जापान ने भारतीय आमों पर लगाई रोक, अल्फांसो समेत कई प्रीमियम किस्मों का निर्यात प्रभावित, जानिए मामले की वजह
Gaon Connection | May 29, 2026, 13:47 IST
जापान ने भारतीय आमों के आयात पर रोक लगा दी है। भारत के आम निर्यात उपचार केंद्रों में कीट नियंत्रण में खामियां पाई गई हैं। इससे अल्फांसो, केसर जैसी प्रीमियम किस्मों का निर्यात प्रभावित होगा। यह रोक ऐसे समय आई है जब आम का सीजन अपने चरम पर है। किसान पहले से ही मौसम की मार झेल रहे हैं।
आम किसानों की बढ़ीं मुश्किलें
भारत के आम निर्यात को बड़ा झटका लगा है। जापान ने भारतीय आमों के आयात पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह फैसला भारत के निर्यात उपचार (ट्रीटमेंट) केंद्रों में कीट नियंत्रण प्रक्रियाओं में खामियां पाए जाने के बाद लिया गया है। इससे अल्फांसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसी प्रीमियम भारतीय आम किस्मों का निर्यात प्रभावित होगा। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब आम का सीजन अपने चरम पर है और किसान पहले से ही मौसम की मार झेल रहे हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, जापानी अधिकारियों ने इस साल की शुरुआत में भारत के वेपर हीट ट्रीटमेंट (VHT) केंद्रों का निरीक्षण किया था। इन केंद्रों में निर्यात से पहले आमों को कीटमुक्त बनाने की प्रक्रिया पूरी की जाती है, ताकि फल मक्खी (फ्रूट फ्लाई) जैसे हानिकारक कीटों का खतरा खत्म हो सके। निरीक्षण के दौरान कुछ संचालन संबंधी अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद जापान ने भारतीय आमों की खेपों को लेकर चिंता जताई।
जापान की कृषि व्यवस्था में फल मक्खी जैसे बाहरी कीटों को लेकर शून्य-सहनशीलता (Zero Tolerance) नीति अपनाई जाती है। माना जा रहा है कि इसी वजह से जापानी अधिकारियों ने सख्त कदम उठाते हुए आयात पर रोक लगाने का फैसला किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, योकोहामा प्लांट प्रोटेक्शन अथॉरिटी ने आयातकों को सूचित किया है कि 25 मार्च 2026 के बाद जारी किए गए निरीक्षण प्रमाणपत्रों वाली भारतीय आमों की खेप स्वीकार नहीं की जाएगी।
करीब 20 वर्षों में यह पहला मौका है, जब जापान ने भारतीय आमों पर इतना बड़ा प्रतिबंध लगाया है। इससे पहले भी फल मक्खी के संक्रमण को लेकर जापान ने भारतीय आमों पर रोक लगाई थी, जिसे भारत द्वारा अपनी उपचार और प्रमाणन प्रणाली मजबूत करने के बाद वर्ष 2006 में हटा लिया गया था।
हालांकि जापान भारतीय आमों का सबसे बड़ा विदेशी बाजार नहीं है, लेकिन विशेषज्ञ इसे भारतीय कृषि निर्यात की साख के लिए झटका मान रहे हैं। निर्यातकों को आशंका है कि इस फैसले के बाद अन्य देशों में भी भारत की गुणवत्ता नियंत्रण और निर्यात अनुपालन व्यवस्था को लेकर जांच बढ़ सकती है।
इस बीच महाराष्ट्र के अल्फांसो उत्पादक क्षेत्रों में किसान पहले से ही भीषण गर्मी और अल नीनो से जुड़े मौसमीय प्रभावों के कारण फसल नुकसान झेल रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में 85 से 90 प्रतिशत तक उत्पादन प्रभावित होने का अनुमान है। ऐसे में जापान की रोक ने किसानों और निर्यातकों की चिंता और बढ़ा दी है।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है और हर साल करीब 2.8 करोड़ टन आम का उत्पादन करता है। अब उम्मीद की जा रही है कि भारतीय अधिकारी जापानी नियामकों के साथ बातचीत कर जल्द समाधान निकालने की कोशिश करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात उपचार केंद्रों की निगरानी, दस्तावेजी प्रक्रिया और कीट नियंत्रण मानकों को और मजबूत कर जापानी बाजार तक दोबारा पहुंच बनाई जा सकती है।