में लोग कटहल के बीजों को फेंक देते थे। लेकिन अब जैमी साजी का स्टार्टअप इन्हीं बीजों को किसानों से करीब ₹2,500 प्रति क्विंटल की दर से खरीदता है। यानी जिस चीज की पहले कोई कीमत नहीं थी, वही अब किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का जरिया बन गई है। खेती में ऐसे उदाहरण कम नहीं हैं, जहां फसल से ज्यादा उसके उप-उत्पाद (By-products) किसानों को नई कमाई दिला रहे हैं। जैमी का मॉडल भी उसी दिशा में एक नई पहल है।

गांव की महिलाओं को मिला रोजगार

जैमी की यूनिट में आज करीब 20 महिलाएं काम कर रही हैं। कोई बीज साफ करती है, कोई उन्हें सुखाती है, कोई रोस्टिंग करती है तो कोई पैकिंग का काम संभालती है। यह काम सिर्फ रोजगार नहीं दे रहा, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी बना रहा है। कई महिलाओं का कहना है कि अब उनके हाथ में अपनी कमाई आती है, जिससे वे घर के खर्च और बच्चों की जरूरतों में मदद कर पाती हैं।

क्या सचमुच कॉफी जैसी होती है?

यह पारंपरिक कॉफी नहीं है। इसे कटहल के भुने हुए बीजों से बनाया जाता है। इसका स्वाद और खुशबू कॉफी जैसी महसूस होती है, लेकिन इसमें कैफीन नहीं होती। इसलिए यह उन लोगों के लिए एक विकल्प हो सकता है, जो कैफीन कम लेना चाहते हैं।

किसानों के लिए क्या सीख है?

कृषि विशेषज्ञ लंबे समय से कहते रहे हैं कि किसानों की आय बढ़ाने का रास्ता केवल ज्यादा उत्पादन नहीं, बल्कि वैल्यू एडिशन से भी होकर जाता है। कटहल के बीजों से बनी यह कॉफी उसी सोच का उदाहरण है। अगर गांवों में उपलब्ध फलों, सब्जियों और उनके उप-उत्पादों से नए उत्पाद तैयार किए जाएं, तो किसानों को बेहतर दाम मिल सकते हैं और स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ सकता है।

National Jackfruit Day क्यों है खास?

हर साल 4 जुलाई को National Jackfruit Day मनाया जाता है। इस दिन का मकसद सिर्फ कटहल के पोषण गुणों की चर्चा करना नहीं, बल्कि यह बताना भी है कि इस फल से जुड़े नए प्रयोग किसानों की आय बढ़ाने में कैसे मदद कर सकते हैं। केरल की जैमी साजी की यह कहानी इसी बात की मिसाल है कि गांवों से निकले छोटे-छोटे नवाचार भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। जिस कटहल के बीज को कभी बेकार समझा जाता था, वही आज किसानों की अतिरिक्त कमाई, महिलाओं के रोजगार और एक नए खाद्य उत्पाद की पहचान बन चुका है।
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